Posts

Showing posts from June, 2014

मोदी सरकार की बाधाओं को खत्म कर संघ को विस्तार देने के लिये जुटेंगे प्रचारक..........!!! साभार !!

Image
जश्न के मूड में संघ के प्रचारको का नायाब अभियान

पहली बार संघ के प्रचारक जश्न के मूड में हैं। चूंकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सफर संघ के प्रचारक से ही शुरु हुआ तो पहली बार प्रचारकों में इस सच को लेकर उत्साह है कि प्रचारक अपने बूते ना सिर्फ संघ
को विस्तार दे सकता है बल्कि प्रचारक देश में राजनीतिक चेतना भी जगा सकता है । यानी खुद को सामाजिक-सांस्कृतिक संघठन कहने वाले आरएसएस के प्रचारक अब यह मान रहे हैं कि राजनीतिक रुप से उनकी सक्रियता सामाजिक शुद्दीकरण से आगे की सीढी है । वजह भी यही है कि पहली बार प्रचारकों का जमावडा राजनीतिक तौर पर सामाजिक मुद्दो का मंथन करेगा। यानी संघ के विस्तार के लिये पहले जहा जमीन सामाजिक-सांस्कृतिक तौर पर अलख जगाने की सच लिये हर बरस प्रचारक सालाना बैठक के बाद निकलते थे। वहीं इस बार जुलाई के पहले हफ्ते में इंदौर में अपनी सालाना बैठक में सभी प्रचारक जुडेंगे तो हर बरस की ही तरह लेकिन पहली बार राजनीतिक सफलता से आरएसएस की विचारधारा को कैसे बल मिल सकता है इस पर मंथन होगा । किसी मुद्दे पर कोई फैसला इस बार प्रचारकों की बैठक में नही होना है। बल्कि हर उस मुद्दे पर म…

" केवल समझदार पाठकों हेतु , क्योंकि आज विषय एक बार फिर " सेक्स " है ".....!!- पीताम्बर दत्त शर्मा ( विचारक - विश्लेषक )

Image
लो जी ! हमारे भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा मंत्री विदेश गए हुए थे पीछे से उनका ७ साल पुराण ब्लॉग किसी ने पढलिया , किसी पत्रकार ने उनसे वंही सवाल पूछ लिया कि आप सेक्स की पढ़ाई के बारे में क्या सोचते हैं ?? तो उन्हों ने कह दिया कि इसकी आवश्यकता नहीं है !! बस जी जितने भी सेक्स के जानकार लोग थे लग गए उनके पीछे - " हाय-हाय देखो जी चिकित्सा मंत्री ने ये क्या कह दिया !! आज सेक्स की पढ़ाई की आवश्यकता ही नहीं है !!  बेचारे चिकित्सा मंत्री जी के बचाव में एक और मंत्री बोले कि मैं डाक्टर साहिब का समर्थन करता हूँ ! ये ज्ञान प्रकृति अपने आप पढ़ा देती है ! सेक्स के ज्ञानियों ने रुकने की बजाय अपना शोर और बढ़ा दिया ! तब डाक्टर साहिब ने फिर सफाई दी कि मैं सेक्स शिक्षा के खिलाफ नहीं बल्कि उस " सो काल्ड बुरी शिक्षा के खिलाफ हूँ " !
परन्तु जो लोग चाबी भर के चलाये गए हों , वो भला सफाइयां पेश करने से रुकने वाले थोड़े थे , वो बोले जी नहीं ऐसा कहा गया तो क्यूँ ?? 
             रात 11 बजे एक चेनेल पर ज़नाब अजित अन्जुम साहिब लेकर बैठ गए चार महान विद्वानों को और लगे 1 घंटा भर बहसने इस विषय पर कि सेक्स क…

वैदिक धर्म यानी हिन्दू धर्म के पुनरुद्धारक थे कुमारिल भट्ट - - - !! साभार !!

जब पूरा भारत बौद्धों की चपेट यानी बौद्धप्राय हो गया था, लगभग नास्तिक धर्म राष्ट्रबाद से अलग -थलग होता भारतदेश, विदेशी आक्रमण-कारियों के लिए चारागाह होता देश, बौद्धधर्म राजा और महराजाओ का धर्म, जनता की बिना इक्षा के उस पर थोपा हुआ धर्म, जिसका भारतीयता से कोई ताल-मेल नहीं, जिसमे राष्ट्रबाद के लिए कोई स्थान नहीं, ऐसे में किसी भी देश-भक्त का चिंतित होना स्वाभाविक है काशी में एक बौद्ध राजा की महारानी अपने घर के छत पर खड़ी होकर वैदिक धर्म की दुर्दशा पर रो रही थी किससे कहे अपने मन की ब्यथा को--! वैदिक अथवा सनातन धर्म का नाम लेना तो अपराध हो गया था, गली से जाता हुआ गुरुकुल का एक ब्रम्हचारी जिसके सिर पर पानी की कुछ बूद टपकी ब्रम्हचारी को लगा कि बिना वर्षा के ये पानी -- ऊपर देखा तो एक महिला रो रही है, माता क्या कष्ट है-? उस रानी के मुख से अनायास ही निकल गया कौन बचाएगा इस सनातन- वैदिक धर्म को --? मै वेदों का उद्धार करुगा, मै पुनर्स्थापना करुगा अपने सनातन धर्म का, यह आश्वासन देना किसी और का नहीं आचार्य कुमारिलभट्ट का ही साहस था.
         कुमारिलभट्ट के जन्म के बारे में कई मत है कुछ लोग उन्हें दक्…

" चित्र बोलते हैं ............!!- पीताम्बर दत्त शर्मा "(विश्लेषक - विचारक )

Image

नेहरु के समाजवाद के छौंक की भी जरुरत नहीं मोदी मॉडल को..................!!!!???

Image
बात गरीबी की हो लेकिन नीतियां रईसों को उड़ान देने वाली हों। बात गांव की हो लेकिन नीतियां शहरों को बनाने की हो। तो फिर रास्ता भटकाव वाला नहीं झूठ वाला ही लगता है। ठीक वैसे, जैसे नेहरु ने रोटी कपड़ा मकान की बात की । इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया और अब नरेन्द्र मोदी गरीबों के सपनों को पूरा करने के सपने दिखा रहे हैं। असल में देश के विकास के रास्ता कौन सा सही है, इसके मर्म को ना नेहरु ने पकड़ा और ना ही मोदी पकड़ पा रहे हैं। रेलगाड़ी का सफर महंगा हुआ। तेल महंगा होना तय है। लोहा और सीमेंट महंगा हो चला है। सब्जी-फल की कीमतें बढेंगी ही। और इन सब के बीच मॉनसून ने दो बरस लगातार धोखा दे दिया तो खुदकुशी करते लोगों की तादाद किसानों से आगे निकल कर गांव और शहर दोनों को अपनी गिरफ्त में लेगी। तो फिर बदलाव आया कैसा। यकीनन जनादेश बदलाव ले कर आया है। लेकिन इस बदलाव
को दो अलग अलग दायरे में देखना जरुरी है। पहला मनमोहन सिंह के काल का खात्मा और दूसरा आजादी के बाद से देश को जिस रास्ते पर चलना चाहिये, उसे सही रास्ता ना दिखा पाने का अपराध। नरेन्द्र मोदी ने मनमोहन सिंह से मुक्ति दिलायी, यह जरुरी था। इसे…