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Showing posts from February, 2017

"मैसर्ज दलीप सिंह &डाटरज़" - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न.+9414657511

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मित्रो ! सादर नमस्कार स्वीकार करें ,और अपना ढेर सारा प्यार हमेशां की तरह मुझे आशिर्वाद के रूप में देते रहा करें !जैसा की आप जानते हैं कि 23 फ़रवरी 2017 को मेरी प्यारी बेटी सुकृति का शुभ-विवाह पटना में चिरंजीव ओम्कार झा जी से हुआ है !बहुत ही प्यारा और उदार प्रकीर्ति वाला परिवार हमें आप सब की दुआओं और परमात्मा की असीम कृपा से मिला है !हमारी बेटी ने कड़ी मेहनत से पढ़ाई करके जर्नलिज़म में मास्टर किया है ,आज वो "पत्रिका राजस्थान के टीवी चेनेल में प्रोड्यूसर और एंकर के पद पर कार्यरत है !आज मैं उसकी वजह से भी जाना जाता हूँ !इसीलिए मैंने वो हैडिंग दिया है जो आमिर खान जी अपने नए विज्ञापन में बेटियों के गुणों का बखान करते हुए मिठाई की दूकान में लड्डू बेचते नज़र आ रहे हैं !बहुत ही अच्छा और भावुक कर देने वाला विज्ञापन बनाया गया है !आप भी अवश्य देखियेगा जी !
            कुछ चित्र बेटी की शादी के आपकी नज़र कर रहा हूँ !!आप भी मुझे और मेरी प्यारी बेटी को अपना आशीर्वाद दे सकते हैं जी !आपके अनमोल कॉमेंट्स मेरे लिए जीवन दान जैसा काम देते हैं और प्रेरणा भी देते हैं !इस कार्यक्रम में बिहार भाजपा के संगठन मं…

"मेरी सुपुत्री आयुष्मति सुकृति शर्मा का शुभ पानी-ग्रहण संस्कार"!!- पीताम्बर दत्त शर्मा

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प्रिय मित्रो !! सादर सप्रेम नमस्कार ! कृपया स्वीकार करें !कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात समाचार ये है कि मेरी सुपुत्री आयुष्मति सुकृति शर्मा का शुभ विवाह आयुष्मान ओम्कार झा सुपुत्र श्रीमती इंदिरा झा,श्रीमान डॉक्टर जितेन्द्र झा निवासी चंदेल,कटरा बिहार से दिनांक 23 फरवरी 2017 को पटना में होने जा रहा है !निमन्त्रण पत्र मैं पहले ही आपको इंटरनेट के माध्यम से भेज चुका हूँ !अब आपसे इस शुभ कार्य में पहुँचने की दोबारा प्रार्थना करते हुए दिनांक 1 मार्च 2017 तक आज्ञा चाहता हूँ !इतने दिन मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा ! आपकी बहुत याद आएगी !क्योंकि आप सब मेरे मित्र ही नहीं बल्कि मेरे अनमोल पाठक भी हो ! आपके अनमोल कॉमेंट्स मुझे प्रेरित करते रहते हैं और मार्गदर्शन भी करते रहते हैं !
                           आभार सहित सधन्यवाद !
                                         आपका अपना मित्र ,
                                            पीताम्बर दत्त शर्मा ,
                                               मो.न.+9414657511 . 

"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक", पीताम्बर दत्त शर्मा ! वो ब…

"जब तक मैंने समझा,जीवन क्या है?जीवन बीत गया" !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-समीक्षक)

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जन्म लेने से पहले मैं कौन था ,क्यूँ था,किसलिए था,कहाँ था और कैसे आया अपनी इसी माता के गर्भ में मैं???ये जानने हेतु अपनी पहली गुरु माता से लेकर आज तलक ना जाने कितने गुरुओं से ,कितनी प्रकार की शिक्षा प्राप्त चाहे-अनचाहे करी !लेकिन जब तक मैं कुछ समझ पाता , ये जीवन ही समाप्त होता नज़र आ रहा है !खुशियों के हर फूल से मैंने गम का हार पिरोया !जिसे मैं ख़ुशी समझता रहा वो तो पल भर की ख़ुशी थी ,मन की पूरी शान्ति नहीं मिल पायी !जिन्हें मैं अपना मानता रहा , उन्होंने तो मुझे पराया बना दिया !मैं जीवन भर अपनेपन पाने को तरसता ही रहा !रिश्ते-नाते दोस्ती सब एक सपने की तरह टूटते ही गए !रोज़ नए सपने गढ़े जाते ,रोज़ टूट भी जाते !समय की आंधी सब उड़ाकर ले गयी !!उन सभी की यादों में आज भी मेरी आँखें भरी हुई हैं ,जिन्हें मैं अक्सर पिता रहता हूँ लेकिन छलकने नहीं देता !सबको मैं हंसता हुआ नज़र आता हूँ !
                    इसीलिए मैंने लिखा है कि "जब तक मैंने समझा,जीवन क्या है?जीवन बीत गया" !इसीलिए शायद शास्त्रों में लिखा है कि "कम खाओ,कम मोह करो,कम लालच करो और ज्यादा प्रभु संग रहने का प्रयास करो !लेकिन हमें…

"जेनयू के जहर बुझे तीर ,करते हैं घाव गंभीर "!!

