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Showing posts from March, 2017

"दीवारें,बेड़ियाँ,हथकड़ियाँ,समाज-धर्म के ये ,नियम और क़ानून"बना दिया हमें "फूल"?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न. +9414657511.

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क्या अंग्रेजों के रोमियो-जूलिएट जैसे आशिक और क्या भारतीय उपमहाद्वीप के हीर - राँझा ,लैला-मजनू,ससि-पुन्नू और सिरी-फरहाद जैसे आशिकों से लेकर आजकल के आधुनिक "डूड",सभी इसी बात को लेकर परेशान ही रहे कि समाज उन्हें आखिर "प्यार"करने क्यों नहीं देता ?तरीके बदल गए रोकने के लेकिन आज भी दीवारें कड़ी कर दी जाती हैं,बेड़ियाँ समाज-धर्म के नाम की तरहतरह के क़ानून बना कर पहना दी जाती हैं !इस समाज के द्वारा !
                                       उनके समर्थक तब भी थे और आज भी हैं "जे. एन. यू." आदि में !उनके विरोधी तब भी थे "मौलवी-ब्राह्मण के रूप में और आज भी हैं "योगी-फतवों"के रूप में !तो क्या हम आज भी वहीँ खड़े हैं जहां तब थे ??कहाँ है 21वीं सदी के लोग और तथाकथित "आधुनिक"लोग ?प्यार के पक्ष में कोई बोलता क्यों नहीं?क्या वयस्क हो जाने के बाद "तन-मन-धन"से प्यार करना गलत है ?क्या बहार के मौसम में दो प्रेमियों का "गुटरगूं"करना गलत है ?कल एक मित्र मुझसे समाचार पत्र पढ़ते पढ़ते पूछने लगा कि "फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन,या ,गुलशन में &quo…

"अंक गणित जीवन का ,भारत के परिपेक्ष्य में"!?- पीताम्बर दत्त शर्मा ! "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार"!

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हर देश के निवासी की ज़िन्दगी उस देश के "प्रकिर्तिक,सामाजिक,और संविधान के अनुसार गुज़रती है !इन सब के नियम पालन करने के बाद ,इन्सान अपनी पसन्द-नापसन्द,ख़ुशी-दुखी और दूसरों के साथ घुल-मिल सकता है !मूल रूप से इस पृथ्वी पर जन्मे इंसान की क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं लगभग एक जैसी होते हुए भी भारी अंतर लिए हुए होती हैं !उसका खान-पान,रहन-सहन और जीवन के अन्य पल उन्हीं"9 रसों"से भरे हुए होते हैं !
                           अंकों का  जीवन में बड़ा महत्त्व है जी!हम कौन सी तारीख को कौन सी घड़ी ,कौन से पल और कौन से नक्षत्र में पैदा हुए हैं ,ये हमारे लिए अतिमहत्वपूर्ण होता है !हमारी सरकार भी हमसे समय-समय पर हमारी जन्म तिथि पूछती रहती है !हमें शिक्षा के हर क्षेत्र में ,हर स्तर को पास करते वक़्त भी ज्यादा से ज्यादा अंक लाने होते हैं !नेताओं को ज्यादा अंकों में वोट लेने होते हैं !इतना ही नहीं मित्रो,सन्तों को भी ज्यादा अपने अनुयायी बनाने और दिखाने पड़ते हैं !कमाई भी हमें ज्यादा अंकों में करनी पड़ती है !
                     इन्हीं अंकों के फेर में क्रिकेट वाले आजकल हर रोज़ मैच खेलते रहते हैं !सट्टे वाल…

"हे नेताओ !!अब "राम"को राजनीती से विदा कर ही दो"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार) मो.न. +9414657511

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जब भी भारत में कोई हिन्दु इस संसार से विदा होता है तो सभी कहते हैं कि "राम नाम सत्य है , सत्य बोलने से ही गति है "! मुझे ये तो पता नहीं कि जिस दिन वास्तव में राम जी इस संसार से अपने सारे काम निपट गए समझ कर विदा हो रहे थे तो लोगों ने क्या बोला था ! लेकिन ये अवश्य जानता हूँ कि वो सारी समस्याओं का निराकरण करके नहीं गए थे ! इसीलिए हमें अपने झगडे माननीय न्यायालय के समक्ष लेकर जाने पड़ते हैं !वो "तारीख पर तारीख "देते देते जब तलक थक जाते हैं ,तब तलक या तो "मुद्दई"की राम नाम सत्य हो जाती है या सम्बन्धित किसी और पक्ष की !तब सच्चाई भी अपने आप किसी ना किसी के श्रीमुख से बाहर आ ही जाती है !और फैसला हो जाता है !
                        बहुत से मुद्दे अदालत के बाहर ही निपट जाते हैं !वो लोग बुद्धिमान होते हैं जो ऐसा करके अपना समय,स्वास्थ्य और धन बचा लेते हैं !लेकिन कइयों को "लटकने"वाली स्थिति "फायदा"भी पहुंचाती है !तो वो अदालतों में केस चलने देते हैं और "मज़े"करते करते अल्लाह को प्यारे हो जाते हैं !राम जी के मामले में भी ये दूसरी बात सही साबित…

"मैं नहीं,आपकी EVM खराब है जी"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र-टिप्पणीकार) मो.न.+9414657511.

