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Showing posts from May, 2015

"अजी हम थोड़ा बेवफ़ा क्या हुए ? आप तो बदचलन हो गए "? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.-9414657511. लिंक - www.pitamberduttsharma.blogspot.com

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जिसे देखो वही आजकल कुछ ऐसा ही कहते नज़र आ रहे हैं ! अर्थ यही निकलता है शब्द कुछ बदले से हो सकते हैं वस्तुस्थति अनुसार !लड़का हो लड़की हो , नेता हो सत्ता पक्ष का चाहे ,  चाहे हो वो विपक्ष का ! सेकुलर हो या कॉम्युनल !महिला आयोग की महिलाएं हों या फिर मानव आयोग के समाजसेवी !कवि लेखक हों या फिर टीवी अखबार वाले पत्रकार या एंकर भाई-बहन लोग ! तरीका एक ही है अपने ऊपर उठी ऊँगली का जवाब देने हेतु !
                           वैसे तो ये टाईटल मैंने तनु वेड्स मनु रिटर्न से लिया है !जो काफी आकर्षक लगा !कसम "सरिता" माता की !राम लाल की माता जी की नहीं भाई लोगो जो महिलाओं की मैगज़ीन आती है उस सरिता माता की कसम खाकर कहता हूँ कि जिन-जिन महिलाओं ने सरिता-गृहशोभा पढ़कर , महिला आयोग और सेकुलर नेताओं के मार्मिक व ज्ञानवर्धक बयान सुनकर अपनी संतानों को जनम दिया था ! आज वो हर क्षेत्र में अपने कमाल दिखा रहे हैं !इसीलिए आजकल लेखकों के लेख व कहानियाँ , गीतकारों के गीत , संगीतकारों का संगीत  और फिल्मकारों की फ़िल्में ऐसा कुछ परोसने लॉगिन हैं कि उसका जादू युवाओं के सर चढ़ कर बोलने लगा है ! इसी का नतीजा ये है कि उ…

"आज की प्रोफैशनल होती हुई भाजपा,पुराने विचारधारा-युक्त और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को, गंगा जी में तारने जा रही है क्या"?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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आज सूरतगढ़ में भाजपा के " कार्यकर्त्ता-मिलन "कार्यक्रम जिला-प्रभारी श्रीमान कैलाश मेघवाल , कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और मोदी जी एवं वसुंधरा सरकार द्वारा करवाये गए कार्यों की जानकारी देंगे ! तथाकथित संगठन की दृष्टि से वो भाजपा श्रीगंगानगर के एक प्रभावशाली नेता हैं !उनका पार्टी के नेताओं पर काफी दबदबा है ! लेकिन क्या वो कनिष्ठ कार्यकर्ताओं के " मन की बात " जान पाएंगे ? जबकि वास्तविकता ये है कि भाजपा के प्रदेशध्यक्ष श्रीमान अशोक परनामी जी 1 वर्ष बाद माननीया वसुन्धरा जी के "आशीर्वाद "और ईशारा प्राप्त कर अपनी कार्यकारिणी घोषित कर पाये हैं !इसी तरह इशारे पा-पा कर ही जिला कार्यकारिणियां और मंडल कार्यकारिणियां बनायीं जा रही हैं !
                            भाजपा के मूल विचारों से जुड़े हुए पुराने एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं को मालूम है कि  पहले जब भी कोई संगठन का नेता भाजपा की मीटिंग लेता था तो वो सबसे पहले मीटिंग में उपस्थित लोगों की हाज़िरी लेता था ! फिर मीटिंग में जो आये हैं ,वो कौन हैं , उनका परिचय लिया जाता था और अपना दिया जाता था ! तत्पश्चात ये देखा जाता था कि जि…

"एक सार्वजनिक प्रार्थना-पत्र , सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश के नाम "- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न.- 94146-57511.

