Monday, September 23, 2013

" desh ki sabhi sanvidhanik santhaaon ke " sencer " fail !! " teri maa ki"..!! " teri bahanko"....!! ke geet bajme lage ..!!!! kyon ??? aa gayaa naa mazaa ????

desh ke sabhi " senstive " mitron ko mera saadar prnaam !! aaj kaa main ye lekh " roman english main likh raha hoon . kyonki hamare bachche ye naa padh paayen . is bhashaa ko foji bhaaiyon ki english bhi kahaa jaataa hai . kyaa kahaa , bachche is bhashaa ko bhi padhna jaante hain !! chalo koi baat nahi . unko bhi jaanne kaa adhikaar hai , ki bharat sarkaar ke sabhi sanvedhanik sansthaan apni yogyta kho chuke hain . unka ye haal kisi or ne nahi balki unhi ke mantriyon ne hi kiyaa hai . taaki mantriyon ke ghaple pakde hi naa jaa saken .
                       kal t.v. par ek film kaa promo dikhaya jaa rahaa thaa jisme ek geet ki pahi pankti sun kar hi main aise chonkaa ki poocho mat ji , hero ji kah rahe the " teri maa ki ......, teri bahan ko .......!! shaam hote hote ye maamla sencer bord ki adhyaksha talak panhuch gyaa . usne apne haath khade kar diye or bolin ki main kyaa karun akeli bechaari baaki sencer-board ke sabhi sdsya jab use paas kar de to !! wo saare anpadh - ganwaar hain , maine to unki shikayat bhi ki thi lekin koi dhyaan hi nahi deta .....!!!


                            srimaan manish tiwadi ji sambandhit vibhag ke mantri ji hain . wo bole ki manoranjan ki qwality badhayi jaani chaahiye . ham ise shri maan n.d. tiwari ji ke str talak panhuchaa kar hi dam lenge !!
                             isi tarah se desh ki shiksha vyavastha fail , videsh niti fail , krishi niti fail , raksha yozna fail ejensiyaan fail , or to or hamare prdhaan mantri ji kahte hain ki sarkaar thik se kaam kare !!!!!!! ab aap hi bataaiye ....kiski sarkaar hai ??? koun thik tarah se chalayega ise ????or koun kahega ki sahi kaam karo ???? ye to hadd hi ho gayi naa !!!!!
             boliye U.P.A. SARKAAR KAA ......RAAM NAAM SATYA HAI ...........P.M. ,,,,,MAST HAI ........!!!!! VIPAKSH ........HAST HAI !!!!!!1
                          
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प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं !!HAPPY BIRTH DAY TO YOU !! GOOD WISHES AND GOOD - LUCK !! प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
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आपका प्रिय मित्र ,
पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !
जिला-श्री गंगानगर।

Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

Saturday, September 21, 2013

" इक तारा बोले , तुन-तुन , क्या कहे ये हमसे सुन- सुन "..........????

" तुनक-तुनक " कर बोलने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक प्रणाम !!
                       हमारे भारत में कई तरह की सभ्यताएँ बसती हैं !! सब अपने आपको श्रेष्ठ बताते हैं !! सबको अपना इतिहास , खान-पान , रहन-सहन और जीवन का ढंग इतना बढ़िया लगता है की पूछो मत जी , सब अपने मुंह मियाँ-मिठ्ठु बनते नहीं थकते , और साथ-साथ ये भी चाहते हैं की दुसरे भी उन जैसे ही बन जाएँ !!
                              यही हाल आजकल सभी राजनितिक दलों का भी हो गया है !! सब अपनी प्रशंसा करने में ही लगे हुए हैं !! जनता से कोई नहीं पूछ रहा की उसे कौन " भा " रहा है !! उसे तो बस एक हाथ से  आश्वासनों की थालियाँ परोसी जा रही हैं !! तो दुसरे हाथ से मतदाता के हाथ से " विकल्प " छीने जा रहे हैं !!
                               ज़माना कहता था कि भगवान् की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता , लेकिन आज लगता है जैसे " नेताओं " की मर्ज़ी के बिना कोई समाजसेवी भी नहीं बन सकता !! " नक्रात्मकता " ज़हन में घर करती जा रही है !! सकारात्मकता आ ही नहीं पा रही इस जीवन में , लाख कोशिशों के बावजूद आँखों के सामने " तारे घुमते " दिखाई से पड़ते हैं !!
                   जो भी सज्जन पुरुष-महिला इस समाज को सुधरने हेतु अपने घर से निकलती या निकलता है ,या तो उसे डरा धमका कर बैठा दिया जाता है नहीं तो कत्ल कर दिया जाता है !! आदमी तो चोदिये जनाब देश की सुधारक संस्थाओं तक को नहीं बख्शा जा रहा , उन्हें भी कहा जा रहा है की नेताओं से डरना सीखो !!
                     कब तलक चलेगा ये सब !!??? या यूं कंहें कि कब से चलता आ रहा है ये सब ??? जब से सृष्टी की रचना हुई है तभी से ये धक्केशाही चलती आ रही है जी !!  आइये हमारे ग्रंथों पर अपनी सरसरी नज़र दौडाते हैं ..........:-
                           शंकर जी के ससुर अपने दामाद जी को इसलिए पसंद नहीं करते थे की वो जंगलों में रहते थे , उन जैसे महलों में रहने वाले नहीं थे !!! दक्ष प्रजापति ने लाख कोशिशें की उन्हें अपने जैसा बनाने की !! ह्रिन्याक्ष ने प्रहलाद को अपने जैसा बनाना चाहा तो रावन ने सीता जी को अपनी सभ्यता अनुसार ढालना चाहा !!!! यानी अमीर का घमण्ड गरीब पर हमेशां से हावी होने की कोशिश में रहता है !!


                         भगवान् जी को देखलो !! भक्तों हेतु तो वो कड़ी तपस्या के बाद या कड़ी परीक्षा के बाद आये हैं , वन्ही राक्षसों हेतु पापियों हेतु जल्दी प्रकट हुए हैं !!
                   तो भैया जी और बहनों जी , मुझे तो मनोज कुमार जी की फिल्म " यादगार " का एक गीत याद आ रहा है , जिसमे वो कहते हैं कि " इक तारा बोले , क्या कहे ये तुमसे , बात है लम्बी - मतलब गोल , खोल ना दे ये सब की पोल , तो फिर उसके बाद...!!!!!
                            प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं !!                              प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
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Thursday, September 19, 2013

" मीडिया बताये , दोषी कौन " !! क्रिया - प्रतिक्रया या सरकार ???

सभी बुद्धिजीवियों को मेरा सादर नमन श्रद्धा के साथ !!
                   श्राद्ध - पक्ष नजदीक आ रहे हैं इसलिए श्रद्धा के साथ अभिवादन किया है , कृपया अन्यथा ही लेवें !! क्योंकि आजकल न्याय टीवी चेनलों पर होने वाली बहस में होता है !! सर्टिफिकेट भी सब प्रकार के वंहा बंटते हैं !! जब सब कुछ उलट-पुलट हो गया है तो अभिवादन में भी गड़बड़ी होना स्वभाविक है ना !!
                     आजतक चेनेल पर मेरे मित्र दीपक शर्मा जी और प्रसुन्न कुमार वाजपेयी जी ने उत्तर प्रदेश के दंगों पर एक स्टिंग ओपरेशन किया पार्ट वन और पार्ट टू !! जिसे देखकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आना स्वभाविक था , सो आयीं भी !! लेकिन दीपक जी को भारी दुःख पंहुचा कि लोग उनकी बातों पर विश्वास क्यों नहीं कर पा रहे , जबकि उन्होंने इतनी मेहनत से ये काम किया !! इस हेतु उन्होंने फेसबुक पर ये पोस्ट डाली और सब मित्रों से पूछा की आपके क्या विचार हैं !!
                               तो मित्रो मेरा तो ये मानना है की टीवी चेनलों ने कुछ ज्यादा ही देश का भार अपने ऊपर उठा रख्खा है !! या उन्हें कोई गधे की तरह प्रयोग  कर रहा है !! चाहे वो उनका चेनेल मालिक हो या फिर भारत की सरकार !! प्रदेश की सरकारों को तो वो कुछ समझते नहीं क्योंकि सारे प्रशस्ति-पत्र और पुरुस्कार केंद्र सरकार ही देती है या उसके इशारे पर ही कोई दूसरा ये काम करता है !! किसी भी आदमी या संस्था की इज्ज़त एक दिन में नहीं बनती , सेंकडों साल लग जाते हैं लेकि मिट्टी-पलीत एक घंटे में हो जाती है !! मैंने तो उनकी पोस्ट पर कोमेन्ट लिखा कि " अगर आपको आपके चेनेल वाले इतनी आजादी से काम करने की इजाजत दे देते हैं तो आप और आपके मालिक बधाई के पात्र हैं !! 