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एक सौ पच्चीस साल पुराणी पार्टी का हाल हमारे सामने है ! प्रादेशिक पार्टियों के सामने हाथ फैलाती नज़र आती है ,और मांगती नज़र आती है कि इतने विधायकों की टिकटें देदो प्लीज़ ! वो भी  पाते हैं बेचारे राष्ट्रिय पार्टी के उपाध्यक्ष महोदय !बेचारों के अन्य नेता,मुख्यमंत्री पद के दावेदार,प्रदेशाध्यक्ष सहित सब अब मुंह छिपाते फिरते हैं !कोई पूछता है कि कौन जिम्मेदार है इस हार का ,तो बड़ी कुर्बानी देने के अंदाज़ में छाती पर हाथ रख कर कहते हैं कि "निस्संदेह हम कार्यकर्त्ता"हैं !हमारे राहुल जी तो अपनी बहन,माता और जीजा जी के साथ अच्छा काम कर रहे हैं !उन्हें तो अब और ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी पार्टी में मिलनी चाहिए !ताकि वो अपने अन्य मित्रों के संग मिलकर और ज्यादा "खुलकर"काम कर सकें !
                         उधर अखिलेश एन्ड पार्टी अभी भी उन्हें "प्रधानमंत्री पद"का दावेदार मानती है !दबी जुबान में वो कोंग्रेस को जिम्मेदार मानते हैं !माननीय चाचा जी और बाऊ जी अब " मार्ग-दर्शक "की भूमिका निभाएंगे !!हमारी बहन मायावती जी तो और भी अच्छा बहाना ढूंढ लायीं ! पहली बात तो किसी की हिम्…

राजनीति राष्ट्रीय पर्व है, चुनावी जीत देश का सबसे बड़ा लक्ष्य !!

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52 करोड़ युवा वोटर। 18 से 35 बरस का युवा । 18 बरस यानी जो बारहवीं पास कर चुका होगा। और जिसके सपने खुले आसमान में बेफिक्र उड़ान भर रहे होंगे । 25 बरस का युवा जिसकी आंखों में देश को नये तरीके से गढने के सपने होंगे । 30 बरस का युवा जो एक बेहतरीन देश चाहता होगा। और अपनी शिक्षा से देश को नये तरीके से गढने की सोच रहा होगा। 35 बरस का यानी जो नौकरी के लिये दर दर की ठोकरें खाते हुये हताश होगा। लेकिन सपने मरे नहीं होंगे। तो क्या 2019 का चुनाव सिर्फ आम चुनाव नहीं बल्कि बदलते हिन्दुस्तान की ऐसी तस्वीर होगी जिसके बाद देश नई करवट लेगा। हर हाथ में मोबाइल । हर दिमाग में सोशल मीडिया। सूचनाओं की तेजी। रियेक्ट करने में कहीं ज्यादा तेजी। कोई रोक टोक नहीं। और अपने सपनों के भारत को गढते हुये हालात बदलने की सोच। तो क्या 2019 के चुनाव को पकडने के लिये नेताओ को पारंपरिक राजनीति छोड़नी पड़ेगी। या फिर जिसतरह का जनादेश पहले दिल्ली और उसके बाद यूपी ने दिया है उसने पारंपरिक राजनीति करने वाली पार्टियो ही नही नेताओं को भी आईना दिखा दिया है कि वह बदल जाये । अन्यथा देश बदल रहा है । 
लेकिन युवा भारत के सपने पाले हिन्दु…

जनादेश गढ़ रहा है सियासी लोकतंत्र को.......??