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सेवा में,                        श्रीमान न्यायाधीश महोदय जी,                                सर्वोच्च-न्यायालय कार्यालय,                                        नई दिल्ली ! विषय :-           जनहित मुद्दों पर याचिका हेतु ! श्रीमान जी,                         आपके द्वारा भूतकाल में कई जनहित के विषयों पर अभूतपूर्व निर्णय सुनाये गए हैं ! उन्हीं से प्रेरित होकर ही आज मैं आपके समक्ष निम्नलिखित जनहित के मुद्दे रखना चाहता हूँ ! क्योंकि इन विषयों को हमारे माननीय नेतागण कभी भी अपने राजनितिक स्वार्थों के कारण संसद में उठाएंगे !कोई क़ानून बनने की तो सम्भावना ही नज़र नहीं आती !विषय ये हैं :- 1. हर प्रकार के आरक्षण देने या ना देने के कारणों की विस्तृत समीक्षा करवाई जाये ! 2. भारत सरकार के किसी भी फ़ार्म में जाति - धर्म जानने का उल्लेख नहीं होना चाहिए !निजी स्तर पर भी इनको लिखना गैर कानूनी बना दिया जाये ! 3. आज के बाद किसी भी धर्म-सम्प्रदाय का कोई नया निर्माण ना हो और कोई भी धार्मिक उत्सव,कार्य और प्रदर्शन सार्वजानिक स्तर पर ना करने दिया जाए ! सभी धार्मिक स्थलों को सरकार अपने कब्जे में ले ले ! केवल पूजा स्थल पर …

" और भाई साहिब , क्या हाल हैं आपकी भाजपा के ? मैंने तो छोड़ दी जी राजनीती "!!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - 94146-57511.

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जी हाँ मित्रो ! ऐसे ही कुछ वाक्य सुनने को मिले जब मैं बड़े दिनों बाद एक ऐसी मैरिज-पार्टी में गया जहां ज्यादातर सभी राजनितिक दलों के छोटे कार्यकर्त्ता से लेकर बड़े प्रादेशिक नेता तक पधारे हुए थे ! पधारते भी क्यों ना जी हमारे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमान अशोक नागपाल जी के सुपुत्र की शादी की पार्टी जो थी ! वो हैं ही इतने मिलनसार कि उनका निमंत्रण कोई ठुकरा ही नहीं सकता ! आपसी राजनितिक मतभेद अपनी जगह और प्यार अपनी जगह ! इसीलिए क्या कांग्रेस और क्या बीएसपी सभी राजनितिक और सामाजिक संस्थाओं के माननीय पदाधिकारी गण हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों से पधारे हुए थे ! सबसे मिलने-मिलाने और हाल-चाल जानने में ही डेढ़ घंटा लग गया जी ! और फिर इतने सुन्दर व्यंजन बनाये गए थे कि पूछिए मत आनन्द आ गया ! हमने भी वरवधु को और हमारे मित्र अशोक नागपाल जी को दिल खोलकर बधाइयां दीं !
                          अब आते हैं उस मुद्दे पर जो मुझे अंदर तक झिंझोड़ गया ! जैसे मैंने आपको पहले ही बताया की इस पार्टी में दो जिलों से लोग आये हुए थे नए एवं पुराने कार्यकर्त्ता !सबसे राम-राम करते वक्त साथ में मैंने भी और मिलने वाले ने भी…

