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Showing posts from July, 2015

मैं"धर्मान्तरण"नहीं करना चाहता बल्कि,धर्मों में आ चुके"अन्तर"को पाटने हेतु "रण" करना चाहता हूँ !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विह्लेषक) मो. न. - 9414657511

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              आजकल के हालात को देखकर रोज़ाना मन में ख़याल आते हैं कि मेरे लेखन से तो किसी के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही लेकिन अगर कहीं मैं "नायक" फिल्म के नायक अनिल कपूर साहिब की तरह कुछ दिनों हेतु इस देश का प्रधानमन्त्री या राष्ट्रपति नहीं, क्योंकि उनके पास भी सभी काम को तुरन्त कर देने की शक्तियाँ जो नहीं हैं , सो इसीलिए मैं जब तलक "सर्वेसर्वा"न बन जाऊं , तब तक मैं तो दिनों में इस देश के ,सभी गुरुओं,लोकतंत्र के स्तम्भों,और तन्त्र आदि को "दुरुस्त" करके एक वर्ष के प्रयोग हेतु उसे लागू भी कर दूँगा  ! फिर अगर वो सही साबित हो जाए तो वो लागू रहे अन्यथा उसमें फिर बदलाव कर दूँगा !परन्तु ये सपना ही रहेगा , ये भी मुझे मालूम है जी !बात आज की करते हैं !
                    आज गुरु-पूर्णिमा है ! उन सच्चे गुरुओं को सादर नमन करते हुए ये कहना चाहता हूँ कि आज के समय में धर्मों में जो लोगों को जोड़ने की बजाये तोड़ने वाले या अपने धर्म को दुसरे के धर्म से बड़ा साबित करने हेतु प्रयास किये या करवये जा रहे हैं , उन सबको दुरुस्त करने हेतु हमें छद्म गुरुओं को चिन्हित करना होगा !इसी…

" ख़ाक " जो आज ख़ाक में मिलेगी !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक ) मो. न. - 9414657511

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*मुंबई बम ब्लास्ट के गुनहगार याकूब मेमन को गुरुवार को 6.30 मिनट पर नागपुर जेल में फांसी दे दी गई। याकूब की फांसी के दौरान उसके परिवार के लोग भी जेल परिसर में मौजूद थे। जेल अधीक्षक सहित 6 अधिकारियों की मौजूदगी में फांसी दी गई।पोस्टमार्टम के बाद उसका शव उसके परिवार को सौंप दिया जाएगा। *याकूब के शव का पोस्टमार्टम शुरु* जेल प्रशासन ने सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर उसे मृत घोषित किया। इसके साथ याकूब के शव का पोस्टमार्टम शुरु कर दिया। *जन्मदिन के दिन ही मौत* ये भी अजीब संयोग की है कि आज ही के दिन याकूब का जन्म हुआ था और आज ही के दिन उसे मौत मिली। आज याकूब का 53 वां जन्मदिन है। आज उसे वहीँ दफनाया जायेगा जहां उसके बुज़ुर्गवार दफनाएं गए हैं !

                                  जैसे कोई बच्चा गलत संगत में आकर बुरा आदि बनता है बिलकुल वैसे ही कोई अच्छा आदमी बुरे नेताओं के भाषणों को सुन-सुन कर बुरा आदमी बन जाता है ! इन बुरे राजनेताओं ने ही सेकुलरिज़्म,कोम्युनलिज़्म ,समाजवाडिज़्म और माओवादिज़्म नामक शब्द दिए हैं इस देश को ! इस काम में पत्रकारों ने भी अहम भूमिका निभायी है ! कॉंग्रेस्स का काम तो बांटो और राज करो ही…

" ये आज़ादी नहीं , अतिक्रमण है जनाब !! इनको बाँधा जाना आवश्यक है " !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक ) मो. न. - 9414657511

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माननीय प्रधानमंत्री जी ने भारत की जनता से सुझाव माँगे हैं कि उन्हें बताया जाए कि वो किन-किन विषयों पर भाषण दें ? भारतवासी भरपूर संख्या में अपने सुझाव अवश्य देंगे क्योंकि यही तो एक वो काम है जो हम बड़ी खूबी से करना जानते हैं ! 
                             माननीय मोदी जी !! आप बड़े ही चतुर सुजान हैं ! आप जानते हैं कि इस बहाने से जनता का आक्रोश अगर कुछ होगा तो वो कम हो जाएगा ! इसीलिए आपने ऐसा सोचा है ! तो लीजिये साहेब मेरे सुझाव हाज़िर हैं :-
1. भारत के नागरिकों की आज़ादी को कम किया जाए !क्योंकि हम जब चाहते हैं तभी हम दूसरों के मामले में टांग अड़ा देते हैं !हम जब चाहें काम करते हैं, जब चाहें नहीं करते ! हमें काम पर बैठे हुए भी काम ना करने की आज़ादी है !और तो और हमें किसी को काम नहीं देना भी खूब आता है ! हम किसी भी काम को गंदा, महंगा और देर से भी कर या करवा सकते हैं !
2. हम जब चाहें संत बन सकते हैं और जब चाहें डाकू बन जाएँ !जब चाहें देश-भक्त और जब चाहें गद्दार बन जाएँ !किसी सरकारी एजेंसी को  चलेगा तो पकडे जाएंगे ! पकडे गए तो पंद्रह-बीस साल केस चलेगा ! अगर सज़ा हो भी गयी तो कई मानवीय आधार पर छुड़वा …

" ये आदमी सड़क के और हमारे सरकारी नियम "!!?? - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक ) मो. न. - 9414657511

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पाठक मित्रो ! बहुत वर्षों पहले शत्रुघ्न सिन्हा साहेब की एक फिल्म आई थी , जिसका नाम था " आदमी सड़क का " ! इस फिल्म में उन्होंने निम्न स्तर के लोगों की समस्याएं दिखायीं थीं और ये भी दिखाया था की चाहे वो गरीब हैं लेकिन उनमे ईमानदारी संस्कार और उपकार की भावना बहुत होती है ! श्री देवेन्द्र गोयल की इस फिल्म में पैसों वालों के चरित्र की सच्चाई को  बड़ी खूबी के साथ दिखाया गया था !
                         आज दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री " विष्णु के पन्द्रवें अवतार "केजरीवाल जी को भी सड़क के आदमियों की इतनी याद आई कि उन्होंने भावावेश में बहकर सड़क  नियमों का पालन करवाने वाले ट्रेफिक , होमगार्ड्स और आम पोलिस वालों को " ठुल्ला " शब्द बोल दिया ! भावावेश में बह गए मैं इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि बाद में उन्होंने माफ़ी भी मांग ली , लेकिन सिर्फ ईमानदार पोलिस वालों से ! याद रहे !
                        अब सवाल ये पैदा हो गया कि क्या ये भाषा हमें मान्य है ??तो इसके लिए मेरा कहना ये है कि भाषा का स्तर सबसे पहले हमारे सिनेमा और प्रचार एजेंसियों ने बिगाड़ा ! जब उनको किसी ने नहीं रोका…

" भाजपा के मौजूदा तौर-तरीके देख-सुन कर आज मैंने पार्टी का प्राथमिक सदस्य बनने से भी इन्कार कर दिया "!! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक)

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बड़े चाव से 1980 में हम  भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बने थे ! हमारी रूचि और सक्रियता को देख कर पार्टी के बड़े पदाधिकारियों ने मुझे पहले नगरमंत्री फिर जिला कार्यकारिणी सदस्य और फिर प्रदेश चुनाव विश्लेषण एवं सांख्यिकी प्रकोष्ठ का प्रदेश उपाध्यक्ष तक बना दिया ! इस दौरान हमने भी रात देखि ना दिन , ये भी नहीं देखा की हमारी जेब से कितना धन पार्टी कार्यक्रमों में आने-जाने में लग रहा है !कोई भी बड़ा नेता या चुनाव आते तो मेरे जैसे कई कार्यकर्त्ता जी जान से लग जाते क्योंकि हमारे खून में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने राष्ट्र-भक्ति और अनुशासन जो कूट-कूट कर भर दिया था !
                            पहले अटल जी को प्रधानमंत्री बनाने की चाहत थी तो उनको मुझ जैसे कार्यकर्ताओं ने बनाया भी , लेकिन हम आडवाणी जी को लाख प्रयासों के बावजूद प्रधानमंत्री नहीं बना पाये ! लेकिन फिर भगवान ने कुछ ऐसा चक्र घुमाया कि हमारे मोदी जी इस तरह उबर कर आये कि पूरा विश्व आश्र्यचकित रह गया ! लाखों दुश्मन उनका रास्ता रोक नहीं पाये ! एक नया इतिहास लिखते हुए उन्होंने पहलीबार गैर कोंग्रेसी सरकार बनाने का चमत्कार कर दिखाया ! एक वर्ष सहर्…

" राजनितिक दलों का लिविंग-रिलेशनशिप क्या गुल खिलायेगा "? - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक) - मो. न. - 9414657511

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जैसे मानव जाति में विधिवत शादी-ब्याह करना अब पुराना रिवाज़ हो चुका है ! कुत्तों-बिल्लियों से  ज्ञान प्राप्त कर आज की युवा-शक्ति "लिविंग-रिलेशनशिप "में रहना ज्यादा पसंद करती है ! बिलकुल वैसे ही राजनीतक लोग अब किसी दल के साथ ना तो स्वयं उस दल की रीतियों-नीतियों के साथ निष्ठा निभाते हुए जनहित के कार्य करने में विश्वास रखते हैं और ना ही कोई पार्टी किसी दुसरे दल के साथ अपना" गठबंधन धर्म " निभाती है ! आजकल तो जैसे अपना या अपने दल का स्वार्थ सिद्ध हुआ वैसे ही ऐसे पराये हो जाते हैं जैसे वो एक दुसरे को जानते ही नहीं थे !
                        ऐसा कई बार करते हुए हमने वामपंथी दलों ,ममता,जयललिता,मुलायम और कांग्रेस आदि को देखा है ! कभी ये अकेले राजनीती करना पसंद करते हैं तो कभी किसी दुसरे दल के साथ !ऐसा करने के बहाने भी इन लोगों ने ढूंढें हुए हैं !भ्रष्टाचार, सेकुलरिज़्म और साम्प्रदायिकता इनके मुख्य बहाने हैं जिन्हें ये अपनी सहूलियत के अनुसार तोड़-मरोड़ लेते हैं !आजकल ऐसे लोगों ने ये सिद्ध करना शुरू कर दिया है कि जैसे कांग्रेस और U.P.A.की सरकारों में भ्रष्टाचार हुआ , भाजपा और N.D…

" लो जी ! शुरू होने जा रही है संसद में राजनितिक सर्कस ! जोकर बनेंगे वामपंथी ,समाजवादी व सेकुलर रोग से पीड़ित पत्रकार और नेता "!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)- 9414657511

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संसद का आनेवाला मानसून सत्र देश की कोई समस्या हल हेतु नहीं होने जा रहा है बल्कि सरकारी पक्ष अपनी इज़्ज़त बचाने और सारा विपक्ष इस सरकार की बची-खुची इज्जत लूटने का काम करेगा ! सभी राजनितिक दलों ने प्रेस-कांफ्रेंस बुलाकर अपनी-अपनी मंशाएं भी जगज़ाहिर कर दीं हैं !अंदरखाने गहरी चर्चाएं भी चल रही हैं कि कुल 5 नहीं तो 2 त्यागपत्र तो हो ही जायेंगे इस स्तर के अंत तक !?
                          वसुंधरा जी और शिवराज सिंह जी तो अपनी सफाई पार्टी अध्यक्ष जी को दे आये हैं लेकिन सुषमा जी और महाराष्ट्र की युवा महिला नेता पंकजा मूंडे जी का क्या बना ??कोई नहीं जानता इनके बारे में कांग्रेस और सरकार दोनों शांत हैं इसीलिए ये दोनों महिला नेता भी "चुप" बैठकर हालात सामान्य होने का इंतज़ार कर रही हैं !
                                अपने राहुल गांधी जी , जो आजकल कई प्रदेशों में किसानों के साथ , महिलाओं के साथ और मजदूरों के साथ " फोटो-सेशन" करवाकर अपने आपको देश का भावी U.P.A.प्रधानमंत्री घोषित करवाने की फ़िराक में हैं ! लेकिन हाय री किस्मत इतने लम्बे-लम्बे डायलॉग बोलने के बाद भी उनकी अपनी पार्टी न…

"आँखों में धुल झोंको !और ऐश करो !! यही आज का तक़ाज़ा है जी " !!??-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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कोई ज़माना था सतयुग का , जब लोग तपस्या करके तुरंत भगवान से वर प्राप्त कर लिया करते थे !और फिर अपना जीवन आनंद से गुज़ार देते थे !फिर ज़माना बदला, राक्षस लोग आ गए ! उन्होंने तपस्या करके तुरंत वरदान प्राप्त करके अत्याचार करना शुरू कर दिया ,तो भगवान परेशान होने लगे ! ब्रह्मा और शिव जी जैसे भोले भण्डारी उन राक्षसों के जाल में आसानी से फंसने लगे !
                                     फिर त्रेता आया , भगवान तरह-तरह के अवतार लेकर ताक़त का दुरपयोग करने वाले राक्षसों का उद्धार करने लगे ! देवताओं को कई बार राक्षसों के चुंगल से भगवान विष्णु ने " मोहिनी" रूप धर के बचाया !यानी स्त्री प्रेम करने की भावना का नाज़ायज़ फायदा उठाना सिखाया !इस दौरान इंद्र के सिंघासन पर कब्ज़ा कर शासन करने की लालसा भी जग चुकी थी ! इंद्र भी अपनी गद्दी को बचाने हेतु प्रयासरत लोगों को बरगलाने हेतु अप्सराओं को भेजा करता था !
                            फिर द्वापर युग आया जिसमे भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाएं दिखायीं जन्म से बचपन , बचपन से जवाानी और फिर जवानी से अवतार की उम्र के अंत तक भगवान श्री कृष्ण ने अपनी 16 कलाएं ना केवल दिख…

माननीय नेता जी ! मैं "गधा" जाती से हूँ ,हमारी भी संख्या करोड़ों में है !- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक) - 9414657511

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कल भाजपा के अध्यक्ष जी ने कहा कि भजपा ने पहला obc.प्रधानमंत्री और सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री इस देश को दिए हैं ! माननीय नेता जी ने शायद ये बयान बिहार और उत्तर प्रदेश के भविष्य के चुनावों के मद्देनज़र दिया है !उन्होंने सोचा होगा कि obc.जाती के वोटरों की गिनती इन प्रदेशों में ज्यादा है !इससे वो सब खुश हो जायेंगे और इस तरह उन्हें ज्यादा वोट मिल जायेंगे ! ऐसे तो नेता जी देश में गधों की भी संख्या बहुत ज्यादा है  !  तो क्या आप उनको भी वोटर बना  देंेगे ? उनमे से भी किसी को इस देश का प्रधानमंत्री बना दोगे ??किसी भी पद को पाने का अधिकारी सिर्फ वो होता है जो उस पद के अनुसार ज्ञान रखता हो या उस पद के समकक्ष कोई डिग्री धारक हो ! कोई रंग,जाती,या धर्म देख कर किसी को चपड़ासी भी बनाया जा सकता है क्या ??
                         लेकिन अमित जी आपको शायद ये आभास नहीं रहा कि आप उस भाजपा के माननीय अध्यक्ष हैं जिसका एक अदना सा कार्यकर्त्ता बड़े से बड़े नेता के भी गलत होने पर कान तक मरोड़ देता है !इतना लोकतंत्र है हमारी भाजपा में ! पिछले कुछ समय से पार्टी को एक कम्पनी बनाने हेतु प्रयास चल रहे हैं ! जिनको कामयाब नहीं…

अपनी अपनी डफली और अपना अपना राग है देश-जनता जाये भाड़ में !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)- मो. न. - 9414657511