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10 करोड़ से ज्यादा बीजेपी सदस्य। 55 लाख 20 हजार स्वयंसेवक, देश भर में 56 हजार 859 शाखायें। 28 हजार 500 विद्यामंदिर। 2 लाख 20 हजार आचार्य। 48 लाख 59 हजार छात्र । 83 लाख 18 हजार 348 मजदूर बीएमएस के सदस्य। 589 प्रकाशन सदस्य । 4 हजार पूर्ण कालिक सदस्य । एक लाख पूर्वसैनिक परिषद । 6 लाख 85 हजार वीएचपी-बंजरंग दल के सदस्य । यानी देश में सामाजिक-सांगठनिक तौर पर आरएसएस के तमामा संगठन और बीजेपी का राजनीतिक विस्तार किस रुप में हो चुका है, उसका ये सिर्फ एक नजारा भर है। क्योंकि जब देश में राजनीतिक सत्ता के लिये सामाजिक सांगठनिक हुनर मायने रखता हो, तब कोई दूसरा राजनीतिक दल कैसे इस संघ -बीजेपी के इस विस्तार के आगे टिकेगा, ये अपने आप में सवाल है। क्योंकि राजनीतिक तौर पर इतने बडे विस्तार का ही असर है कि देश के 13 राज्यों में बीजेपी की अपने बूते सरकार है। 4 राज्यों में गठबंधन की सरकार है। और मौजूदा वक्त में सिर्फ बीजेपी के 1489 विधायक है तो संसद में 283 सांसद हैं। और ये सवाल हर जहन में घुमड़ सकता है कि संघ-बीजेपी का ये विस्तार देश के 17 राज्यो में जब अपनी पैठ जमा चुका है तो फिर आने वाले वक्त में कर्नाटक…

लखनऊ की तथाकथित आतंकी मुठभेड़ सच है या तमाम फर्जी घटनाओं की तरह एक ड्रामा...???सच्च क्या है ?

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सात मार्च को दिन का आखरी पहर मीडिया के जांबाजों का चिल्ला-चिल्ला कर बताना कि संदिग्ध आतंकवादियों के साथ लखनऊ के ठाकुरगंज (हाजी कालोनी) में पुलिस का मुठभेड़ जारी है, आतंकी को चारों तरफ से घेर लिया गया है। हाजी कालोनी लखनऊ शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका है। और यहाँ पिछले कई घण्टों से isis के आतंकियों को पुलिस ने घेर रखा है, दोनों तरफ से गोली बारी चालू है। पूरे शहर में दहशत का माहौल है हर कोई खौफ में है (तब तक ऐसा कुछ नहीं था, जब कि मीडिया खौफ जदा करने की पूरी कोशिश में लगा हुआ था। जब कि मीडिया को चाहिये था कि हकीक़त से रुबरू करा कर अवाम के दिलो से खौफ निकाला जाये)। सूरज की रोशनी मद्धम होकर लोगों को दिन के खत्म होने का एहसास करा रही थी। तो दूसरी जानिब हमारा मीडिया हकीकत की तह में जाने के बजाय अफवाहों के जरिये लोगों को खौफ के साथ रात गुजारने के लिए बेबस कर रहा था। लखनऊ शहर के लोगों के साथ पूरा मुल्क नींद के आगोश में जाने के बजाय हकीकत से वाकफियत के लिए टीवी स्क्रीन पर निगाहें जमाये बैठा था। टीवी रिपोर्टर बड़े जोशो खरोश के साथ बगैर किसी डर के तथाकथित isis आतंकवादी के छिपे हुए घर के गेट पर से …

"क्या सखी "रौ-ली"?ना सखी "होली" ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र-टिप्पणीकार) मो.न.+९४१४६५७५११

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आजकल सभी टीवी चेनलों पर चुनावी चर्चा के साथ-साथ कवितायेँ और ठिठोलियाँ भी खूब देखने-सुनने को मिल रही हैं !कवियों के मौज बनी हुई है !भाई कुमार विश्वास जी तो इंडियन आइडोल में ही पहुच गए !कविता की सभी "विधाएं" सुनकर आनन्द की अनुभूति हो रही है !लोकतंत्र के पांचवे खम्भे "यानी कि इंटरनेट पर तो हमेशां ही कवियों - कवित्रियों की रचनाएँ पढता ही रहता हूँ !चाहे असली लेखकों की हों या नकली कवियों की , कोई फर्क इसलिए नहीं पड़ता क्योंकि मुझे कौन सी कोई परीक्षा देनी है ! आइये होली की मनभावन बेला पर मैं भी आपको अपनी पसंद की कुछ चुटकियाँ पढवाता हूँ !मजा आयेगा !!जनाब ज़रा पढ़िए तो...................!!
अंग-अंग फड़कन लगे, देखा ‘रंग-तरंग’
स्वस्थ-मस्त दर्शक हुए, तन-मन उठी उमंग
तन-मन उठी उमंग, अधूरी रही पिपासा
बंद सीरियल किया, नहीं थी ऐसी आशा
हास्य-व्यंग्य के रसिक समर्थक कहाँ खो गए
मुँह पर लागी सील, बंद कहकहे हो गए

जिन मनहूसों को नहीं आती हँसी पसंद
हुए उन्हीं की कृपा से, हास्य-सीरियल बंद
हास्य-सीरियल बंद, लोकप्रिय थे यह ऐसे
श्री रामायण और महाभारत थे जैसे
भूल जाउ, लड्डू पेड़ा चमचम रसगुल्ले
अब टी.वी.पर आएँ काका …