Thursday, March 9, 2017

लखनऊ की तथाकथित आतंकी मुठभेड़ सच है या तमाम फर्जी घटनाओं की तरह एक ड्रामा...???सच्च क्या है ?

सात मार्च को दिन का आखरी पहर मीडिया के जांबाजों का चिल्ला-चिल्ला कर बताना कि संदिग्ध आतंकवादियों के साथ लखनऊ के ठाकुरगंज (हाजी कालोनी) में पुलिस का मुठभेड़ जारी है, आतंकी को चारों तरफ से घेर लिया गया है।
हाजी कालोनी लखनऊ शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका है। और यहाँ पिछले कई घण्टों से isis के आतंकियों को पुलिस ने घेर रखा है, दोनों तरफ से गोली बारी चालू है। पूरे शहर में दहशत का माहौल है हर कोई खौफ में है (तब तक ऐसा कुछ नहीं था, जब कि मीडिया खौफ जदा करने की पूरी कोशिश में लगा हुआ था। जब कि मीडिया को चाहिये था कि हकीक़त से रुबरू करा कर अवाम के दिलो से खौफ निकाला जाये)।
सूरज की रोशनी मद्धम होकर लोगों को दिन के खत्म होने का एहसास करा रही थी। तो दूसरी जानिब हमारा मीडिया हकीकत की तह में जाने के बजाय अफवाहों के जरिये लोगों को खौफ के साथ रात गुजारने के लिए बेबस कर रहा था।
लखनऊ शहर के लोगों के साथ पूरा मुल्क नींद के आगोश में जाने के बजाय हकीकत से वाकफियत के लिए टीवी स्क्रीन पर निगाहें जमाये बैठा था।
टीवी रिपोर्टर बड़े जोशो खरोश के साथ बगैर किसी डर के तथाकथित isis आतंकवादी के छिपे हुए घर के गेट पर से ही खबरें देकर लोगों की और जानने की तिश्नगी को भड़का रहा था।
मीडिया बता रहा था कि देखो आतंकी से निपटने के लिए अब आंसू गैस छोड़े जा रहे हैं, अब कटर मंगा कर छत को काटने की तैयारी चल रही है, अब आतंकी को कैमरे से देखा गया, अब गोली मारकर जख्मी किया गया, अब एम्बुलेंस बुलाया गया। ... और इसी तरह की बयानबाजी करते करते वह सच भी बोलने लगे जो दिन के उजाले में ही बोल देना चाहिए था।
आठ मार्च की सुबह हर अखबार के पहले पेज से लेकर दूसरे पेज तक कल के मुठभेड़ की कहानियों से भरा पड़ा है। हर किसी के जुबान पर मीडिया द्वारा सुनाई गई कहानी है।
रिहाई मंच की टीम एडवोकेट शुएब की कयादत में घटना स्थल पर जाकर 
असलियत जानने की कोशिश करती है।
घटना स्थल पुलिस और मीडिया के लोगों से भरा है। मारा गया सैफुल्लाह जिस मकान में रहता था, वह अंदर से बंद है पता करने पर मालूम हुआ कि अंदर पुलिस छानबीन कर रही है। जब कि झाँक कर देखने पर मिला कि कुछ लोग आराम से कुर्सी पर बैठे केले खा रहे हैं।
एक पुलिसकर्मी से जब रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट शुएब ने कहा कि हम रिहाई मंच से हैं, हकीकत जानने के लिए आये हैं। क्या हम अंदर जाकर देख सकते हैं कि नौ घण्टे तक गोलियां जो चली हैं, उनके कोई निशान वगैरा अंदर मौजूद हैं? क्योंकि बाहर तो कोई ऐसे निशान दरोदीवार या दरवाजे पर नहीं दिख रहे हैं, जिस से मालूम पडे कि यह वही जगह है जंहां गूजिस्ता रात इतनी भारी मात्रा में गोली बारी हुई है।
मौके पर कुर्सी लगाये बैठे (कल की थकान की वजह से) पुलिस वाले ने कहा कि इस के लिये आई जी साहब से बात करनी पड़ेगी आप को।