                     अब सवाल ये उठता है ये कि " मुम्बई , आसाम ,84 के दिल्ली दंगों पर स्टिंग क्यों नहीं बनते ?? क्या कारण हैं ??? और जन्हाँ बने भी तो वंहा केवल हिन्दू ही मरते हैं क्या ??? मुसलमान और इसाई नहीं मरते क्या ?? उनका ज़िक्र क्यों नहीं किया जाता ??? मस्जिदों का धन हिन्दुओं की योजनाओं में क्यों लगाया जा रहा है !! ?? तरह-तरह के आरक्षण देकर हिन्दुओं को क्यों अतिरिक्त फायदा दिया जा रहा है ???? क्या कहा मैं गलत लिख रहा हूँ !! हाँ मैं जान बूझ कर उलटा लिख रहा हूँ !! वो इसलिए कि इन तथाकथित सेकुलर नेताओं और पत्रकारों को  समझ में आता है !! न्यायालय किसी को दोषी ठहराने में दसियों साल लगाते हैं तो ये लोग एक इस्तगासे को ही अंतिम मानते हुए फैसले सूना देते हैं क्यों ?? शायद इसीलिए लोग भी इन्हें तुरंत बिकाऊ माल घोषित कर देते हैं !!
                      कम से कम इतना तो अंतर करो कि " क्रिया " दोषी होती है या फिर " प्रतिक्रया " !! या फिर दोनों !! सरकार तो दोनों पर दोषी होती है !! क्रिया होने देना भी सरकार का दोष है और प्रतिक्रया होने देना भी सरकार का ही दोष होता है !! क्योंकि मरते तो दोनों घटनाओं में " बेचारे - निर्दोष " लोग ही हैं ना !! ये नेता लोग तो साफ़ बाख ही जाते हैं !!

                     पत्रकारों से सम्बन्धित सभी संस्थाओं से मेरा अनुरोध है की वो समाचार बनाने और वाचन करने वाले लोगों हेतु विस्तृत आचार-सन्हिता बनाए !! अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब लोग पत्रकारों पर भी विश्वान करना छोड़ देंगे !!

                          सच तो जैसे कोई बोलना ही नहीं चाहता !! पता नहीं क्यों डरने लगा है इन्सान इतना ??? जिसने पहले षड्यंत्र रचकर सभाएं की हैं और कत्लेआम हेतु भड़काया है वो भी दोषी हैं और जिन्होंने बचाव हेतु दूरे समुदाय के कत्लेआम को जायज़ ठहराया है वो भी उतना ही दोषी है !! दोषी वो भी हैं जो केवल एक समुदाय से मिलकर फोटो खिंचाकर ,मुआवजा घोषित करके अकेले-अकेले वापिस आ जाते हैं बाकी के राजनितिक दलों के नेताओं को साथ लेकर नहीं जाते !! दुसरे समुदाय हेतु वो " दिलासा " के दो शब्द भी नहीं बोलते !! 

                       अंत में मैं तो यही कन्हुंगा कि - धर्म की जय हो !! अधर्म का नाश हो !! प्राणियों में सद्भावना हो !! विश्व का कल्याण हो !!!! हर - हर - हर - महादेव !!!!!!!!!
                       
 GOOD WISHES AND GOOD - LUCK !! 
                                                                                           प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
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Tuesday, September 17, 2013

मेरे नए प्रिय मित्र , अशोक मिश्र जी का लिखा एक बढ़िया राजनीती पर व्यंग , आप भी पढ़िए !!


                                                 राजनीतिक पलटास
  -अशोक मिश्र

पिछले कुछ महीने से काफी ऊहापोह में था। आखिर एक दिन दिल को कड़ा करके दिल्ली के आलीशान होटल में राजनीतिक पलटासन शिविर का आयोजन कर ही डाला। इसके लिए सबसे पहले कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा और आप से लेकर ‘बाप’ तक के सुप्रीमो को पत्र लिखकर उनसे अपने नौसिखिया नेताओं को शिविर में भेजने का आग्रह किया। सबने इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए अपने भावी नेताओं को शिविर में भेजने का आश्वासन दिया। कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के अध्यक्षों ने शिविर की सफलता की कामना करते हुए संदेश भी भेजा। शिविर में भाग लेने की फीस बस मामूली रखी गई थी, पच्चीस हजार रुपये प्रति व्यक्ति। शिविर में लगभग दस हजार नवांकुर नेताओं और नेत्रियों ने भाग लिया। राजनीतिक पलटासन सिखाने आए विश्व प्रसिद्ध पाकेटमार उस्ताद गुनाहगार। शिविर का उद्घाटन करते हुए उस्ताद गुनाहगार ने कहा, ‘आप लोग जिस पार्टी के कार्यकर्ता हैं, नेता हैं, वे सभी पार्टियां चोर हैं, अपनी मां की बहन के बेटे के भाई हैं। अगर साफ-साफ शब्दों में कहूं, तो सारे के सारे कसाई हैं। देश की सभी पार्टियां उचक्की हैं, अमीरों की तरफदार, विदेशी कंपनियों की वफादार और देश की जनता की हकमार हैं।’

उस्ताद गुनाहगार के इतना कहते ही वहां हंगामा खड़ा हो गया। कुछ नए नेता ज्यादा ही भाव खाने लगे। उन्होंने कुर्सियां उठाकर पटकनी शुरू की। उस्ताद गुनाहगार चुपचाप खड़े तोड़फोड़ होता देखते रहे। फिर बोले, ‘आप लोग यह तोड़फोड़ क्यों कर रहे हैं?’ एक युवा नेता ने अपने कुर्ते की बांह समेटते हुए कहा, ‘आप मुझे और मेरी पार्टी को चोट्टा बताएंगे और हम सुनते रहेंगे? ऐसा नहीं होगा। अभी आपने हमारी पार्टी को गाली दी है और गाली का जवाब हम गाली से ही देने के आदी हैं। चूंकि आपसे हम कुछ सीखने आए हैं, ऐसे में आप हमारे गुरु के समान हैं। हमारी सभ्यता-संस्कृति इस बात की इजाजत नहीं देती कि हम आप पर हाथ उठाएं। इसलिए हम अपने गुस्से का इजहार कुर्सियों को तोड़कर कर रहे हैं।’ गुनाहगार मुस्कुराए और बोले, ‘मैंने आपकी पार्टियों को चोट्टा कब कहा?’ खूबसूरत-सी नेत्री ने अपनी आंखें चमकाते हुए कहा, ‘अभी थोड़ी देर पहले कहा। हम लोगों के सामने कहा। आपने देश की सभी पार्टियों को चोर कहा, चोर-चोर मौसेरे भाई कहा।’ उस्ताद गुनाहगार मुस्कुरा रहे थे और मेरी जान निकली जा रही थी।
 गुनाहगार के शानदार और जोरदार उद्घाटन भाषण के चलते अब तक पैंतालीस कुर्सियां शहीद हो चुकी थीं, कुछ कुर्सियां और मेजें घायलावस्था में पड़ी कराह रही थीं। मैंने मन ही मन हिसाब लगाया, पचास हजार रुपये का चूना।
अपने मुनाफे में कमी आने की आशंका के चलते गमगीन हो गया। गुनाहगार शांत भाव से बोले, ‘मैंने ऐसा कब कहा? मैंने तो आपकी पार्टियों को इस देश का भाग्य विधाता कहा, उन्हें भारत जैसे देश के लिए अनिवार्य बताया है। मैंने इस देश की किसी भी पार्टी की बुराई नहीं की है।’ गुनाहगार की बात सुनकर मैं अवाक रह गया। कितनी खूबसूरती से उस्ताद गुनाहगार पलटी मार गए थे। कुछ युवाओं ने अपनी बात कहने के लिए मुंह खोला ही था कि उस्ताद बोले, ‘देखो..यही है पलटासन। भविष्य में तुम में से कोई नेता बनेगा, कोई मंत्री, सांसद, विधायक होगा। अगर कभी भूल से कोई गलत बात निकल जाए और गलती समझ में आ जाए, तो तुरंत पलटी मार जाओ।

                                                                   तुरंत कहो, मैंने ऐसा कब कहा? अगर कोई सवाल पूछने आए, तो उसी पर गिर पड़ो। सारा आरोप उसी पर मढ़कर चैन की नींद सो जाओ। लोग बतकूचन करते हैं, करते रहें। तुम्हारा क्या बिगाड़ लेंगे?’ ‘मान लो, तुम्हारी पार्टी की सरकार किसी सूबे में है। अगर सूबे की मुख्यमंत्री, मंत्री या पार्टी के पदाधिकारी के मुंह से कोई गलत बात निकल भी जाए, तो सार्वजनिक मंच पर कभी उसकी निंदा मत करो। उसे जायज ठहराने के जितने भी तर्क तुम्हारी तरकश में हों, उनका इस्तेमाल करो। यदि इस पर भी बात न बने, तो आज का सबसे अजेय ब्रह्मास्त्र ‘फलां की बात को गलत संदर्भ में लिया गया’ या ‘आदरणीय मंत्री जी की बात को मीडिया में तोड़ मरोड़कर पेश किया गया’ कहकर ढिठाई से आगे बढ़ जाओ। तुम्हारी सबसे पहली प्राथमिकता विरोधी का मुंह बंद करने की होनी चाहिए। इसके लिए तुम्हें अगर एक ही दिन पहले दिए गए बयान से पलटना भी पड़े, तो एक भी क्षण नहीं लगना चाहिए। तुरंत कहो, मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। अगर मीडिया वाले पिछले बयान की क्लिपिंग दिखाएं, तो तुरंत बयान जारी करो, यह क्लिपिंग फेक (फर्जी) है, इसकी सच्चाई की जांच सीबीआई से करानी चाहिए। अच्छा हो कि तुम खुद आगे बढ़कर प्रदेश या
कें द्र सरकार से सीबीआई जांच की मांग करो।’ उस्ताद गुनाहगार अपने राजनीतिक नवसाक्षरों को पलटासन के गुर सिखा रहे थे। उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहा, ‘पहले सत्र में मुझे आपको सिर्फ इतना ही बताना था। आप लोग खाली समय में पलटासन का अभ्यास करें। और हां..जिसने भी इन कुर्सियों को शहीद किया है, वह पांच-पांच हजार रुपये प्रति कुर्सी के हिसाब से लूटानंद मिश्र के पास जमा करवा दे। नहीं तो, टूटी कुर्सी-मेजों का खर्च आपकी पार्टियों से ब्याज सहित वसूला जाएगा।’ इतना कहकर उन्होंने मेरी ओर देखा और अपने विश्राम कक्ष में चले गए।

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" अबे , कैसी सरकार चला रहे हो दुष्टो !! न हम ब्याज़ खा पा रहें हैं और ना ही प्याज़ !! कितने दिन और बचें हैं तुम्हारे , ससुर के नातियो !! ? ? ?

आज मैं बहुत गुस्से में हूँ मित्रो !! मुझे पकड़ लो आप ! नहीं तो आज कोई सरकारी आदमी मेरे गुस्से की भेंट चढ़ जाएगा , कहे देता हूँ मैं !! मैं एक शांत स्वभाव का अदना सा लेखक था , ये नेता लोग समाजसेवा का झांसा देकर मुझे राजनीती में ले आये ! फिर जो मुझे " राजनीती के करतब " दिखाए हैं स्थानीय, प्रादेशिक और केंद्रीय नेताओं ने कि पूछिए मत !! कभी चोर राजनीती में हमसे ऊपर आ जाता है , कभी डाकू और कभी कपटी लोग सारे पद पा जाते हैं !! हम ससुरे अपने नंबर आने की प्रतीक्षा ही कर रहे हैं पिछले 35 वर्षों से !! हद्द ये हो गयी कि वो मज़ाक भी हमारा ही उड़ाते नज़र आते हैं !!
                         ऊपर से हमारी ये प्रादेशिक और केंद्रीय सरकारें इनको चलाना नहीं आता एक डिपार्टमेंट का दफ्तर और बने फिरते हैं मंत्री.......!! अर्थशास्त्र का डाक्टर अर्थ नीति में फेल , कृषि मन्त्री , फसलों के भाव तक स्थिर रखने में जब फेल हो रहा हो तो विदेशमंत्री , गृह मंत्री , वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री कैसे पास हो सकते हैं ????? ऊपर से ससुरे ढोल पीट - पीट कर अपने बखान और कर रहे हैं !! 


                        वो हमारी शीला दादी तो एक कार्यक्रम में अपना नृत्य भी दिखा चुकी हैं !! भारतीय जनता पार्टी की सुष्माजी जब देश भक्ति के गीतों पर नाचीं थीं टी इन कोंग्रेसियों ने निंदा करी थी और स्वयं खुद अपनी जवानी दिखा रहे हैं ये कोंग्रेस्सी नेता !! चार दिन प्याज बेचकर वो केजरीवाल भी थक गया और शीलस जी भी , मैं पूछता हूँ की प्याज अपने सामान्य भाव यानी दस रूपये किलो हो गये थे क्या ????/
                            अब भी वक्त है !!!!!१ नेताओ सुधर जाओ !! ससुर के नातियो !!! नहीं तो जनता इतने जूते मारेगी कि गिने नहीं जा सकेंगे !! समझे के नाही !! पिछवाडा इतना लाल हो जायेगा कि " फेयर एंड लवली " वाले उसका उपयोग करने लगेंगे , अपने विज्ञापनों में !
                     75/_ रूपये किलो , कोई प्याज का रेट होता है क्या कभी !! भगवान् इनको नरक में भी नहीं बुलाता यारो !!
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पीताम्बर दत्त शर्मा,
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Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)
                              

Monday, September 16, 2013

" अंडर - ग्राउंड " मिडिया ...........!!!!!

देश का मीडिया अब भट़ट-भडन्त (चारणगीरी) की दशा से काफी-कुछ उबर चुका है और जनता को जगाने का अच्छा कार्य कर रहा है, किन्तु विडंबना यह है कि प्रिंट मीडिया और इलेक्ट़्रानिक मीडिया दोनो में पूंजीपति वर्ग हावी है, जिससे क्रान्तिकारी लेख या समाचार दबाकर, उन बातों को प्रमुखता से प्रसारित किया जाता है, जिनमें उनका स्वयं का हित सन्निहित होता है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है, किन्तु उसका कितना भाग बिकाउ हो चुका है, यह किसी से छिपा नहीं है। एक पेज का समाचार क्या देते हैं, डेढ पेज का विज्ञापन लगा देते हैं। खबरे उनकी ज्यादा छापते हैं, जिनसे भारी मात्रा में विज्ञापन मिलते हैं। यही हाल टी० वी० चैनेलों में भी है, दस मिनट कोई समाचार या मूवी देते हैं, तो बदले में उतना ही समय विज्ञापन में ले लेते हैं। पेड न्यूज और ब्लैकमेलिंग की भारी समस्या मीडिया में बहुत पहले से बनी हुई है। ऐसे में मीडिया से कोई बडी उम्मीद नहीं की जा सकती है और न ही जनता कभी इसके भरोसे कोई आन्दोलन खडा कर पाई है। यह वही मीडिया है जिसने गैलीलियो द्वारा दूरबीन बनाकर प्रमाणिक रूप से प्रिथ्वी को गोल और सूर्य का चक्कर लगाने वाली बताने के बावजूद भी सैकडो साल तक लोगों को गुमराह किया था। इसी मीडिया ने वायुयान के आविष्कार का प्रथम चरण पूरा करने के बावजूद भी राइट ब्रदर्श की उपेक्षा की थी, किन्तु जब कोई आतंकवादी अपने कुकर्म के लिये 11 साल बाद फांसी पर चढाया जाता है तो उसके नाम पर तीन-तीन पन्ने ऐसे रंग दिये जाते हैं जैसे कि किसी महापुरूष का इन्तकाल हुआ हो ।
जो मीडिया विज्ञापन के नाम पर अंधविश्वास, टोना-टोटका, पूंजीपति और माफियाओं को महिमामंडित करता आया हो, वह भला पाखण्ड से लडना कैसे सिखाएगा? भला हो सोसल मीडिया का, जिसकी बढती दखलंदाजी से आम जनता की आवाज निर्भयतापूर्वक मुखर हुई है। अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं की अपेक्षा आज फेसबुक व ट़वीटर आदि पर ज्यादा खुले, निर्भीक, पक्षपात रहित और जानकारीपूर्ण विचार व द्रिश्य देखने को मिल रहे हैं।

