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Showing posts from January, 2014

" इस देश का यारो .........!! - क्या कहना "....? ??

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प्यारे देश वासियो , ज़रा नहीं ज्यादा आँख में भर लो पानी क्योंकि जो शहीद हुए हैं उनको नहीं पता था कि ये करेंगे काम हमारे हिंदुस्तानी !!
            जी हां मित्रो क्या ज़माना आ गया है पूछा जा रहा है कि सलमान किसके साथ खड़ा हो गया देखो !! देखो - देखो लता जी किसके साथ बैठकर देश भक्ति का गीत गा रहीं हैं !! देखो गांधी जी कि बात कौन लोग कर रहे हैं ??? आदि आदि ऐसे वाक्य आपको अक्सर सुनायी पड़ते होंगे ! आप भी सोचते होंगे कि देश पूछना चाहता है कि हे नेताओ देश कि भावी पीढ़ी हेतु आपने भविष्य कि क्या योजनाएं बनायीं है , कैसी शिक्षा पद्धिति बनायीं है , देश वासियों को सुरक्षित रखनें हेतु तुम्हारी क्या योजनाएं हैं तो सब एक दुसरे को गरियाने लगते हैं ! या फिर एक दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने लगते हैं !! पत्रकार लोग अपनी सुविधानुसार कभी पत्रकारिता और कभी दुकानदारी कर लेते हैं !!


            जिस प्रकार कि इस देश में शिक्षा नीति चल रही है उससे देश के 50 %प्रतिशत युवा आने वाले नौकरी पाने जितना योग्य ही नहीं बन पाएंगे !! आज कि व्यापर नीति अगर ऐसे ही रही तो विदेशी ही व्यपार करेंगे हम उनके नौकर ही बन पाएंगे !! क…

" हम नौकरों को भी अब नौकर चाहियें " .....???

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आजकल अच्छे नौकर मिलते ही कहाँ हैं ? ( साभार - श्री आनंद जी शर्मा )

                            गोरे मालिकों के जाते वक़्त मुल्क के लोग मालिक बन गये |

हर एक मालिक को नौकर की जरूरत होती ही है - वरना वो मालिक किस बात का ?

गोरे मालिकों के दो मक्कार झांसेबाज़ दलालों ने अपने मालिकों के जाने के पहले से ही मुल्क में खुद की और अपनी आने वाली कई पुश्तों की रोजी रोटी का इंतजाम शुरू कर दिया था |

गोरे मालिकों के जाते ही मुल्क के मालिकों को जब नौकर की दरकार पड़ी तो वे दो नौकर हाजिर थे |

मुल्क ने बिना समझे कि ये ही दोनों पुराने गोरे मालिकों के जी-हजूरिये थे - उन्हे नौकरी पर रख लिया |


हजारों बरसों से गैर-मुल्की लुटेरों से लूटे जाने के बावजूद मुल्क में कभी भी दौलत की कमी नहीं थी - सो नयी नयी आज़ादी मिलते ही मुल्क के बाशिंदे मौज-मस्ती और जश्नों में मशगूल हो गये और मुल्क को संभालने का काम नौकरों के जिम्मे कर दिया |

अंधा का चाहे - दो आँखें - बस फ़िर क्या था - मक्कार नौकरों को मुँह-माँगी मुराद मिल गयी |

नौकरों ने अपने ही जैसे बेईमान - मक्कार - जालसाज़ - धोखेबाज़ - फ़रेबी - दगाबाज़ - वतन-फ़रोश लोगों को चुन …

" क्या मैं - आज़ाद - हूँ ,क्या आप आज़ाद हैं "? ?

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" आज़ाद होने का सपना " लिए जीवन व्यतीत करने
वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !!

मेरे ज़हन में तो आज भी ये प्रश्न कोंध रहे हैं कि क्या

हम वास्तव में आज़ाद हैं ??

क्या हम किसी देश द्रोही को सज़ा दे सकते हैं ??

क्या हम किसी अच्छे आदमी को किसी पद पर

विराजमान कर सकते हैं ??

क्या हम किसी बुरे आदमी को उसके पद से हटा

सकते हैं ???



क्या हम अपने देश के संविधान को सम्पूर्ण रूप से

बदल सकते हैं ??

हमें क्यों अपने जीवन के 30 अमूल्य वर्ष बेकार

पढ़ाई में खराब करने पड़ते हैं ???

क्यों हमें फिर अगले 10 वर्ष कोई नौकरी पाने में

खराब करने पड़ते हैं ???