"अमीरों - नेताओं का अदालत,थाने और जेल आना - जाना ऐसा है, जैसे ससुराल गैंदा फूल हो "??-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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जी हाँ !! पाठक मित्रो !!पहली बार जब किसी को पोलिस वाले " आवश्यक - कार्य "हेतु थाने में बुलाते हैं या फिर ससम्मान गाडी भेजकर उठाकर ले जाते हैं तो भगवान कसम उसे बड़ा डर लगता है ! और जिसे नहीं लगता वो "दबंग"कहलाता है ! लेकिन जैसे ही 2 - 4 बार आना-जाना हो जाता है तो फिर थाने-जेल और अदालतें बिलकुल ससुराल जैसे मीठे लगने लगते हैं ! 
                              नहीं अगर विश्वास हो रहा आपको तो , माननीय पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम, कैप्टन सतीश शर्मा,सुरेश कलमाड़ी,लालू यादव, बंगारू लक्ष्मण , तहलका मचाने वाले पत्रकार तरुण तेजपाल, सुधीर चौधरी ,सलमान खान , आसाराम बापू आदि-आदि हर क्षेत्र के लाखों महानुभाव अनुभवी लोग हैं !उनसे मिलकर पूछा जा सकता है ! आज जिंदल साहिब पेशी भुगतने अदालत गए हैं तो जयललिता जी वहाँ से बरी होकर दोबारा शपथ ग्रहण करने वाली हैं ! लालू जी स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकते तो क्या शातिर दिमाग से किसी भी पार्टी के नेता या उसके काम को नक्कार तो सकते हैं ? 
                                ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत का मीडिया और क़ानून बनाने,लागू कराने वाले एवं न्याय…

"उमा" कहे ये अनुभव अपना ...."..!!-पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक)

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बिलकुल नहीं जी , मैं भोले शंकर जी वाली उमा माता की बात नहीं कर रहा , मैं तो अपनी भाजपा नेता पूजनीया संत , सांसद और मंत्री सुश्री उमा भारती जी की बात आपको बताना चाह रहा हूँ ! आजकल वो बड़ी चतुर राजनीतिज्ञ हो गयीं हैं ! "सत-संग" से जो ज्ञान और भोलापन यानी कोमलता उनमे आई थी , वो सभी अब होशियारियों में तब्दील हो चुकी हैं !
                            हुआ यूूँ कि आज एक इंटरव्यू देखने को मिला जिसमे उन्होंने प्रश्न करता के शरारत भरे सवालों के उत्तर भी बड़ी सहजता से और मुस्कुराते हुए दिए ! उन्होंने ये माना कि भारत के नेताओं , मीडिया वालों ,अफसरों और जनता को नियमों पर चलने की आदत नहीं है ! मेरे ख्याल से ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि महात्मा गांधी जी ने भारतवासियों को ये  कर दिया था कि " अंग्रेजों  खिलाफ असहयोग आंदोलन " शुरू कर दो !! लेकिन वो इस आदेश को वापिस लेना भूल गए ! शायद इसीलिए आज भी आज की सरकार के बनाये नियमों का पालन करना हम अपनी हेठी मानते हैं ! उमा जी ने कहा की अब ऐसा नहीं होगा ! क्योंकि मोदी जी स्वयं भी ज्यादा से ज्यादा काम भी करेंगे और नियम पर भी चलेंगे तो बाकी सबक…

" जो नेता अपने संसदीय क्षेत्र में ही असफल साबित हो चुके हैं , उन्हें हमलोग और मीडिया देश की बागडोर सम्भलवाने हेतु क्यों आजमाना चाहते हैं "?- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक)

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हमारे घर में अगर कोई नालायक पैदा हो जाता है , और वो परिपक्वता की उम्र तलक आने पर भी  समझदार नहीं बन पाता तो उसे घर से बाहर  जाने का रास्ता दिखा दिया जाता है या फिर बोलचाल बंद कर दिया जाता है !तो देश के निर्णय लेने वाले इन असफल नेताओं के प्रति हम इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं ??
                         1947 से लेकर आज तक हम कितने नेताओं को कितनी बार संसद भेज चुके हैं ये तो हिसाब हमें मिल जाएगा , लेकिन ये हिसाब गहरी खोजबीन से भी पूरा नहीं मिल पायेगा कि उस नेता ने सचमुच में जनहित में कौनसे और कितने काम करवाये ! वो काम उचित देशवासी तलक पंहुचे भी हैं या नहीं ! ये देखना तो उसी तरह से होगा जैसे मिटटी के बड़े ढेर से " सुई " को खोजने का काम होता है !~ 
                      ये असफल  नेता लोग कभी परदे के पीछे बुरे लोगों से मिल जाते हैं कभी जनता के सामने जनता के हित की बातें करके , अपने हित साधने हेतु "गठबन्धन"कर लेते हैं ! जब इनके हित सधने बंद हो जाते हैं तो ये फिर अलग हो जाते हैं !मज़े की बात ये है कि कुछ वर्ष बीत जाने के बाद ये फिर नए नाम से इकठ्ठे हो जाते हैं !! जैसे "…