वही मीडिया श्रेष्ठ कहा जायेगा, जो सत्ता और समाज का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करता हो। वह शासन के अच्छे कार्यों की प्रशंसा कम, बुरे कार्यों की निन्दा ज्यादा करता हो। सीमित और संतुलित प्रशंसा व्यक्ति को प्रोत्साहित करती है, जबकि अधिक और असंतुलित प्रशंसा पतन का मार्ग दिखाती है। प्रशंसा गहरे घाव करती है और आलोचना हममे निखार लाती है। अब तक का मानवीय अनुभव यही बताता है कि आत्मालोचन ही सफलता की कुंजी है और अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन ही मुक्ति का मार्ग है।
आज देश के अधिकांश वरिष्ठ पत्रकार किसी न किसी राजनीतिक दल से सम्बद्ध हो गये हैं, जिसके कारण वे तटस्थ पत्रकारिता नहीं कर पा रहे हैं, अगर वे त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के विरूद्ध या अपनी पार्टी के विरूद्ध तीखी आलोचना करने की हिम्मत दिखाएंगे तो पार्टी उन्हे बाहर का रास्ता दिखा देगी। पीत पत्रकारिता ने इस देश की दशा खराब करवाने में महती भूमिका अदा की है।
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Saturday, September 14, 2013

" अब भाजपा के सभी नेता , " कार्यकर्ता " बन कर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करें , अन्यथा पार्टी फेल हो जायेगी " .......! ! !

मेरे प्रिय भाजपा और संघ के 56 संगठनों के मित्रो , सादर नमस्कार !! कृपया सहर्ष स्वीकारें !!
                         भारत की जनता सभी पार्टियों के दोगलेपन , भ्रष्टाचार , तुष्टिकरण की नीतियों , भारत की गिरती साख और लुञ्ज-पुञ्ज योजनाओं और नीतियों से तंग आ चुकी थी ! पहले श्री जय प्रकाश जी के समाजवाद , फिर अटल-आड्वानी जी के हिंदुत्व प्रेम पर विश्वास करके धोखा खा चुकी थी ! आज तो वो निराशा की स्थिति को महसूस कर रही थी क्योंकि अन्ना , केजरीवाल और रामदेव जी के आन्दोलन पापियों के आगे फेल हो चुके थे !! भारत की जनता को एक कठोर , दृढ निश्चयी , देश-भक्त और विवेकवान नेता चाहिए था , जो उसे नरेंद्र मोदी में दिखाई दिया , संघ और भाजपा ने जनता की इस मांग को समझा और जाना , तो संघ के प्रयास से भाजपा ने उन्हें अपना प्रधानमंत्री घोषित कर दिया !!
                        अब भाजपा के सभी राष्ट्रीय , प्रादेशिक , प्रत्येक जिलों और मंडल स्तर के नेताओं से मेरी करबद्ध प्रार्थना है की वो चुनाव तक नेता से " कार्यकर्ता " बन जाएँ !! सभी स्वयं सेवक और कार्यकर्ता अपनी वाणी और आचरण को मधुर बना लें !
जनता के साथ एक बार फिर से जुड़ने का प्रयास करें !! क्यों की आधुनिकता ने हमें हर काम पैसे के बल पर करवाना सिखा दिया है !! ऐसा लगता है की हमें अब कनिष्ठ कार्यकर्ताओं की कोई आवश्यकता नहीं है !! लेकिन मित्रो ये सच्चाई नहीं है !! बड़े नेताओं को चाहिए कि जन्हा तलक सम्भव हो सके कार्यकर्ताओं से पूछ कर ही अपने प्रत्याशी घोषित करें !! कार्यकर्त्ता जिसका गुणगान करें उसी को महत्त्व दिया जाए नाकि नेता अपने " अनुकर्णीय " को पार्टी का प्रत्याशी बनाये !! ये सब काम समय पर ही हो जाने चाहियें अन्यथा प्रत्याशियों को बाद में संपर्क करने में दिक्कत होगी !! जन्हा पर विधान्सभाचुनाव हैं वंहा के सांसदों की टिकटें भी अभी पक्की कर देनी चाहियें , ताकि वो भी अभी से सबके संपर्क में आ सके , और जनता की समस्याओं को समझ सके !!
                             नए कार्यकर्ताओं को हमारी रीती-नीतियों के बारे में विस्तार से बताया जाना चाहिए !! वन्ही पुराने छिपे हुए कार्यकर्ताओं को भी देश हित का वास्ता देकर फिर से बाहर निकाला जाए !! सारे कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता को भी ये विश्वास दिलाया जाना चाहिए कि " अबकि बार अगर भाजपा की सरकार बन गयी तो कुछ फैसले , सत्ता सँभालने के पहले दिन से ही लेने शुरू कर दिए जायेंगे " !! जिनसे देश को एक नयी राह और दिशा मिलेगी !! शिक्षा निति , विदेश निति , आर्थिक निति , क़ानून व्यवस्था , और सुरक्षा एजेन्सियों के मुद्दों पर विशेष बदलाव तुरंत किये जायेंगे !! सरकारी खर्चे कम किये जायेंगे !! विदेशी व्यपार और समाचार एजेंसियों पर विशेष नज़र रख्खी जाएगी !! इस तरह की घोषणाएं हमारे चुनाव घोषणा - पत्र में करीं जानी चाहियें !!


                         और अगर कंही सबके अथक प्रयासों के बावजूद भाजपा की सरकार नहीं बनी , तो हम विपक्ष में बैठेंगे , गठबन्धन की सरकार हिन्दू हितों को ताक पर रखकर कभी नहीं बनायेंगे ! अब कोई मुद्दा छोड़ा नहीं जाएगा !! ऐसे सन्देश जनता ता पंहुचेंगे तो निश्चित रूप से हमारी सरकार बनेगी !! सारा विश्व देखेगा की हम साम्प्रदायिक नहीं बल्कि एक परिवार की तरह रहनेवाले लोग हैं !! विश्व ने हमसे आचरण सीखे हैं !! सभी धर्मों को मानने वालों और सभी अल्पसंख्यकों को एक समान अधिकार मिलेंगे और एक समान क़ानून बनेगा !! सार भारत एक होगा !! सभी प्रदेशों हेतु एक जैसी व्यवस्था होगी !!
                         मैं अभी से अपने नेताओं को इस लेख के माध्यम से चेता देना चाहता हूँ कि अगर " ढुलमुल " नीतियाँ अपनायीं गयीं तो भाजपा हमेशां के लिए खारिज हो जायेगी !! होशियार रहें !! अब हम पार्टी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ गयीं हैं और जनता की अपेक्षाएं भी बहुत बड़ी हैं हमसे !! इसलिए सत्ता मिलने पर जैसे AK47 से गोलियां निकलती हैं वैसे ही मोदी जी के निर्णय आने चाहियें !! जिसने भी ऐसा करने से उन्हें रोकने की कोशिश की वो जनता के " कोप " का भागी बनेगा !! बता देता हूँ !! बाद में मत बोलना कि बताया नहीं था !! जय श्री राम !! जय हिन्द !! वन्दे-मातरम् !! सब मिलकर कहें !! धर्म की जय हो !! अधर्म का नाश हो !! प्राणियों में सद्भावना हो !! हर - हर - हर - महादेव !!!!! इतना शेयर करो की हर भारतीय के पास पंहुच जाए !!
  


                                                                                                                              BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
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Thursday, September 12, 2013

" 40 वर्षों से प्रताड़ित " हिन्दु " को आज मिलेगा मोदी का सहारा , अल्पसंख्यक भी पाएंगे न्याय व अपने मौलिक अधिकार " ! ! !

मेरे प्रिय मित्रो,सौमित्रो, कुमित्रो और अमित्रो !! सादर नमस्कार !! कृपया स्वीकार करें !!
                   आज सायं 5 बजे भाजपा संसदीय बोर्ड बहुमत से या सर्व सहमती से माननीय नरेन्द्र मोदी जी को अपना भावी प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर देगी !!
                   कांग्रेस की तरह नहीं कि संसदीय दल अपने समस्त अधिकार " हाई-कमाण्ड " को सौंप देगी ! और फिर सोनिया जी निर्धारित करेंगी कि कौन बढ़िया " कठपुतली " साबित होगा !! बाकी राजनितिक दलों के तो स्वयं-भू नेता हैं ही !!
                  जब देश आज़ाद हुआ तो सभी अल्प-संख्यकों , राजाओं और महा राजाओं से पूछा गया कि बतैयी आपकी क्या राय है ?? तो मुसलामानों ने कहा कि हमें " पाकिस्तान " चाहिए !!दुसरे सब भारत में शामिल हो गये !! काश्मीर का मसला मध्य में अटका रह गया कुछ ख़ास अधिकारों के साथ !!  पकिस्तान को उसकी ज़मीन के साथ साथ बहुत सारा धन भी दिया गया और सीमाएं भी तय कर दीं गयीं !! तभी से हम हिन्दुस्तानी कहलाने लगे !! 