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जेएनयू की बीमारी, 'देशद्रोह' के प्रोफेसर - साभार -श्री लोकेन्द्र सिंह जी !  जवाहरलाल  नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) अपने विद्यार्थियों और शिक्षकों के रचनात्मक कार्यों से कम बल्कि उनकी देश विरोधी गतिविधियों से अधिक चर्चा में रहता है। पिछले वर्ष जेएनयू परिसर देश विरोधी नारेबाजी के कारण बदनाम हुआ था, तब जेएनयू की शिक्षा व्यवस्था पर अनेक सवाल उठे थे। यह सवाल भी बार-बार पूछा गया था कि जेएनयू के विद्यार्थियों समाज और देश विरोधी शिक्षा कहाँ से प्राप्त कर रहे हैं? शिक्षा और बौद्धिक जगत से यह भी कहा गया था कि जेएनयू के शिक्षक हार रहे हैं। वह विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने में असफल हो रहे हैं। लेकिन, पिछले एक साल में यह स्पष्ट हो गया है कि जेएनयू के शिक्षक हारे नहीं है और न ही विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में असफल रहे हैं, बल्कि वह अब तक जीतते रहे हैं और अपनी शिक्षा को विद्यार्थियों में हस्थातंरित करने में सफल रहे हैं। 
         यकीनन इन्हें शिक्षक कहना समूचे शिक्षक जगत का अपमान है। इनके लिए अध्यापन पवित्र कर्तव्य नहीं है, बल्कि मात्र आजीविका का साधन और अपने वैचारिक प्रदूषण से देश के यु…

"क्या भारत में ऐसा कुछ बचा है ,जिसकी इज्जत करते हों लोकतंत्र के ताकतवर लोग"? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न.+9414657511

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भारत में जब मुस्लिम शासकों का राज था तब तो उनकी कही गयी बात ही क़ानून होती थी !अंग्रेजों ने आम जनता पर अपना "शासन"चलाने के लिए क़ानून बनाये , लेकिन उसमें कुछ ऐसे दरवाजे भी जानबूझ कर छोड़े ,जिनसे कोई ताक़तवर आदमी के फंसने पर उसे बाहर निकाला जा सके ! दुसरे शब्दों में उसे "लुपोल"भी कहते हैं !देश के आजाद होने पर जब तथाकथित रूप से भारतीय संविधान बना,जो किसी के नज़र में सही और कइयों की नज़र में आज भी गलत या केवल नक़ल मात्र है !उसमें भी कई तरह के ऐसे "चोर दरवाजे"रख्खे गए जिनसे आजके लोकतांत्रिक रूप से ताक़तवर बने नेता ,रहीस और उनके चमचे पत्रकार आदि बचकर बाहर आ सकें !
             समय जैसे जैसे बीतता गया वैसे वैसे लोकतंत्र से सम्बंधित अन्य संस्थानों के ना केवल नियमों को भी तोडा जाने लगा बल्कि उनके महत्त्व को भी कम किया जाने लगा!और आज हालात ये हो गए हैं कि ना तो किसी भी संवैधानिक कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की ना तो कोई इज्जत बची है और ना ही कोई मर्यादा का पालन करता दिखाई पड़ रहा है !ऊपर से हैरान करने वाली बात ये है कि "प्रथाएं"तोड़ने वाली ताक़तें ही पाठ पढ़ाती नज़र आ रही ह…

"बच्चों को स्वछन्द खेलने दो यारो"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न.+9414657511