अगर 75o के लगभग कोई उचक्के हमारी संसद

में सांसद बनकर आ जाएँ तो क्या वो अपनी

मनमर्जी चलाएंगे ???

सभी प्रकार की व्यवस्थाओं में आधारभूत

बदलाव होना चाहिए !!

सभी राजनितिक दल ये जानते हुए भी क्यों नहीं

करना चाहते ???

क्या केवल तानाशाही ही एकमात्र इलाज बचा है ?

बताइये - बताइये - बताइये !!!!



                          चुप मत बैठिये !!

                                                                                                                                             …

"आप" नहीं जी हम हैं - "धोबी के कुत्ते , ना घर के -ना घाट के " - आम जनता !!

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भारत पर मुगल राज कर पाये क्योंकि हम कमज़ोर थे , हमने उनके साथ रहने लायक अपने आपको ढाल लिया कुछ कमज़ोर जातियाँ तो ऐसी मुस्लिम बनीं कि आज उन जैसा कोई कट्टर मुसलमान नहीं है, ऐसा उनका मानना है ! 
          फिर आये अंग्रेज़, हमने उनको ,उनके रहन-सहन,उनके रीती-रिवाज़ों और उनकी ज्यादतियों को भी झेला ! फिर कुछ भारतीय भी अँगरेज़ बन गए धर्म से भी और आचरण से भी ! ये बदलाव अमीर लोगों में आया क्योंकि गरीब तो उन्हें पसन्द ही नहीं थे ! 
        मुगलों का शासन चला गया और अँगरेज़ भी देश छोड़ गये लेकिन जाते-जाते वो हम भारतियों में ऐसे "कीटाणु" पैदा कर गये कि आज तक लगभग सभी भारतीय ,रहन-सहन ,खान-पान , बोल-चाल और धर्म-कर्म से अँगरेज़ बनना चाहता है क्योंकि हमारे दिमाग में ये पूरी तरह से बिठा दिया गया है कि अगर हम अँगरेज़ नहीं बने तो हमारा ये जीवन "व्यर्थ" है !

            बस इसी "चक्कर " में हम फंसकर "घनचक्कर" बनते आ रहे हैं ! क्योंकि अंग्रेज़ तो चले गये लेकिन उनके "बीज"यंही बचे रह गये ,जो उनके नौकरों की  तरह काम करके तरह-तरह के घोटाले करते हैं !ये वो ही करते हैं जो उन्ह…

"सुन्दर रचनाएँ पढ़िए नहीं देखिये हज़ूर " कार्टूनिस्टों की कलम से जो बनायीं गयीं हैं !!

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आपकी क्या राय है हज़ूर......???
ज़रा हमारे ब्लॉग पर आकर अपने अनमोल कॉमेंट्स तो लिखने का कष्ट कीजिये !!
" गूगल+,ब्लॉग , पेज और फेसबुक " के सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार ! !
नए बने मित्रों का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन स्वीकार करें !
जिन मित्रों का आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयाँ !!"इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस "
" फिफ्थ पिल्लर - कारप्शन किल्लर "
की तरफ से आप सब पाठक मित्रों को आज के दिन की
हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं
ये दिन आप सब के लिए भरपूर सफलताओं के अवसर लेकर आये , आपका जीवन सभी प्रकार की खुशियों से महक जाए " !!

जो अभी तलक मेरे मित्र नहीं बन पाये हैं , कृपया वो जल्दी से अपनी फ्रेंड-रिक्वेस्ट भेजें , क्योंकि मेरी आई डी तो ब्लाक रहती है ! आप सबका मेरे ब्लॉग "5th pillar corruption killer " व इसी नाम से चल रहे पेज , गूगल+ और मेरी फेसबुक वाल पर हार्दिक स्वागत है !!
आप सब जो मेरे और मेरे मित्रों द्वारा , सम - सामयिक विषयों पर लिखे लेख , टिप्प्णियों ,कार्टूनो और आकर्षक , ज्ञानवर्धक व लुभावने समाचार पढ़ते हो , उन पर अपने …

नेताओं हेतु काम के घण्टे तय होने चाहिए !!