                  कुछ मुसलमान ( जो भय की वजह से धर्म परिवर्तन कर हिन्दू से मुसलमान बने थे ) भारत में ही रहना चाहते थे !! क्योंकि वो जानते थे की उन्हें जितने अधिकार हिन्दुस्तान में मिलेंगे उतने पकिस्तान में नहीं !! कुछ हिन्दुओं का मानना था कि जब इन्हें अपने हिस्से की ज़मीन और पैसा दे दिया गया है तो ये दोहरी नीति क्यों ??? इसी विवाद के चलते गाँधी जी की हत्या हुई !! और तभी से हिन्दू इस बात की प्रतीक्षा ही कर रहा है कि उसे कब अपने देश में अपने मौलिक अधिकार मिलेंगे ?? बीस साल तक तो हिन्दुओं ने प्रतीक्षा की , फिर हिन्दु नेताओं की तुष्टिकरण की नीतियों के चलते मन ही मन मनन करता गया की उसे कौन न्याय दिला सकता है ?? अटल जी की जीत पूर्ण बहुमत से नहीं हो सकी और हिन्दुओं के मुद्दों को दरकिनार कर बेबसी में वो सरकार चली !! मनमोहन सिंह जी के दस साल तो जैसे सौ साल की जेल बन गये , क्योंकि सब नीतियाँ केवल अल्पसंख्यकों को ही फायदा पंहुचाने वाली बनाई गयीं !
आरक्षण ने उस पर आग में घी जैसा काम किया !! भ्रष्टाचार , मंहगाई और घोटालों से भारत की जनता सोचने पर मजबूर हो गयी कि अब " कोमल नीतियों "  से काम नहीं चलेगा !! इसीलिए जनता ने ये सन्देश अपने नेताओं तलक " मोदी जी को अभूतपूर्व समर्थन " देकर जता दिया की अब " अटल-अडवाणी " वाला फार्मूला नहीं चलेगा !!
                    संघ ने भी अपने कार्यकर्ताओं , स्वयं-सेवकों और जनता की भावनाओं को समझ कर ये योजना बनाई कि अब हिन्दु - हित पर चुनाव लड़ा जाएगा और नतीजों के बाद गठबन्धन किया जाएगा अपने नियमानुसार , नाकि गठबन्धन धर्मानुसार !!
                     इसीलिए पिछले दस महीनो से भाजपा में ये परिवर्तन का दौर चल रहा है, वो भी लोकतंत्र की भावनाओं और असूलों को जिंदा रखते हुए  !! क्या पूर्व , क्या पश्चिम , क्या उत्तर और क्या दक्षिण सब तरफ हिन्दु  हित की रक्षा हेतु मोदी - मोदी का नाम इस तरह से गूंज रहा है !! जो नेता इस " लाईन " से बाहर रह जाएगा वो जनता की नज़रों में ही गिर जाएगा !!
                      मेरा सभी राजनितिक दलों से सविनय निवेदन है की वो सब मिल बैठ कर विचार करें कि निराश्रित हिन्दुओं के हितों के बारे में भी ज़रा सोचो , भारत माता की इज्ज़त का भी जरा ख्याल करो !! सभी अल्पसंख्यकों को भी साथ लेकर अपने भारत को आगे बढाओ !! जातिवाद और धर्म के अवैध शिकंजों से जनता को बचाओ !! क्योंकि कोई भी धर्म आपस में बैर रखना नहीं सिखाता , प्यार करना ही सिखाता है !! किसी का हक़ छीनो भी नहीं और अपना हक़ छोडो भी नहीं !! नेताओ रक्षक बनो।  भक्षक नहीं !!
        धर्म की जय जो !! अधर्म का नाश हो !! प्राणियों में सद्भावना हो !! विश्व का कल्याण हो !! हर हर हर महादेव !!
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सोनिया गांधी, आखिर हैं कौन ???????? ( साभार ) !!


         ये लेख सबकी खबर डॉट कॉम से लिया गया है.rahul-sonia-memories

जब इंटरनेट और ब्लॉग की दुनिया में आया तो सोनिया गाँधी के बारे में काफ़ी कुछ पढने को मिला । पहले तो मैंने भी इस पर विश्वास नहीं किया और इसे मात्र बकवास सोच कर खारिज कर दिया, लेकिन एक-दो नहीं कई साईटों पर कई लेखकों ने सोनिया के बारे में काफ़ी कुछ लिखा है जो कि अभी तक प्रिंट मीडिया में नहीं आया है (और भारत में इंटरनेट कितने और किस प्रकार के लोग उपयोग करते हैं, यह बताने की आवश्यकता नहीं है) । यह तमाम सामग्री हिन्दी में और विशेषकर "यूनिकोड" में भी पाठकों को सुलभ होनी चाहिये, यही सोचकर मैंने "नेहरू-गाँधी राजवंश" नामक पोस्ट लिखी थी जिस पर मुझे मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली, कुछ ने इसकी तारीफ़ की, कुछ तटस्थ बने रहे और कुछ ने व्यक्तिगत मेल भेजकर गालियाँ भी दीं (मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्नाः) । यह तो स्वाभाविक ही था, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि कुछ विद्वानों ने मेरे लिखने को ही चुनौती दे डाली और अंग्रेजी से हिन्दी या मराठी से हिन्दी के अनुवाद को एक गैर-लेखकीय कर्म और "नॉन-क्रियेटिव" करार दिया । बहरहाल, कम से कम मैं तो अनुवाद को रचनात्मक कार्य मानता हूँ, और देश की एक प्रमुख हस्ती के बारे में लिखे हुए का हिन्दी पाठकों के लिये अनुवाद पेश करना एक कर्तव्य मानता हूँ (कम से कम मैं इतना तो ईमानदार हूँ ही, कि जहाँ से अनुवाद करूँ उसका उल्लेख, नाम उपलब्ध हो तो नाम और लिंक उपलब्ध हो तो लिंक देता हूँ) ।