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अन्ना जी कहते थे की संविधान में राजनितिक दलों का कोई स्थान नहीं हैं और अलगअलग विचारधारा वाले दलों का गठबंधन तो ऐसे है जैसे भारतीय गणतंत्र के साथ कोई " गैंग-रेप "कर रहा हो ! जो जीत जाएँ वो अपना नेता चुने और फिर देश या प्रदेश चलायें !
                 उधर केजरीवाल जी और उनके शिष्य फर्मा रहे हैं कि हम तो जनमत करवाएंगे हर काम करने से पहले ! इस पर भाजपा और कांग्रेस दोनों मिलकर" वैन "करने लगे कि ऐसा भी संविधान में लिखा नहीं है ! कोई इनसे पूछने वाला हो कि तुम जो वोट लेने हेतु कभी बिजली मुफ्त तो कभी चावल मुफ्त बांटते फिरते हो , वो क्या संविधान में लिखा है ??कोटे और सब्सिडियाँ बांटना क्या संविधान में लिखा है ?? और ये आरक्षण के नाम पे , धर्म-निरपेक्षता के नाम पे जो नंगा-नाच हो रहा है वो क्या किसी संविधान में लिखा है ??
                              हर पांच महीने बाद चुनाव करवाना क्या संविधान में लिखा था ! बेचारे युवाओं को तरह-तरह के टेस्टों में उलझना क्या संविधान में लिखा है ?? देश के अमीरों को व्यापार में राहतें देना क्या संविधान में लिखा था ! लेकिन आपने मिलजुल कर संविधान में…

मौसम - मौसम !! ये लवली मौसम .........!!! जो मस्त ना हो सके ,वो अभागा है !!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - 9414657511

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जी हाँ !! पाठक मित्रो !! आजकल पूरे भारत पर काले-घने बादल बड़े मेहरबान हो रहे हैं !मरुस्थल में भी ऐसा लगता है जैसे बहार आ गयी हो !! गांव के बच्चे युवा - युवतियां,नए ब्याहे हुए लोग और हमारे जैसे बूढ़े भी आनन्दित हुए जा रहे हैं !ठंडी-ठंडी फुहारों के बीच तेज़ चलती हवाएँ मन में एक नयी आशा जगाती जाती हैं कि  हे !! मानव !! छोटे-छोटे दुखों से परेशान मत होवो ,अभी परमात्मा की प्रकृति आपको सुख प्रदान करने के लिए दयालु भाव से आनंद की धारा बहा रही है !!
                          शायर और कवियों को तो अपनी रचनाएँ रचने हेतु जैसे ऐसे ही समय का इंतज़ार रहता है !उनकी कलम नए-नए शेयर लिखती ही जाती है !कौन क्या - क्या करता-कहता है इस मौसम में ये तो मैं नहीं बताऊंगा ! लेकिन एक विशेष खुशबु वातावरण में फैली हुई है जो सबको मस्त कर रही है !
                          किशोर जी का एक गीत याद आ रहा है मुझे वो यूूँ है कि .....शोखियों में घोल जाए फूलों का शबाब , उसमें फिर मिला दी जाए थोड़ी सी शराब !! होगा यूूँ नशा जो तैयार वो प्यार है !!जी हाँ !! प्यार हेतु ये ये सब अति आवश्यक हैं !अन्यथा प्यार करने में मज़ा ही नहीं आता जी !…

चाह नहीं मुझे कि मैं घोटालों पर लिखता जाऊं ! ..............!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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भारत के प्रसिद्ध कवि श्री माखन लाल चतुर्वेदी जी की वो प्यारी सी कविता याद आ गयी जिसमें वो एक पुष्प की अभिलाषा को जाहिर करते हैं ! बचपन में भी पढ़कर ऐसा लगता था जैसे उन्होंने सच में पुष्प के मन की बात ही लिख दी हो !

पुष्प की अभिलाषा  - माखनलाल चतुर्वेदी  चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर, हे हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक।                      ठीक उसी तरह आज जब मैं अपना लेख लिखने बैठा हूँ तो विश्वास कीजिये मुझे घण्टों तलक अपनी "चाह" का ही पता नहीं चला कि मैं किस विषय पर अपने विचार आपके साथ सांझे करुं  ??
आज कल "व्यापम" की बहुत चर्चा है ! इस से पहले ना जाने कितने घोटाले हो चुके हैं , इन सब पर ना जाने कितनी बार कितनों के द्वारा लिखा जा चुका है ! इसलिए इस विषय पर भी लिखने की "चाह"नहीं हो रही है जी !क्योंकि पैसे के बल पर ना जाने कितने लोग डाक्टरी की पढ़ाई पढ़ने हेतु…