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नेताओं हेतु कानूनी रूप से कोई आचार-संहिता नहीं बनी है क्यों?? यही एक ऐसा प्राणी है जो पिछले 65 वर्षों से अपनी मर्ज़ी से हर काम करता नज़र आ रहा है , सिर्फ नैतिकता का एकमात्र "हथौड़ा" है जो बड़ी मजबूरी में ही प्रयोग किया जाता है !!
                       जब ये प्राणी सत्ता में होता है तब तो ये और भी ज्यादा "मूडी" हो जाता है !! सरकारी अफसर और जनता इसके पीछे-पीछे अपनी "फाइलें" लेकर घूमते रहते हैं ,कि हज़ूर ज़रा "नज़रे-इनायत" तो कीजिये !!
             लेकिन नेता जी अपने चमचों में ही मस्त रहते हैं ! विधायक सांसदों के बस में हो तो ये विधान सभा और संसद के अधिवेशन करवाने ही बंद करदेवें !! 
         दिल्ली में "आप"की सरकार बन तो गयी है लेकिन काम करने की बजाये नोटंकी करने में ज्यादा रूचि दिखा रही है ! मोदी जी के कार्यकर्त्ता उन्हें जितने में जी जान लगा देंगे , लेकिन सरकार बनने के बाद कार्यकर्ताओं का ध्यान और आम जनता का ध्यान कैसे रख्खा जाएगा इस मुद्दे पर कोई भाजपाई नेता बोलता सुनायी नहीं पड़ता !! 
                पिछली बार सरकार तो अटल जी कि बनी थी लेकिन सरक…

"हज़ारों कॉंग्रेस्सियों का पेट पालने वाले गाँधी परिवार को भला ये कोंग्रेस्सी क्यों त्यागेंगे " ???

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कल एक चॅनेल पर कोंग्रेस के एक पुराने नेता फरमा रहे थे कि आप वंशवाद - वंशवाद चिल्ला रहे हो ! ये तो हम जानते हैं कि हम जैसे छोटे-बड़े नेताओं को उनके सत्ता में रहने से हमें कितना फायदा मिल रहा है ?? हमारी 3-4 पीढ़ियाँ पल गयीं और हमने इतना धन एकत्रित कर लिया है कि आगे वाली 3-4 पीढ़ियों तक हमें कोई चिन्ता नहीं है !! श्री श्री 108 श्री मणि शंकर अईयर जी ने ऐसे भाव प्रस्तुत किये !!
             इसी पार्टी के दुसरे प्रवक्ता श्री जनार्धन रेड्डी जी ने इसी बात को दुसरे लहज़े में कहा कि सब जानते हैं कि कोंग्रेस पार्टी में कौन प्रधान मंत्री पद का दावेदार था है और रहेगा !! इसलिए उनके नाम की पहले घोषणा करके फ़ालतू में क्यों हारने और हारने वाले नेता का ठप्पा उनके ऊपर लगवाया जाए ??? रिस्क नहीं लेना चाहिए !!

          कल की बैठक में एक और बात देखने को मिली , वो ये कि चाहे देश कि जनता को सरदार मनमोहन सिंह कितने भी कमज़ोर और नाकाम नज़र आयें लेकिन सोनिया जी उनके प्रति एक " विशेष प्रकार का भाव "अपने मन में रखती हैं जो दुसरे बड़े से बड़े कोंग्रेसी को प्राप्त नहीं हो सका है आज तक !! राहुल जी भी उनसे अलग रहते ह…

" राहुल जी के 9 हथियार "अब ज्यादा छिपाएंगे भ्रष्टाचार ??????"इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस " " फिफ्थ पिल्लर - कारप्शन किल्लर "

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कोंग्रेस भी अजीब मुसीबत से गुज़र रही है मित्रो !! सोनिया जी ने त्याग की मूर्ती बनकर प्रधानमंत्री का पद त्याग दिया था , प्रियंका जी विवाहित जीवन की मर्यादाओं का पालन करने में व्यस्त रहती हैं इसलिए प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहतीं , मनमोहन सिंह जी की वजह से जो किरकिरी पार्टी की हो रही है उसको देखते हुए और किसी कोंग्रेस्सी नेता पर विश्वास नहीं किया जा सकता ! ना जाने कब कोई शरीफ से दिखने वाले नेता में कब स्वर्गीय सीता-राम केसरी जी की आत्मा घुस जाए और वो संगठन के पद भी हथियाले और फिर उस पर जम जाए !!