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चलो ! आज बच्चों की बात करते हैं ! मेरे एक पाठक ने मेरे स्वतंत्र टिप्पणीकार होने पर शंका जाहिर कर दी थी ,तो मैंने उन्हें उचित उत्तर दे दिया और वो संतुष्ट भी हो गए !लेकिन मेरे मन में ये ख्याल आया कि जब भी हम बड़ों की बात करेंगे तो कभी कभी ना चाहने पर भी ,किसी की तरफ झुकाव हो ही जाता है !मैं अपनी आंशिक गलती मानते हुए आज बच्चों के बारे में ही कुछ लिखना चाहता हूँ !आशा है कि आप सब इसे भी सराहेंगे !पहले तो एक परिवार में ही बच्चों के अंदर हर बात को लेकर एक प्रतियोगिता सी हो जाती थी !बच्चे अक्सर आपस में लड़ते-झगड़ते हुए हिंसक भी हो जाया करते थे !उनके माता-पिता तथा अन्य रिश्तेदारों के दिलो-दिमाग में भी हर बच्चे का अलग-अलग स्थान हुआ करता था !बड़ों के इस "पूर्वाग्रह"को बदलना बच्चों के लिए एक बड़ा काम हुआ करता था !ऐसा ही कुछ फिर विद्यालयों में ,समाज मे और अन्य समूहों में भी होता था !
                            लेकिन जहां पहले एक परिवार में 12से 15तक बच्चे हुआ करते थे ,फिर 4-5 होने लगे,फिर सरकार ने एक नारा दिया ,"दो या तीन बच्चे,होते हैं घर में अच्छे"!!जैसे जैसे महंगाई बढ़ी तो सारा नज…

योजनाओं का लाभ उठाया कैसे जाए ?इसपर भी जोर दो !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न.- ९४१४६५७५११

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अज्ञानता के लिए भारत काफी समय से जाना जाता है !आज भी लाखों की संख्या में अज्ञानी हैं !अलग-अलग विषय पर अज्ञानियों की संख्या में कमी या ज्यादती हो सकती है !जबसे हमारे देश में लोकतंत्र नाम की बिमारी आई है !तभी से हमारे नेता लोग हमारे "भले"के लिए विभिन्न प्रकार की योजनायें बनाते आ रहे हैं !लेकिन देखने में आया है किइन योजनाओं से "चोरों का भला"ज्यादा हुआ है जनता का कम !ये मैं नहीं बल्कि हमारे पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधी ने बताया था !वो बड़े दिल के और सच्चे आदमी थे इसलिए बोल गए लेकिन अन्य नेता तो इतनी बात बोल ही नहीं पाते जी !मैं ये भी मानता हूँ की योजना बनाते वक्त किसी के मन में इतना पाप तो नहीं होगा कि कोई ये सोचे किसारा फायदा हमारी पार्टी के नेताओं को ही पहुंचे !लेकिन आंकड़े बताते हैं की असली फायदा उनको ही पहुँचता आया है !सभी प्रकार के कायदे क़ानून होने के बाद भी !
                     आज जब भारत में सच और झूठ की जंग चल रही है !भ्रष्ट और अच्छे लोग आपस में हर जगह उलझते हुए ही नजर आ रहे हैं !क्या टीवी , क्या समाचार पात्र और अन्य सार्वजनिक स्थान !सब जगह ये ही सुनने को मिल…

"पहले आप - पहले आप "सुधरो ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)मो.न. 9414657511

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"लखनऊ के दो नवाबों की गाडी जैसे पहले आप - पहले आप करते निकल गयी थी"!वैसे ही हम भारत वासियों का हाल है ! सभी किसी ना किसी दुसरे की ओर इशारा करके कहता नज़र आता है कि पहले वो सुधरे तो फिर मैं सुधरुंगा या मुझे सुधरने हेतु कहा जाए जी !नेता लोग सरकारी तन्त्र को लेकर रोता है ,तो सरकारी तन्त्र जनता की बढ़ती अपेक्षाओं को लेकर बहाने बनाता नज़र आता है !जनता एक दुसरे को ही दोषी बताने में लग जाती है !तो फिर बड़ा प्रश्न ये पैदा होता है कि देश में सुधार हो तो कैसे हो ??
                           आज हालात इस प्रकार के हो गए हैं देश में कि जैसे इंसान को एक चींटी काट खाये तो वो उसे हटा सकता है , अगर दो-चार चींटियां एक साथ काट लें तो भी वो उसे सघन प्रयासों से हटाकर राहत महसूस कर सकता है , लेकिन अगर हज़ारों चींटियां एक साथ आकर इंसान के शरीर पर काटने लगें तो मित्रो चाहे कितना भी ताकतवर इंसान चाहे क्यों ना हो , वो बच नहीं सकता जब तलक कोई बाहरी ताक़त उसकी मदद ना करे !या कोई "जहरी छिड़काव"ना किया जाए !
                        आज देश चिंतित है कि देश के विभिन्न हिस्सों में जिस प्रकार देश-द्रोही&qu…

"इंसानियत,शैतानियत,हैवानियत,बुराई और अच्छाई"!!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न. 9414657511

