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Showing posts from July, 2016

आरएसएस और गांधी हत्या !!

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राजनेताओं  को यह समझना होगा कि अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए किसी व्यक्ति या संस्था पर झूठे आरोप लगाना उचित परंपरा नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी शायद यह भूल गए थे कि अब वह दौर नहीं रहा, जब नेता प्रोपोगंडा करके किसी को बदनाम कर देते थे। आज पारदर्शी जमाना है। आप किसी पर आरोप लगाएंगे तो उधर से सबूत मांगा जाएगा। बिना सबूत के किसी पर आरोप लगाना भारी पड़ सकता है। भले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इस मामले पर माफी माँगने से इनकार करके मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार दिखाई देते हैं लेकिन, कहीं न कहीं उन्हें यह अहसास हो रहा होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का अनर्गल आरोप लगाकर उन्होंने गलती की है। इसका सबूत यह भी है कि वह अदालत गए ही इसलिए थे ताकि यह प्रकरण खारिज हो जाए। गौरतलब है किगांधी हत्या का आरोप संघ पर लगाने के मामले में कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके सीताराम केसरी को भी माफी का रास्ता चुनना पड़ा था। प्रसिद्ध स्तम्भकार एजी नूरानी को भी द स्टैटसमैन अखबार के लेख के लिए माफी मांगनी पड़ी थी।बहरहाल, वर्ष 2014 में ठाणे जिले के सोनाले में …

"समझ"!! मेरी "सरकार" की ? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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आजाद होने के बाद भारत के नेताओं से चाहे कितनी भी गलतियां क्यों ना हुई हों ,लेकिन सभी भारतवासी उनको ना केवल अपना सच्चा नेता मानते थे, बल्कि उनके कहेनुसार चलते भी थे !वो दिन आज भी याद आता है तो मन अभिभूत हो जाता है ,जब नेहरू जी की एक अपील पर भारत की जनता ने अपने घर से सारे गहने तक निकाल कर उनके सामने देश हित हेतु समर्पित कर दिए थे !
                     इसी तरह माननीय लाल बहादुर शास्त्री जी के आह्वान पर सभी देश वासियों ने "व्रत"रखना शुरू कर दिया था,क्योंकि देश में अनाज भारी कमी थी !ऐसा इसलिए होता था क्योंकि तब के नेता सभी देशवासियों की चिंता एक समान करते थे !फिर जैसे-जैसे नेताओं के मन काले होते गए और पत्रकार "भाई"लोग "ख़बरें गढ़ने और रोकने"लगे,स्वार्थ और लालच सर चढ़ कर बोलने लगा ,तो अच्छे नेताओं की "माला"बिखरने लगी ,तो तब बनी "कोंग्रेस आई",जो आज पता नहीं कोंग्रेस "S " है या कोंग्रेस r है या फिर कोंग्रेस प्रियंका ?
             बात सरकार की समझ की करनी है तो सबसे पहले हम ये जानलें कि भारत में एक समय में लगभग 30 तरह की सोच रखने वाल…

"माई नेम इज़ शीला......!!शीला की......"!!- पीतांबर दत्त शर्मा लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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लो जी पाठक मित्रो !कांग्रेस को आनेवाले उत्तर-प्रदेश के विधान-सभा चुनावों हेतु श्रीमती शीला दीक्षित इस लिए पसंद आईं हैं क्योंकि उनमे प्रदेश के सभी नेताओं से ज्यादा प्रशासनिक समझ है !वो up और दिल्ली में सबसे प्रभावशाली नेत्री हैं !राहुल और प्रियंका सहित कोई भी नेता उनके जितना राजनीती  पारंगत नहीं है !पाठक मित्रो !कांग्रेस को आज फिर से "ब्राह्मण"याद आये हैं क्यों भला??क्या उत्तर-प्रदेश के ब्राह्मण अपना फायदा उठा पाएंगे !मुझे तो लगता है कि कांग्रेस उत्तर-प्रदेश की जनता को शीला जी का ब्राह्मण चेहरा दिखाकर बहलाएंगे और अन्य लोगों को टिकटें बांटेंगे !मैं आज ही ब्राह्मणों को सचेत करना चाहता हूँ !क्योंकि सभी राजनितिक दलों को तो बीएस वो ही प्यारा केंडिडेट लगता है जो कमाई करके "हाई-कमांड"के सामने अर्पित कर दे , और फिर हाई-कमांड उस में से एक छोटा सा हिस्सा उसे भी दे दे !कांग्रेस ने इस देश पर सबसे ज्यादा  है तो उसने ही भारतवासियों को भरष्ट बनाया है !तो क्या शीला जी वहाँ सोनिया जी के सपनों को पूरा कर पाएंगी ?क्या जनता उनके इतिहास को भूल जायेगी !
                             लेकिन …

जन्नत कैसे लाल हो गई ?