              क्योंकि सोनिया जी भलीभांति जानती हैं कि सभी सारे बड़े कोंग्रेसी नेताओं के मन के अंदर नेहरू परिवार के प्रति निष्ठा कितनी " सच्ची " है ??? सब मौका ढूंढ रहे हैं !!कि कब देश या पार्टी की कमान उनके हाथ में आये और वो इस कोंग्रेस ( आई ) को कोई दूसरी कोंग्रेस बनायें !! क्योंकि इतिहास में जगह सिर्फ अपने मनमोहन जी को ही नहीं चाहिए और भी अपना नाम "सवर्ण अक्षरों " से लिखा देखना चाहते हैं !!
           पिछले 14 सालों से श्रीमान राहुल गांधी जी को पार्टी के सभी अधिवेशनों में " …

"इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस " " फिफ्थ पिल्लर - कारप्शन किल्लर "

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"इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस "
" फिफ्थ पिल्लर - कारप्शन किल्लर "
की तरफ से आप सब पाठक मित्रों को 
 " लोहड़ी व मकर-संक्रान्ति " पर्व पर 
  हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं 
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प्रसिद्ध पत्रकार डा० वेद प्रकाश वैदिक जी के लेख जिन्हें आप भी अवश्य पढ़ना चाहेंगे !!

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"हमारे पत्रकारिता व लेखन कार्य के गुरु - डॉक्टर वेद प्रकाश "वैदिक" जी के मशहूर लेख" आपके लिए साभार प्रस्तुत हैं !!वे सटीक चोट करने में बड़े ही माहिर हैं ! आप भी देखिये -
   क्या राहुल का यही सोना है ???
मुजफ्फरनगर में जाटो और मुसलमानों के बीच जो दंगे हुए, वे तो बेहद दुखद और दुर्भाग्यजनक थे ही, अब जो नए तथ्य सामने आ रहे हैं, वे भारत के घावों पर तेजाब छिड़कने-जैसा है। अब पता चला है कि हरयाणा के दो इमामों को गिरफ्तार किया गया है। मेवात में रहनेवाले ये इमाम लश्करे-तोयबा के सदस्य हैं और ये शरणार्थी शिविरों में जाकर उन्हें भड़का रहे थे और उनसे दिल्ली में आतंकवाद फैलाने की तैयारी करवा रहे थे। इन इमामों का संबंध लश्कर के आतंकवादी जावेदी बलूची के साथ बताया गया है।
दो अन्य इमामों की तलाश जारी है, जो मुसलमान शरणार्थियों को पाकिस्तानी आतंकवादी गुटों का रंगरुट बनाने पर तुले हुए हैं। ये इमाम पुलिस के डर के मारे भूमिगत हो गए हैं लेकिन इनकी काली करतूतों पर से कुछ शरणार्थियों ने नकाब उठा दिया है। इन देशभक्त मुसलमानों ने सिर्फ उन इमामों द्वारा दिए गए लालच को ठुकराया ही नहीं, उनकी राष्ट्…

प्रधानमंत्री का अंतिम शोक संगीत -

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प्रधानमंत्री ने पत्रकार परिषद क्या की, उसे शोक-संगीत सभा कहा जाए तो ज्यादा ठीक होगा। विदा की वेला में जो रुदन, क्रंदन, हताशा, निराशा, उदासी, वेदना आदि भाव होते हैं, वे सब मनमोहन सिंह ने प्रकट कर दिए। मैंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर अब तक के सारे प्रधानमंत्रियों की पत्रकार परिषदों में भाग लिया है, लेकिन मनमोहन सिंह की पत्रकार परिषद मुझे सबसे अनूठी लगी। ऐसा लगा कि जैसे हम किसी शोक-सभा में बैठे हैं और वहां किसी अनासक्त और निर्विकार संत के अंतरंग उद्गारों का श्रवण कर रहे हैं।

यदि मनमोहन सचमुच नेता होते तो इस पत्रकार परिषद में कई फुलझडिय़ां चमकतीं, कई पटाखे फूटते और दंगल का दृश्य उपस्थित हो जाता, लेकिन मनमोहन तो ऐसे सधे हुए संत नौकरशाह हैं कि उन्होंने बर्फ में जमे हुए-से सब जवाब दे डाले। भारत के युवा पत्रकारों को भी सलाम कि उन्होंने अपना धर्म निभाया। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर 10 साल से जमे व्यक्ति का उन्होंने पूरा सम्मान किया, लेकिन खरे-खरे सवाल पूछने में जरा भी कोताही नहीं की।

उन्होंने अपना प्रारंभिक वक्तव्य, जो वे लिखकर लाए थे, पढ़ा! वह भी अंग्रेजी में! उनसे कोई पूछे कि यह द…