rahul-sonia-memories
पेश है "आप सोनिया गाँधी को कितना जानते हैं" की पहली कडी़, अंग्रेजी में इसके मूल लेखक हैं एस.गुरुमूर्ति और यह लेख दिनांक १७ अप्रैल २००४ को "द न्यू इंडियन एक्सप्रेस" में - अनमास्किंग सोनिया गाँधी- शीर्षक से प्रकाशित हुआ था ।
"अब भूमिका बाँधने की आवश्यकता नहीं है और समय भी नहीं है, हमें सीधे मुख्य मुद्दे पर आ जाना चाहिये । भारत की खुफ़िया एजेंसी "रॉ", जिसका गठन सन १९६८ में हुआ, ने विभिन्न देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी, इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने-अपने सूत्र थे और वे आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान करने में सक्षम थीं । लेकिन "रॉ" ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया था, क्योंकि "रॉ" के वरिष्ठ जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।
सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के बाद । "रॉ" की नियमित "ब्रीफ़िंग" में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे ("ब्रीफ़िंग" कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी रिपोर्ट देती है), जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थे, तब वे सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी किसी अधिकृत पद पर नहीं थे, लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी अनुमति देने को कह दिया था, फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करें, राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे ? या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता भी चल गया था ? ऐसा कुछ नहीं था, इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी । राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया था, और हालांकि रॉ मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है, राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया । क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की व्यवस्था किसने की ? जी हाँ, सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणी, जो राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात है, वह भी तब जबकि उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी (वह उन्होंने बहुत बाद में ली) । प्रधानमंत्री के घर में रहते हुए, जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे कतरा रहा हो, क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।
जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़ कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़ बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था, वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह "कैश" चेक नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।
राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन (फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन चिंताजनक... उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि "तुम्हारे प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है" । बुरी तरह से अपमानित रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।
संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि "मैं भारत की बहू हूँ" और "मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी" आदि वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ? (भारत भूमि पर जन्म लेने वाला व्यक्ति चाहे कितने ही वर्ष विदेश में रह ले, स्थाई तौर पर बस जाये लेकिन उसका दिल हमेशा भारत के लिये धड़कता है, और इटली में जन्म लेने वाले व्यक्ति का....)
सोनिया गाँधी भारत की प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं या नहीं, इस प्रश्न का "धर्मनिरपेक्षता", या "हिन्दू राष्ट्रवाद" या "भारत की बहुलवादी संस्कृति" से कोई लेना-देना नहीं है। इसका पूरी तरह से नाता इस बात से है कि उनका जन्म इटली में हुआ, लेकिन यही एक बात नहीं है, सबसे पहली बात तो यह कि देश के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन कराने के लिये कैसे उन पर भरोसा किया जाये। सन १९९८ में एक रैली में उन्होंने कहा था कि "अपनी आखिरी साँस तक मैं भारतीय हूँ", बहुत ही उच्च विचार है, लेकिन तथ्यों के आधार पर यह बेहद खोखला ठहरता है। अब चूँकि वे देश के एक खास परिवार से हैं और प्रधानमंत्री पद के लिये बेहद आतुर हैं (जी हाँ) तब वे एक सामाजिक व्यक्तित्व बन जाती हैं और उनके बारे में जानने का हक सभी को है (१४ मई २००४ तक वे प्रधानमंत्री बनने के लिये जी-तोड़ कोशिश करती रहीं, यहाँ तक कि एक बार तो पूर्ण समर्थन ना होने के बावजूद वे दावा पेश करने चल पडी़ थीं, लेकिन १४ मई २००४ को राष्ट्रपति कलाम साहब द्वारा कुछ "असुविधाजनक" प्रश्न पूछ लिये जाने के बाद यकायक १७ मई आते-आते उनमे वैराग्य भावना जागृत हो गई और वे खामख्वाह "त्याग" और "बलिदान" (?) की प्रतिमूर्ति बना दी गईं - कलाम साहब को दूसरा कार्यकाल न मिलने के पीछे यह एक बडी़ वजह है, ठीक वैसे ही जैसे सोनिया ने प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति इसलिये नहीं बनवाया, क्योंकि इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद राजीव के प्रधानमंत्री बनने का उन्होंने विरोध किया था... और अब एक तरफ़ कठपुतली प्रधानमंत्री और जी-हुजूर राष्ट्रपति दूसरी तरफ़ होने के बाद अगले चुनावों के पश्चात सोनिया को प्रधानमंत्री बनने से कौन रोक सकता है?)बहरहाल... सोनिया गाँधी उर्फ़ माइनो भले ही आखिरी साँस तक भारतीय होने का दावा करती रहें, भारत की भोली-भाली (?) जनता को इन्दिरा स्टाइल में,सिर पर पल्ला ओढ़ कर "नामास्खार" आदि दो चार हिन्दी शब्द बोल लें, लेकिन यह सच्चाई है कि सन १९८४ तक उन्होंने इटली की नागरिकता और पासपोर्ट नहीं छोडा़ था (शायद कभी जरूरत पड़ जाये) । राजीव और सोनिया का विवाह हुआ था सन १९६८ में,भारत के नागरिकता कानूनों के मुताबिक (जो कानून भाजपा या कम्युनिस्टों ने नहीं बल्कि कांग्रेसियों ने ही सन १९५० में बनाये) सोनिया को पाँच वर्ष के भीतर भारत की नागरिकता ग्रहण कर लेना चाहिये था अर्थात सन १९७४ तक, लेकिन यह काम उन्होंने किया दस साल बाद...यह कोई नजरअंदाज कर दिये जाने वाली बात नहीं है। इन पन्द्रह वर्षों में दो मौके ऐसे आये जब सोनिया अपने आप को भारतीय(!)साबित कर सकती थीं। पहला मौका आया था सन १९७१ में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ (बांग्लादेश को तभी मुक्त करवाया गया था), उस वक्त आपातकालीन आदेशों के तहत इंडियन एयरलाइंस के सभी पायलटों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गईं थीं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सेना को किसी भी तरह की रसद आदि पहुँचाई जा सके । सिर्फ़ एक पायलट को इससे छूट दी गई थी, जी हाँ राजीव गाँधी, जो उस वक्त भी एक पूर्णकालिक पायलट थे । जब सारे भारतीय पायलट अपनी मातृभूमि की सेवा में लगे थे तब सोनिया अपने पति और दोनों बच्चों के साथ इटली की सुरम्य वादियों में थीं, वे वहाँ से तभी लौटीं, जब जनरल नियाजी ने समर्पण के कागजों पर दस्तखत कर दिये। दूसरा मौका आया सन १९७७ में जब यह खबर आई कि इंदिरा गाँधी चुनाव हार गईं हैं और शायद जनता पार्टी सरकार उनको गिरफ़्तार करे और उन्हें परेशान करे। "माईनो" मैडम ने तत्काल अपना सामान बाँधा और अपने दोनों बच्चों सहित दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित इटालियन दूतावास में जा छिपीं। इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी और एक और बहू मेनका के संयुक्त प्रयासों और मान-मनौव्वल के बाद वे घर वापस लौटीं। १९८४ में भी भारतीय नागरिकता ग्रहण करना उनकी मजबूरी इसलिये थी कि राजीव गाँधी के लिये यह बडी़ शर्म और असुविधा की स्थिति होती कि एक भारतीय प्रधानमंत्री की पत्नी इटली की नागरिक है ? भारत की नागरिकता लेने की दिनांक भारतीय जनता से बडी़ ही सफ़ाई से छिपाई गई। भारत का कानून अमेरिका, जर्मनी, फ़िनलैंड, थाईलैंड या सिंगापुर आदि देशों जैसा नहीं है जिसमें वहाँ पैदा हुआ व्यक्ति ही उच्च पदों पर बैठ सकता है। भारत के संविधान में यह प्रावधान इसलिये नहीं है कि इसे बनाने वाले "धर्मनिरपेक्ष नेताओं" ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आजादी के साठ वर्ष के भीतर ही कोई विदेशी मूल का व्यक्ति प्रधानमंत्री पद का दावेदार बन जायेगा। लेकिन कलाम साहब ने आसानी से धोखा नहीं खाया और उनसे सवाल कर लिये (प्रतिभा ताई कितने सवाल कर पाती हैं यह देखना बाकी है)। संविधान के मुताबिक सोनिया प्रधानमंत्री पद की दावेदार बन सकती हैं, जैसे कि मैं या कोई और। लेकिन भारत के नागरिकता कानून के मुताबिक व्यक्ति तीन तरीकों से भारत का नागरिक हो सकता है, पहला जन्म से, दूसरा रजिस्ट्रेशन से, और तीसरा प्राकृतिक कारणों (भारतीय से विवाह के बाद पाँच वर्ष तक लगातार भारत में रहने पर) । इस प्रकार मैं और सोनिया गाँधी,दोनों भारतीय नागरिक हैं, लेकिन मैं जन्म से भारत का नागरिक हूँ और मुझसे यह कोई नहीं छीन सकता, जबकि सोनिया के मामले में उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। वे भले ही लाख दावा करें कि वे भारतीय बहू हैं, लेकिन उनका नागरिकता रजिस्ट्रेशन भारत के नागरिकता कानून की धारा १० के तहत तीन उपधाराओं के कारण रद्द किया जा सकता है (अ) उन्होंने नागरिकता का रजिस्ट्रेशन धोखाधडी़ या कोई तथ्य छुपाकर हासिल किया हो, (ब) वह नागरिक भारत के संविधान के प्रति बेईमान हो, या (स) रजिस्टर्ड नागरिक युद्धकाल के दौरान दुश्मन देश के साथ किसी भी प्रकार के सम्पर्क में रहा हो । (इन मुद्दों पर डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी काफ़ी काम कर चुके हैं और अपनी पुस्तक में उन्होंने इसका उल्लेख भी किया है, जो आप पायेंगे इन अनुवादों के "तीसरे भाग" में)। राष्ट्रपति कलाम साहब के दिमाग में एक और बात निश्चित ही चल रही होगी, वह यह कि इटली के कानूनों के मुताबिक वहाँ का कोई भी नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है, भारत के कानून में ऐसा नहीं है, और अब तक यह बात सार्वजनिक नहीं हुई है कि सोनिया ने अपना इटली वाला पासपोर्ट और नागरिकता कब छोडी़ ? ऐसे में वह भारत की प्रधानमंत्री बनने के साथ-साथ इटली की भी प्रधानमंत्री बनने की दावेदार हो सकती हैं। अन्त में एक और मुद्दा, अमेरिका के संविधान के अनुसार सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति को अंग्रेजी आना चाहिये, अमेरिका के प्रति वफ़ादार हो तथा अमेरिकी संविधान और शासन व्यवस्था का जानकार हो। भारत का संविधान भी लगभग मिलता-जुलता ही है, लेकिन सोनिया किसी भी भारतीय भाषा में निपुण नहीं हैं (अंग्रेजी में भी), उनकी भारत के प्रति वफ़ादारी भी मात्र बाईस-तेईस साल पुरानी ही है, और उन्हें भारतीय संविधान और इतिहास की कितनी जानकारी है यह तो सभी जानते हैं। जब कोई नया प्रधानमंत्री बनता है तो भारत सरकार का पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) उनका बायो-डाटा और अन्य जानकारियाँ एक पैम्फ़लेट में जारी करता है। आज तक उस पैम्फ़लेट को किसी ने भी ध्यान से नहीं पढा़, क्योंकि जो भी प्रधानमंत्री बना उसके बारे में जनता, प्रेस और यहाँ तक कि छुटभैये नेता तक नख-शिख जानते हैं। यदि (भगवान न करे) सोनिया प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुईं तो पीआईबी के उस विस्तृत पैम्फ़लेट को पढ़ना बेहद दिलचस्प होगा। आखिर भारतीयों को यह जानना ही होगा कि सोनिया का जन्म दरअसल कहाँ हुआ? उनके माता-पिता का नाम क्या है और उनका इतिहास क्या है? वे किस स्कूल में पढीं? किस भाषा में वे अपने को सहज पाती हैं? उनका मनपसन्द खाना कौन सा है? हिन्दी फ़िल्मों का कौन सा गायक उन्हें अच्छा लगता है? किस भारतीय कवि की कवितायें उन्हें लुभाती हैं? क्या भारत के प्रधानमंत्री के बारे में इतना भी नहीं जानना चाहिये!
(प्रस्तुत लेख सुश्री कंचन गुप्ता द्वारा दिनांक २३ अप्रैल १९९९ को रेडिफ़.कॉम पर लिखा गया है, बेहद मामूली फ़ेरबदल और कुछ भाषाई जरूरतों के मुताबिक इसे मैंने संकलित, संपादित और अनुवादित किया है। डॉ.सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा लिखे गये कुछ लेखों का संकलन पूर्ण होते ही अनुवादों की इस कडी़ का तीसरा भाग पेश किया जायेगा।) मित्रों जनजागरण का यह महाअभियान जारी रहे, अंग्रेजी में लिखा हुआ अधिकतर आम लोगों ने नहीं पढा़ होगा इसलिये सभी का यह कर्तव्य बनता है कि महाजाल पर स्थित यह सामग्री हिन्दी पाठकों को भी सुलभ हो, इसलिये इस लेख की लिंक को अपने इष्टमित्रों तक अवश्य पहुँचायें, क्योंकि हो सकता है कि कल को हम एक विदेशी द्वारा शासित होने को अभिशप्त हो जायें !
                                                                                BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं !!HAPPY BIRTH DAY TO YOU !! GOOD WISHES AND GOOD - LUCK !! प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
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पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
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जिला-श्री गंगानगर।

Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)
                                                               

Wednesday, September 11, 2013

" मेरे परम मित्र - पुण्य प्रसुन वाजपेयी जी का एक अहम् लेख आपसे बाँट रहा हूँ जी अवश्य पढ़िए और अपने अनमोल विचारों से हमें अवश्य अवगत करवाएं " ! !!

पुण्य प्रसून बाजपेयी



Posted: 09 Sep 2013 10:04 AM PDT

पहली बार रामलीला मैदान से एक नये इतिहास को रचने की कवायद चल रही है, जिस पर निर्णय तो बीजेपी को लेना है लेकिन कवायद संघ परिवार कर रहा है। यह कवायद नरेन्द्र मोदी को लेकर है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी के नाम का ऐलान अगर बीजेपी की एकजुटता और जनता की शिरकत के साथ रामलीला मैदान में रैली के साथ हो तो फिर चुनाव के मोड में समूचा देश भी आ जायेगा और बीजेपी के साथ साथ संघ परिवार भी चुनावी शिरकत शुरु कर देगा। संघ की मोदी को लेकर जो बिसात है उसके मुताबिक संसदीय बोर्ड में मोदी पर सर्वसम्मती से ठप्पा लगे।

यानी कोई नेता रुठा हुआ ना लगे। खास तौर से आडवाणी, सुषमा, मुरली मनोहर जोशी और अनंत कुमार खुले दिल से मोदी के साथ जुड़ें। और चुंकि इसके तुरंत बाद मोदी पूरी तरह से चुनावी कमान संभालेंगे तो उन्हें देश के लीडर के तौर पर रखने के लिये रामलीला मैदान में सबसे बडी और भव्य रैली हो। जिसमें खुले तौर पर मोदी के नाम का प्रस्ताव लालकृष्ण आडवाणी रखे। और सेकेंड सुषमा स्वराज करें। और फिर वह तमाम नेता मोदी के पक्ष में खुलकर आये जो अभी तक मोदी के नाम पर रुठे हुये नजर आते रहे हैं। आरएसएस रामलीला मैदान की रैली पर इसलिये भी जोर दे रहा है क्योंकि वह मनमोहन सरकार को उसी तर्ज पर चुनौती देना चाहता है जैसी चुनौती जेपी ने 1975 में दी थी।


महत्वपूर्म है कि 1975 में जेपी के संघर्ष के साथ आरएसएस खड़ी थी। और 25 जून 1975 को जेपी ने गिरफ्तारी से पहले रामलीला मैदान में ही ऐतिहासिक रैली की थी। जिसमें लाखों लोग जुटे थे। संघ का मानना है कि बीजेपी को भी मोदी की अगुवाई में उसी तरह के संघर्ष की मुनादी रामलीला मैदान से करनी होगी। तभी देश में बदलाव की बयार तेजी से बहेगी और लोगों का जुड़ाव भी तेजी से शुरु होगा। यानी सरसंघचालक मोहन भागवत अर्से बाद 1975 में सरसंघचालक रहे देवरस की उसी राजनीतिक लकीर पर चलना चाह रहे हैं, जिसपर देवरस ने चलकर पहली बार स्वयंसेवकों को सत्ता तक पहुंचाया था और तब जेपी खुले तौर पर यह कहने से नहीं चुके थे थे कि अगर आरएसएस सांप्रादायिक है तो वह भी सांप्रदायिक हैं। और उसी इतिहास को मोदी के जरीये दोहराने के मूड में संघ है।

सवाल सिर्फ इतना है कि तब जंनसंघ संघ के इशारे पर थी और इस बार संघ को लेकर बीजेपी के भीतर अब भी गहरी खामोशी है। लेकिन जिस तरह बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संघ के साथ बैठक में चुनावी तैयारी का खाका रखा उसने अगर मोदी के अगुवाई में बीजेपी की तैयारी खुल कर बतायी तो भैयाजी जोशी ने बीजेपी के हर नेता के भाषण के उस अंश को पकड़कर बीजेपी के चुनावी मैनिफेस्टो का खांका रखा जो संघ के एजेंडे हैं। और बैठक में अर्से बाद धारा 370 और कामन सिविल कोड़ को लेकर राजनीतिक चर्चा खुले तौर पर हुई। तो बीजेपी एक बार फिर संघ की उस लकीर पर चलने की तैयारी कर रही है जिस लकीर को सत्ता पाने के लिये एनडीए तले उसने छोड़ दिया था। असल में बीजेपी के दिल्ली बैठे नेताओं को आरएसएस हर मुद्दे पर खंगाल रही है और मोदी के जरीये अपने स्वप्न को राजनीतिक साकार देने में लगी है। और इसके लिये बीजेपी से ज्यादा राजनीतिक तैयारी संघ परिवार कर रहा है।