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लाल चौक पर जब 1975 में शेख अब्दुल्ला ने जीत की रैली की तो लगा ऐसा कि समूची घाटी ही लाल चौक पर उमड पड़ी है। और 1989 में जब रुबिया सईद के अपहरण के बाद आतंकवाद ने लाल चौक पर खुली दस्तक दी तो लगा घाटी के हर वाशिंदे के हाथ में बंदूक है। और अब यानी 2016 में उसी लाल चौक पर आतंक के नाम पर खौफ पैदा करने वाला ऐसा सन्नाटा है कि किसी को 1989 की वापसी दिखायी दे रही है तो किसी को शेख सरीखे राजनेता का इंतजार है। वैसे घाटी का असल सच यही है कि कि लाल चौक की हर हरकत के पीछे दिल्ली की बिसात रही । और इसकी शुरुआत आजादी के तुरंत बाद ही शुरु हो गई । नेहरु का इशारा हुआ और 17 मार्च 1948 को कश्मीर के पीएम बने शेख अब्दुल्ला को अगस्त 1953 में ना सिर्फ सत्ता से बेदखल कर दिया गया बल्कि बिना आरोप जेल में डाल दिया  गया। और आजाद भारत में पहली बार कश्मीर घाटी में यह सवाल बड़ा होने लगा कि कश्मीर कठपुतली है और तार दिल्ली ही थामे हुये है। क्योंकि बीस बरस  बाद कश्मीर का नायाब प्रयोग इंदिरा गांधी ने शेख अब्दुल्ला के साथ 1974 में समझौता किया तो झटके में जो शेख अब्दुल्ला 1953 में दिल्ली के लिये खलनायक थे, वह शेख अब्दुल्ला 19…

"हृदय - परिवर्तन""दुर्योधन और ओवेसी"का,क्यों-कैसे और किसके लिए ? - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511

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 मित्रो ! सोनी टीवी चैनल पर आजकल  सीरियल चल रहा है , जिसका नाम है "सूर्यपुत्र कर्ण"!जिसमे कर्ण की मृत्यु का प्रसंग चल रहा है !उसमे दुर्योधन कर्ण की मृत्यू पर द्रवित होकर "श्मशान वैराग्य"से ग्रसित होकर सभी पांडवों,वैद्यों और द्रोपदी से गुहार लगाता है कि आप सब मेरा चाहे जो हश्र कर दो ! चाहे मेरा सारा राज्य ले लो ! मुझे माफ़ कर दो !लेकिन मेरे मित्र और तुम्हारे बड़े भाई को मृत्यु के मुंह से बचालो !उसकी इस वेदना को सच्चा समझकर पांडव समझौता करने को राज़ी भी हो जाते हैं !लेकिन भगवान कृष्ण पांडवों को याद दिलाते हैं कि इसका ये पारिवारिक प्रेम उस दिन कहाँ था जब अभिमन्यु को ये सब मिलकर मार रहे थे !इसलिए इस पर विश्वास ना करो और "धर्म-युद्ध" को जारी रख्खो पांडवो !
                     ठीक उसी तरह "असदुद्दीन ओवेसी" साहिब को आज आतंकवाद बुरा दिखाई पड़ रहा है !isis "कुत्ता"नज़र आ रहा है !बेसहारा लड़कियां और अशिक्षा नज़र आ रही है !मरने के बजाये मुस्लिम नोजवानो को "जीने की राह"बताई जा रही है !किसी "पँहुचे"हुए "फ़क़ीर"की तरह अ…

"ना धर्म बुरा , न कर्म बुरा ,ना गंगा बुरी ना जल बुरा "... !!! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)-+9414657511

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 मदीना की पाक मस्जिद के बाहर विस्फोट होने के बावजूद मुस्लिम धर्म से संबंधित लोग ये तय नहीं कर पा रहे कि निंदा करें तो किसकी करें ?तथाकथित धर्म-निरपेक्ष लोगों के कर्जदार पत्रकार लोग तो बेशर्म होकर आज भी सिर्फ भटके हुए नौजवान ही कहे जा रहे हैं !आतंकवाद हमारे गिरेबान तक पहुँच चुका है !रोज़ाना हत्याएं हो रही हैं !फिर भी सभी तरह की सरकारें उग्र्रवादियों  सीधा मुकाबला करने से घबरा रही हैं !क्या वास्तव में हम में हौसले की कमी है ?या युद्ध में काम आने वाले संसाधनों और पैसे की कमी है ?किस चीज़ का डर हमें सता रहा है ?
                       मोदी जी ने अपना मंत्रीमंडल बड़ा कर लिया !कोई ख़ास बात नहीं ये हक़ है उनका !लेकिन  पांच मंत्री हटा दिए गए ! ये नहीं बताया कि क्यों हटाए ? 15 अगस्त आने वाला है ! मोदी जी भारत की जनता को कैसे बता पाएंगे कि देश में राशन और सब्ज़ियों के दाम कम क्यों नहीं करवा पाये ?बेरोजगारी क्यों कम नहीं करवा पाए ?काला धन विदेशों से आम भारतीय के कहते में ना तो जमा होना था और ना ही होगा , क्योंकि वो तो केवल जनता को आम भाषा में समझने  कहा गया था !लेकिन ये सवाल तो पूछा ही जाएगा कि अ…