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जब से इस सृष्टि का निर्माण हुआ है तभी से "अच्छाई और बुराई में ये लड़ाई"चलती आ रही है कि कौन ज्यादा अच्छा है ? बुराइयां या अच्छाइयां ?भगवान् ने इंसान के शरीर में 9 इन्द्रियां लगादीं,सोचने हेतु बुद्धि दे दी,9 रस दे दिए,काम,क्रोध,लोभ मोह और लालच भी डाल दिए हमारे अंदर और इसके साथ ये भी कह दिया कि "मेरी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलेगा"!!तब से मित्रो !बस "तू डाल-डाल तो मैं पात-पात"वाली बात हो रही है !सनातन धर्म ही सबसे पुराना धर्म है इसलिए उसी के ग्रंथों की बात करते हैं !उनको पढ़ने पर पता चलता है कि सतयुग में ही भगवान् विष्णु के नाक में दम कर दिया था इन बुराई के समर्थक राक्षसों ने !तो भगवान् को स्वयम अवतार लेकर आना पड़ा ,इस धरती पर कहते हैं 24 बार !ना जाने कितने धर्म गुरु हो चुके और ना जाने कितने ग्रन्थ लिखे जा चुके , लेकिन साहिब ये बुराई है कि रोज़ नया रूप धारण करके हमारे सामने आ धमकती है !और हम "सहम"कर रह जाते हैं !
"इंसानियत,शैतानियत,हैवानियत और बुराई"क्या प्रलय आने पर ही जायेगी?भगवान् ही जानता है जी !ग्रंथों के मुताबिक तीन युग बीत चुके हैं…

"वो करते हैं नेतागिरी,सहूलियतों से भरी"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार) मो.न.- 9414657511

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पाठक मित्रो !आज मैं आपको चोरों-हरामखोरों और भ्रष्टों की "मन की बात" बताऊंगा - पढ़वाऊंगा !हमको बहुत दिन हो गए हमारे प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी की मन की बात सुनते सुनते !हमें ये सिखाया गया है कि "कोई भी निर्णय लेने से पहले सिक्के के दोनों पहलुओं पर पहले अच्छी तरह से विचार करो"!फिर अपना किसी बात पर निर्णय दो !यकीन मानिये मैं कोई भी बात लिखने से पहले सारे पक्षों के बारे में गंभीर विचार करता रहता हूँ !इसीलिए मेरी पत्नी मुझे कई बार याद दिलाती है कि वो कब की मेरे आगे भोजन परोस गयी है लेकिन मैं ना जाने किन विचारों में मस्त हूँ की भोजन की तरफ ध्यान ही नहीं दिया !इतना मैं आप लोगों के हित खातिर विचार करता हूँ !
                     हुआ यूं कि कल मैं बाज़ार रोज़ाना काम आने वाला सामन खरीदने हेतु बाज़ार गया तो मुझे पहले तो एक फल बेचने वाले ने उलाहना देते हुए कहा कि "भजपा वाले लेखक जी आपका मोदी तो गयो"!!मैं तो अपने विचारों में मस्त सा चला जा रहा था !ये लाइन सुनकर मैं चौन्का ,सहमा और उसकी तरफ मुखातिब हुआ और पूछा ,क्या बात हुई जनाब ?तो वो बोला भाई साहिब आपके मोदी से तो हमार…

"कुछ नहीं है भाता ,जब रोग ये लग जाता "...!! - पीताम्बर दत्त शर्मा - स्वतन्त्र टिप्पणीकार (मो.न.+ 9414657511)

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मित्रो !!प्यार भरा नमस्कार ! प्यार से याद आया !मेरी नानी कहा करती थी कि बेटा !जो आदत इंसान को एक बार पड़ जाती है ना ,वो फिर ज़िन्दगी भर जाती नहीं इन्सान फिर चाहे जितने भी जतन करले !आज समाचार पत्र में फिर एक चौन्काने वाला समाचार पढ़ा !एक 80 साल की बुज़ुर्ग महिला से एक 28 साल के नोजवान ने "लव-मैरिज "कर ली !मन बड़ा हैरान-परेशान हो गया ये समाचार पढ़ कर ! मन की भड़ास निकालने हेतु कभी उसको सुनाएँ कभी किसी और को सुनाते घुमते रहे कई घंटों तलक ,मन फिर भी शांत नहीं हुआ तो अपनी धर्म-पत्नी जी को भी ये समाचार सुना  ही दिया !पत्नी बोली -"जोश-जोश में प्यार में मरना तो आसान है लेकिन साथ निभाना बड़ा ही मुश्किल होता है जी "!
                    निभाने पर याद आया कि आजकल राजनीति में भी कई नए गठबंधन हो भी रहे हैं और टूटते भी नज़र आ रहे हैं !शिव सेना साथ छोड़ रही है तो राहुल-अखिलेश मिल रहे हैं !वैसे कोंग्रेस का इतिहास भी ऐसा ही है कि आज गठबंधन करो कुछ समय बाद छोड़ दो !ज्यादा विश्वासपात्र नहीं है !"तीसरा मोर्चा "और उसके बाद 6 प्रधानमंत्रियों को देश की जनता भूली नहीं होगी !जिन्होंने थोड़ी-थ…