"हो के मजबूर मुझे , उसने भुलाया होगा !ज़हर भी दवा जान के खाया होगा "! हिंदी-चीनी भाई-भाई !!-पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक )

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1963 में बनी ये "हक़ीक़त"नाम की फिल्म में भारत - चीन के मध्य हुए भयंकर युद्ध का दर्द बयान किया गया था ! इस फिल्म में भारत की माली हालत , देश के जांबाज सिपाहियों की शहादत की दास्ताँ,और देश-वासियों के समर्पण की भावना को बड़े ही सुन्दर -मार्मिक तरीके से दिखाया गया था ! 
                         उस समय के घाव तब हरे हो जाते हैं जब चाइना के जनप्रतिनिधि पाकिस्तान जाकर " योजनाएं " बनाते हैं ! बॉर्डर के अंदर घुसकर गलत काम करके चले जाते हैं !और हमारे देश के नक़्शे को कम दिखाते रहते हैं आदि-आदि ! अब क्योंकि हम शांति-प्रिय लोग हैं और समय भी बड़ी मरहम का काम करता है ! एक उम्मीद भी हमारे मन में जागती रहती है चाहे दुश्मन के मन में जागे ना जागे !
                  कांग्रेस आजकल एक ही लाईन ज्यादा बोलती दिखाई दे रही है कि " मोदी जी के विदेशी दोरों से और देश में कुछ भी निर्णय लेने से अगर कोई अच्छा होता है तो उसमे उनके नेताओं के निर्णय  हाथ है ! " लेकिन कंही कोई गड़बड़ हो जाए तो वहाँ चाहे मोदी जी का दूर-दूर तलक कोई वास्ता भी ना हो , तो भी उन्हें ये कोंग्रेसी घसीट ही लेते हैं !कॉमरे…

"सियोल के रक्षामंत्री को एक गुप्त रक्षा कार्यक्रम में सोने और तानाशाह से बहसने के आरोप में तोप से उड़ा दिया ",क्या ऐसी न्याय व्यवस्था भारत में होने पर हम सुधरेंगे ??- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक )

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सतयुग से भारत वासियों को सुधारने हेतु भगवान अवतार लेते-लेते , सन्त -गुरुजन शिक्षा देते-देते थक गए , लेकिन हम भारतवासी सुधरने का नाम ही नहीं लेते हैं ! हमारे भारत में भी कई लोगों को कड़ी से कड़ी सजाएँ दी गयी हैं लेकिन उन सब सजाओं को हमने मानवता की दोहाई देकर छोड़ चुके हैं ! यानी हम कोमल-हृदयी हो गए हैं !
                                   इसका असर बुरे काम करने वालों के साथ अच्छे लोगों पर भी पड़ा है !न्याय मिलने में हो रही देरी और बुरे कार्य करने वाले बदमाशों ,नेता एवं अमीर लोगों को 2 - 4 महीने जेल में रहने के बाद बेल मिलती दिखाई देने  के कारण बुरे काम करने में ही अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा है ! क्योंकि फिल्म जगत और मीडिया अपराध जगत को महिमामंडित करता रहता है !इसी कारण से हम सब अच्छे व बुरे लोग देश के क़ानून सरकारी तंत्र को अपने " ठेंगे " पर रखने के आदि हो गए हैं !
                               अब हमारी हालत ये हो गयी है की जो आदमी सिद्धान्तों -सच्चाई की बात भी करता है तो वो हमें मुर्ख नज़र आता है !इसीलिए मैं थोड़ी देर तक देश में किसी तानाशाह का शासन चाहता हूँ जो सख्ती करके …