रिहाई मंच के अध्यक्ष सच्चाई की किसी और कडी की तलाश करते कि इस से पहले मीडिया के कई चैनल के लोगों ने घेर लिया।
मीडिया :- आप इसे किस तरह से देखते हैं?
एडवोकेट शुएब :-पिछले कई घटनाओं के देखने के बाद आंख बंद कर यकीन नहीं कर सकता, इसी तरह से अक्षरधाम मंदिर की घटना का भी लाईव टेलीकास्ट करके इनकाउन्टर किया गया था जो फर्जी था।
मीडिया :- लेकिन यंहा से भारी मात्रा में हथियार और गोली बारूद बरामद हुआ है?
एडवोकेट शुएब :-कचहरी सीरियल ब्लास्ट के मामले में पकड़े गए लोगों से भी भारी मात्रा में गोली बारूद की बरामदगी दिखाई गई थी, जो सब निर्दोष थे और अब वह कोर्ट से बाइज्जत बरी हो चुके हैं।
मीडिया :- तो आप इसे फर्जी मान रहे हैं?
एडवोकेट शुएब :- अभी हम असलियत जानने की कोशिश कर रहे हैं जब तक हम तहकीकात नहीं कर लेते तब तक हम इसे असली भी नहीं मान सकते।
रिहाई मंच की टीम हकीकत जानने के लिए आसपास और चश्मदीदों से मुलाकात करती है जिस में उसके सामने कई ऐसी बातें आती हैं, जिससे इस घटना के सत्यता पर सवालिया निशान लगाती हैं जैसे,
1) स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम को आँसू गोले दागने के अलावा कोई फायरिंग नही हुई।
2) घर की छत पर दो दो जालियों के बावजूद छत को कटर से क्यों काटा गया? जाली क्यों नहीं उखाड कर घुसा गया?
3) इतनी देर तक दोनों तरफ से गोली बारी हुई, लेकिन उसके निशान कंहीं नहीं दिखे।
4) क्या सैफुल्लाह को पहले ही से मालूम था कि पुलिस हमें पकड़ने आ रही है जो इतनी मजबूती से अंदर अपने को बंद कर लिया?
और अगर मालूम था तो भागा क्योँ नही?
5) पुलिस को कैसे मालूम पड़ा कि जिसको हम पकड़ने आये हैं वह अंदर ही मौजूद है?
6) मारे गये सैफुल्लाह को कैसे पता चला कि पुलिस ने हमें चारों तरफ से घेर लिया है? जब कि स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस ने कोई एनाउंसमेंट नही किया?
इस तरह के तमाम तरह के तथ्य रिहाई मंच के तफतीश के दौरान सामने आये हैं, जो इस घटना को शक के घेरे में खड़ा करती है। लेकिन अभी रिहाई मंच अपने स्तर पर जांच जारी रखे हुए है, उसके घर पर भी राबता करने की कोशिश कर रही है।
देखते हैं सच है या तमाम फर्जी घटनाओं की तरह एक ड्रामा।द्वारा -: शबरोज़ मोहम्मदी एडवोकेट !



                                       शबरोज़ मोहम्मदी (साभार - हस्तक्षेप)
"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511. इंटरनेट कोड में ये है लिंक :- https://t.co/iCtIR8iZMX. "5th pillar corruption killer" नामक ब्लॉग अगर आप रोज़ पढ़ेंगे,उसपर कॉमेंट करेंगे और अपने मित्रों को शेयर करेंगे !तो आनंद आएगा !

No comments:

Post a Comment

2014 की कॉरपोरेट फंडिग ने बदल दी है देश की सियासत !!

चुनाव की चकाचौंध भरी रंगत 2014 के लोकसभा चुनाव की है। और क्या चुनाव के इस हंगामे के पीछे कारपोरेट का ही पैसा रहा। क्योंकि पहली बार एडीआर न...