संघ ने तीन स्तर पर काम शुरु किया है। पहला संघ के पुराने लोगो को भी चुनावी मिशन में जोड़ना। दूसरा, बीजेपी की जीत का जमीनी आकलन करना और तीसरा मोदी का नाम खुले तौर पर प्रचारिक करना और इस रणनीति को अमल में लाने के लिये संघ ने बकायदा पूरे देश में हर उस वोटर तक पहुंचने की कवायद शुरु कर दी है जो कभी ना कभी किसी ना किसी रुप संघ से जुड़ा रहा हो। चाहे दानपत्र में दस रुपये दान करने वाला व्यक्ति हो या किसी प्रकार की दीक्षा लेने वाला शख्स। संघ ने यूपी,बिहार , राजस्थान और मध्यप्रदेश में पंचायत स्तर पर तो देश के बाकि राज्यों में जिले स्तर पर संघ से जुडे लोगो की निशानदेही शुरु की है। इतना ही संघ के प्रति साफ्ट रुख रखने वालो को काम का ऑफर भी किया जा रहा है। और इस काम में बूथ संभालने से लेकर अपने क्षेत्र के लोगो को मोदी के हक में वोट डालने के लिये प्रोत्साहित करना तक है। संघ का खास जोर उन 298 सीटों को लेकर है जिसपर बीते 33 बरस में बीजेपी जीती है।

यानी बीजेपी के बनने के बाद वह जिस भी सीट पर जीती वहा दोबारा जीत मिल सकती है इसे संघ मान रहा है। खास बात यह है कि पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर अभी तक चाहे मोदी के नाम का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन संघ परिवार ने मोदी का नाम लेकर पुरानी संघियों को समेटना शुरु कर दिया है। और संघ के प्रति साफ्ट रुख रखने वालों को यह साफ कहा जा रहा है कि इस बार मोदी को वोट देना हैं। असल में संघ उन विवादास्पद मुद्दों पर भी इसबार समझौता नहीं करना चाहता है, जो एनडीए की सत्ता बनने के दौरान बीजेपी ने ठंडे बस्ते में डाल दिये थे। इसीलिये बैठक में गडकरी ने अयोध्या से लेकर कामन सिविल कोड और संघ के गउ मुद्दे से लेकर धारा 370 की राजनीतिक जरुरत पर भाषण दिया। और इसे दुबारा बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा कैसे बनाये इसपर भैयाजी जोशी ने अपना मत बताया। यानी संघ को पहली बार लगने लगा है कि अगर बीजेपी समेत संघ परिवार एकजुट हो नरेन्द्र मोदी के पीछे जा खड़ा हो तो 300 सीट पर जीत मिल सकती है। यानी पहली बार स्वयंसेवक को संघ के एजेंडे पर सत्ता मिल सकती है।
                        
                                                                       
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Monday, September 9, 2013

" भाजपा संगठन द्वारा, तीन साल पहले विभिन्न पदों पर थोपे गये कई मौज़ूदा गद्दार पदाधिकारी पार्टी को गहरे गड्ढे में गिराने की पूरी तैयारी में हैं " ?????

भाजपा के निष्ठावान सभी कार्यकर्ताओं को मेरा हार्दिक नमस्कार !!
                        आज से 5 साल पहले श्री प्रकाश चन्द्र नाम के राजस्थान भाजपा के संगठन मंत्री हुआ करते थे !! पता नहीं किस कारन से उन्होंने पहले तो डा . महेश शर्मा जी का विरोध करवाया , फिर श्री ओम प्रकाश माथुर जी का और फिर श्री मति वसुंधरा राजे सिंधिया जी को पिछले चुनावों में भितरघात करके हरवाया !! हमने शिकायतें भेजीं तो उन्हें हटाया गया !! लेकिन कंही हम अकड़ में ना आ जाएँ हमें कोई पद ना देकर श्री गंगानगर जिले में सरदार महेन्द्र सिंह सोढ़ी जी को जिलाध्यक्ष बना दिया गया ! जिले के सभी मंडलों में संगठन के नाम पर ऐसे लोगों की नियुक्तियाँ हुई की पूछो मत , जिन्होंने पिछले चुनावों में पार्टी की खिलाफत की थी उन्हें ही इनाम स्वरूप पद दिए गये , और आज तलक दिए जा रहे हैं !!
                         पिछले जिलाध्यक्ष के चुनावों में , श्री निहाल चन्द , श्री लाल चन्द , सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी , श्री ओपी महेन्द्रा और श्री भागीरथ बिश्नोई जी पर तरह - तरह के आरोप लगाकर चोर साबित करने की कोशिश की गयी थी !! और एक तरह से हम सबको राजनीति से बाहर करने की भरपूर कोशिश की गयी !! लेकिन प्रदेश में श्रीमती वसुंधरा राजे जी ने , और पूरे राजस्थान में उनके प्रशंसकों ने अपनी एकता बनाये रख्खी !! जबकि श्री अरुण चतुर्वेदी जी ने भी अपने कार्यकाल में भरपूर कोशिशें जारी रख्खी !! अंत में हार मानकर अब सारी कमान राजस्थान की संगठन ने श्री मति वसुंधरा राजे जी को सौंपी है !! कमीनगी की हद्द ये है की जिन्होंने वसुंधरा जी का विरोध किया था , वो ही लोग उन्हें जयपुर जाकर सूरतगढ़ से चुनाव लड़ने हेतु आमंत्रित कर आये !!


                               बड़े नेताओं , प्रभारियों को नकली सम्मलेन कराकर ये दर्शाया जा रहा है की राजस्थान में भाजपा की जीत पक्की है लेकिन अन्दर से ये पार्टी को तोड़ने में लगे हुए हैं !! जिसका बिलकुल ताज़ा उदाहरण सामने ये आया है कि दस सितम्बर को जयपुर में होने वाली रैली में इन्होने कई कार्यकर्ताओं को सूचना ही नहीं दी की कितने बजे कंहा से जयपुर हेतु बसें जा रही हैं !! दर्जनों कार्यकर्ताओं ने आज सुबह मेरे से संपर्क कर ये मसला उठाया है !!
                        इन चोरों का इतना बड़ा ग्रुप है की सब ने अपने इर्द-गिर्द चमचों की फौज खड़ी कर रख्खी है !! जब भी पार्टी का कोई बड़ा पदाधिकारी यँहा आता है उसे ये नकली भीड़ दिखाकर , झूठी प्रशंसा के पुल बांधकर और खिलापिलाकर भेज दिया जाता है और वो ऊपर जाकर इनकी वाह-वाह कर देता है !! सवाल ये पैदा होता है की ये लोग किसको धोखा दे रहे हैं ???
                        क्या प्रादेशिक और केंद्रीय नेताओं को ऐसे षड्यंत्रों की भनक नहीं है ??? क्या बड़े नेता बेवकूफ हैं ??? ऐसा आभास कभी कभी मुझे इसलिए भी होता है क्योंकि छोटा कार्यकर्त्ता तो पहले भी निष्ठावान और मेहनती था जो तन-मन-धन से पार्टी की सेवा करता था और आज भी कर रहा है क्योंकि वो पार्टी की विचारधारा से जुदा हुआ है !! बड़े नेताओं का स्वार्थ बढ़ जाता है इसीलिए वो गाहे-बगाहे उल-जलूल हरकतें और अनाप-शनाप ब्यान देते रहते है ! कई बार बड़े नेताओं ने अपनी हरकतों से ये सिद्ध भी किया है !!
                          विधायक बनने को आतुर नेता कार्यकर्ताओं से मेलजोल बढ़ाना भी आवश्यक नहीं समझते क्योंकि उनका मानना है की एक बार पार्टी की टिकेट मिल गयी तो ये पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्त्ता तो अपने आप हमारे समर्थन को आ ही जायेंगे क्योंकि भाजपा का विरोध तो इनसे होगा नहीं चाहे इनको काट डाले कोई !! लगभग ऐसी ही स्थिति राजस्थान के दुसरे शहरों में भी हो गयी है !! तभी तो सुनने में आया था कि  वसुंधरा जी 12 जिलों के जिलाध्यक्षों सहित सारे मंडल अध्यक्ष बदलना चाहतीं थीं लेकिन संगठन ने उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी !! लेकिन भगवान् की मर्ज़ी देखिये , भारत की जनता श्री नरेंद्र मोदी जी को इतना चाह रही है की हमारी वसुंधरा जी भी जीत जायेंगी !! लेकिन इन चोरों  की चोरियाँ  भी छिप जायेंगी  !!
                        क्या निष्ठावान कार्यकर्त्ता फिर रोता ही रह जाएगा ....???? है किसी के पास इन प्रश्नों के उत्तर .....????
                   मुझे जवाब चाहिए .......!!!!!!
                            
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2014 की कॉरपोरेट फंडिग ने बदल दी है देश की सियासत !!

चुनाव की चकाचौंध भरी रंगत 2014 के लोकसभा चुनाव की है। और क्या चुनाव के इस हंगामे के पीछे कारपोरेट का ही पैसा रहा। क्योंकि पहली बार एडीआर न...