" आज का पत्रकार क्या करना चाहता है ? जागृत समाज की रचना या बुराइयों में सहयोग ??- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक )

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केजरीवाल सरकार द्वारा जारी किये गए सर्कुलर से डरा हुआ मीडिया बड़ी चालाकी से सभी राजनितिक दलों को डराने की नाकाम कोशिश कर रहा है !लोकतंत्र में जब सभी स्तम्भ जवाबदेह हैं तो मीडिया क्यों नहीं ? स्वयं मीडिया के अनुसार उनके द्वारा स्थापित अनुशासन समितियां मीडिया पर नकेल डालने में बुरी तरह फेल हो चुकी हैं तो अगर सरकार एक ऐसी कमिटी बनादे जिनमे समाचारों का उपयुक्त व्यक्तियों द्वारा जाँच लिए जाएँ तो क्या हर्ज़ है जी ??
                               आखिर मीडिया अपने ऊपर कोई नियंत्रण क्यों नहीं चाहता है ? जबकि आजके पत्रकारों में निम्नलिखित अवगुण पाये जाते हैं !-:
1. आज भी छोटे पत्रकार अफसरों-नेताओं और आम जनता को डराते - धमकाते एवं ब्लैकमेल करते दिखाई दे जाते हैं ! 
2. दबाव से विज्ञापन लेना भी आम बात है !नहीं देने पर खिलाफ में समाचार लगाना भी प्रचलन में है !
3. बड़े अखबार मालिक तो राजयसभा के सदस्य बनने हेतु भी अपने अखबार का " सदुपयोग " करते हैं !
4. टीवी चेनेल के रिपोर्टर तो नेताओं से शादियां भी करवा लेते हैं ! राजनितिक दलों के सलाहकार बन जाते हैं !मदद करने या विरोध करने हेतु अपने चेनेल पर प्र…

"साठ महीनों में से बारह महीने गुज़र गए मोदी जी " !!- पुण्य प्रसुन वाजपेयी जी से साभार !

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आपको नौकरी मिली। नहीं मिली। किसानों को खून पसीने की कमाई मिली। नहीं मिली। जवानों के कटते गर्दन का जवाब सरकार ने कभी दिया। नहीं दिया। महंगाई से निजात मिली। नहीं मिली। बिना घूस के काम होता है। नहीं होता है। घोटालो की सरकार को बदलना है। बदलना है। स्विस बैंक से कालाधन लायेंगे। हां लायेंगे। आपने उन्हें साठ साल दिये। हमे सिर्फ साठ महीने देंगे। हां देंगे। और अब साठ महीनो में से बचे है अडतालीस महीने। तो क्या चुनाव से एन पहले नारे और नारों के साथ जनता की गूंज ने पहले बारह महीनों में देश को एक ऐसे मुहाने पर ला खड़ा किया, जहां नारों से सुर मिलाती जनता को लगने लगा कि सत्ता उसे घोखा दे रही है या फिर अच्छे दिन लाने के वादे के बीच उसी व्यवस्था के मोदी भी शिकार हो गये, जिसने 1991 के आर्थिक सुधार के बाद देश के हर सरकार को दबोचा चाहे वह यूपीए हो या एनडीए या फिर यूनाइटेड फ्रंट। किसानों के मुद्दा आर्थिक सुधार होने नहीं देगा। जवानों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति चलने नहीं देगा। कालेधन पर नकेल आवारा पूंजी पर टिके विकास की रीढ़ को तोड़ देगा। महंगाई पर रोक बिचौलियों की राजनीतिक साठगांठ को खत्म कर देगा । तो…