Wednesday, February 15, 2017

"जब तक मैंने समझा,जीवन क्या है?जीवन बीत गया" !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-समीक्षक)

जन्म लेने से पहले मैं कौन था ,क्यूँ था,किसलिए था,कहाँ था और कैसे आया अपनी इसी माता के गर्भ में मैं???ये जानने हेतु अपनी पहली गुरु माता से लेकर आज तलक ना जाने कितने गुरुओं से ,कितनी प्रकार की शिक्षा प्राप्त चाहे-अनचाहे करी !लेकिन जब तक मैं कुछ समझ पाता , ये जीवन ही समाप्त होता नज़र आ रहा है !खुशियों के हर फूल से मैंने गम का हार पिरोया !जिसे मैं ख़ुशी समझता रहा वो तो पल भर की ख़ुशी थी ,मन की पूरी शान्ति नहीं मिल पायी !जिन्हें मैं अपना मानता रहा , उन्होंने तो मुझे पराया बना दिया !मैं जीवन भर अपनेपन पाने को तरसता ही रहा !रिश्ते-नाते दोस्ती सब एक सपने की तरह टूटते ही गए !रोज़ नए सपने गढ़े जाते ,रोज़ टूट भी जाते !समय की आंधी सब उड़ाकर ले गयी !!उन सभी की यादों में आज भी मेरी आँखें भरी हुई हैं ,जिन्हें मैं अक्सर पिता रहता हूँ लेकिन छलकने नहीं देता !सबको मैं हंसता हुआ नज़र आता हूँ !
                    इसीलिए मैंने लिखा है कि "जब तक मैंने समझा,जीवन क्या है?जीवन बीत गया" !इसीलिए शायद शास्त्रों में लिखा है कि "कम खाओ,कम मोह करो,कम लालच करो और ज्यादा प्रभु संग रहने का प्रयास करो !लेकिन हमें तो आधुनिक साधनों में ही सच्ची शान्ति मिलती नज़र आती है , क्योंकि हमारे देश के सन्त भी इन्हीं सुविधाओं में रहते हैं जी !जय श्री राम !प्रसन्न रहो !मस्त रहो !अपना मन "फकीरी"में लगाओ यारो !




"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक", पीताम्बर दत्त शर्मा ! वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-02-2017) को
    "उजड़े चमन को सजा लीजिए" (चर्चा अंक-2595)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
  2. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है ......... http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/02/7.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. वाह!!क्या खूब कहा आपने ,अक्सर यही सब होता है जीवन में।जब तक जीवन का सही अर्थ सच्चा सुख समझ आता है तब तक जीवन का अन्त आ जाता है।

    ReplyDelete
  4. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete