"चढ्ढी पहन के फूल खिला है " !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न.+9414657511

प्रिय मित्रो ! "बसन्त-बहार "का महीना शुरू होने को है !बाग़,उपवन,बगीचे,क्यारियां और फ्लैटों की गैलरियां रंगबिरंगे सुंदर-सुंदर फूलों से सजने लगी हैं !प्रकृति ने सुंदर छटा बिखेरनी शुरू कर दी है !पहाड़ों पर बर्फ पड़ने लगी है !सब तरफ सफेद-सफेद चादर सी बिछी हुई लगती है !वहाँ थोड़ा रुक कर बहार आएगी !लेकिन हिमालय के साथ लगते इलाकों में वातावरण "रमणीय"होने लगा है !गीत गाने को मन करने लगा है !"भ्रमर "कलियों के इर्द-गिर्द "डोलने"लगे हैं !जिन्हें देख कर मन "बावरा"हुआ जा रहा है !दूर-दूर तलक घुमते रहने को मन करता है !घण्टों चलते-चलते किसी के साथ बतियाने को मन करता है ! लेकिन हाय री  !! ये उम्र !!और ये मोटा थुलथुला शरीर !जो आजकल की आधुनिक बिमारियों से भर चुका है !इस की वजह से  कुछ भी कर नहीं पा रहे हैं !बस ! देख-सुन और लिखकर ही अपनी इस "पवित्र-आत्मा"को शांत कर लेते हैं !इसीलिए हमने आज के इस लेख का शीर्षक भी बच्चों वाला ही रख्खा है !क्योंकि कहते हैं ना कि बुढ़ापा और बचपन एक सा ही होता है !
                     लेकिन देश के नेता कभी बूढ़े होते ही नहीं !अगर आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं है तो पूछ लीजिये माननीय एनडी तिवाड़ी जी से ,आडवाणी जी से और मुरली मनोहर जोशी जी से !!आपको विश्वास हो जाएगा !ऊपर से देश के पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं !अपने अमित शाह जी इनको आजकल "मस्का "भी शायद इसीलिए लगा रहे हैं !कहते हैं -:"माननीय अटल,आडवाणी और जोशी जी की तैयार की गयी भूमि पर हम अवश्य चुनाव जीतेंगे "!सभी राजनितिक दल "लुभावने"घोषणा पत्र सुनकर वोट लेनेकी कोशिश करते नज़र आ रहे हैं !कई दलबदल करते समय "फूलों को चढ्ढी"पहनाकर (बुके)एक दुसरे को गुलदस्ते भी देते नज़र आ रहे हैं !बेशर्मी की हद्द है !नेताओं ने सारे सामजिक नियम तो काफी पहले से ही तोड़ रख्खे थे ,लेकिन आजकल तो कोई सर्वोच्च-न्यायालय की भी नहीं सुनता दिखाई पड़ता ! टीवी चेनेल वाले शरेआम जातिवाद,धर्मवाद और इलाके आदि पर बहस कराने के नाम पर जोरशोर से राजनितिक दलों का प्रचार करते हमें तो नज़र आते हैं लेकिन चुनाव आयोग को नहीं क्यों?सब एक दुसरे को "फूल"बनाते घूमते हैं ! इसीलिए शायद फूल भी शर्म के मारे चढ्ढी पहन कर ही खिल रहा है !
              आखिर क्या कर रहे हैं हम ?छोडो सारे भ्रम !! जिनके कारण आप और हम अकड़ते हुए घुमते हैं !बन जाओ कोमल और खुशबूदार "फूल"!!फिर चाहे "चढ्ढी"(खादी का चोला)ना भी पहनोगे तो भी लोग एक दुसरे से प्यार करेंगे !हमारा भारत भी महकने लगेगा ! "अच्छे दिन आएंगे"!!तो सब मिलकर गाओ !!-:"जंगल जंगल पता चला है , बात चली है .......!!! चढ्ढी पहन के फूल खिला है फूल खिला है "......!! 
                           





5th पिल्लर करप्शन किल्लर" "लेखक-विश्लेषक पीताम्बर दत्त शर्मा " वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511

Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-01-2017) को "लोग लावारिस हो रहे हैं" (चर्चा अंक-2586) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. पीताम्बर दत्त शर्मा जी आपकी पोस्ट समाज और सरकार से सरोकार रखती है और आपने अपने स्वाभाव के विपरीत पोस्ट की शुरुआत रंगीन मिज़ाज से की परंतु आधे पोस्ट के बाद फिर से आप अपने रंग में आ गए . सुंदर प्रस्तुति .

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