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Showing posts from February, 2013

"टीका मस्तक की शोभा,या वैज्ञानिकता " ! !

तिलक-टीका: आज्ञा चक्र के भेद
योग ने उस चक्र को जगाने के बहुत-बहुत प्रयोग किये है। उसमें तिलक भी एक प्रयोग है। स्मतरण पूर्वक अगर चौबीस घण्टेु उस चक्र पर बार-बार ध्यालन को ले जाता है तो बड़े परिणाम आते है। अगर तिलक लगा हुआ है तो बार-बार ध्यासन जाएगा। तिलक के लगते ही वह स्था।न पृथक हो जाता है। वह बहुत सेंसिटिव स्थाघन है। अगर तिलक ठीक जगह लगा है तो आप हैरान होंगे, आपको उसकी याद करनी ही पड़ेगी, बहुत संवेदनशील जगह है। सम्भावत: शरीर में वि सर्वाधिक संवेदनशील जगह हे। उसकी संवेदनशीलता का स्पार्श करना, और वह भी खास चीजों से स्पेर्श करने की विधि है—जैसे चंदन का तिलक लगाना।

सैकड़ों और हजारों प्रयोगों के बाद तय किया था कि चन्दखन का क्योंग प्रयोग करना है। एक तरह की रैजोनेंस हे चंदन में। और उस स्थागन की संवेदनशीलता में। चंदन का तिलक उस बिन्दु की संवेदनशीलता को और गहन करता है। और घना कर जाता है। हर कोई तिलक नहीं करेगा। कुछ चीजों के तिलक तो उसकी संवेदनशीलता को मार देंगे, बुरी तरह मार देंगे आज स्त्रि यां टीका लगा रही है। बहुत से बाजारू टीके है वे उनकी कोई वैज्ञानिकता नहीं

भाई मतिदास की धर्मनिष्ठा..............!!!!!!!

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औरंगजेब ने पूछाः "मतिदास कौन है?"....तो भाई मतिदास ने आगे बढ़कर कहाः "मैं हूँ मतिदास। यदि गुरुजी आज्ञा दें तो मैं यहाँ बैठे-बैठे दिल्ली और लाहौर का सभी हाल बता सकता हूँ। तेरे किले की ईंट-से-ईंट बजा सकता हूँ।"

औरंगजेब गुर्राया और उसने भाई मतिदास को धर्म-परिवर्तन करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से अनेक प्रकार की यातनाएँ देने की धमकी दी। खौलते हुए गरम तेल के कड़ाहे दिखाकर उनके मन में भय उत्पन्न करने का प्रयत्न किया, परंतु धर्मवीर पुरुष अपने प्राणों की चिन्ता नहीं किया करते। धर्म के लिए वे अपना जीवन उत्सर्ग कर देना श्रेष्ठ समझते हैं।

जब औरंगजेब की सभी धमकियाँ बेकार गयीं, सभी प्रयत्न असफल रहे, तो वह चिढ़ गया। उसने काजी को बुलाकर पूछाः

"बताओ इसे क्या सजा दी जाये?"

काजी ने कुरान की आयतों का हवाला देकर हुक्म सुनाया कि 'इस काफिर को इस्लाम ग्रहण न करने के आरोप में आरे से लकड़ी की तरह चीर दिया जाये।'

औरंगजेब ने सिपाहियों को काजी के आदेश का पालन करने का हुक्म जारी कर दिया। दिल्ली के चाँदनी चौक में भाई मतिदास को दो खंभों के बीच रस्सों से कसकर बाँध दिया गया और सिप…
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                            " प्रेस - नोट  "                       दिनांक ...........
            " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " टीम                             की तरफ से चलाये जा रहे " योग्य एवं लोकप्रिय - विधायक चुनने हेतु " सर्वे व मतदाता जागरूकता अभियान " , विधानसभा क्षेत्र सूरतगढ़ , चुनाव वर्ष 2013 , बड़ी सफलता से चल रहा है ! सूरतगढ़ की जनता इसकी प्रशंसा तो कर ही रही है साथ में बढचढ कर इस अभियान में हिस्सा भी ले रही है !! युवा लड़के और लडकियां इंटरनेट पर इस " सोशल मिडिया ब्लॉग प्रेस और इसके लेखक व संयोजक पीताम्बर दत्त शर्मा से फ्रेंडशिप करके जुड़ रहे हैं !! इस ब्लॉग के अब तक 19000 पाठक हैं ! इसके लेख शर्मा जी के पेज,गूगल +, ग्रुप और फेस-बुक पर भी पढने को मिलते हैं ! इसे विश्व के किसी भी हिस्से से देखा और पढ़ा जा सकता है, इंटरनेट के माध्यम से ! इसका लिंक ये है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 
                             इस  अभियान की टीम खेजड़ी मंदिर और बाबा रामदेव के मेले में भी गयी और दूर-दूर से पधारे लोगों को इस अभियान की जानकारी दी और …

धर्म: एक वाहियात पोस्ट लाईफ इंश्योरेंस पालिसी.....शमशाद इलाही अंसारी

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आधुनिक युग में इंसानी जीवन की अवधि ८० बरस से ऊपर है, मुसलमानों की औसत आयु कुछ कम होगी, चलिए किसी मान्य आंकड़े की अनुपस्थिती में अंदाजा ही लगा लेते हैं. कम से कम औसत आयु ६० बरस मान लीजिये. एक अच्छा मुसलमान बन कर अगर दस साल की उम्र से वह पांच वक्त की नमाज पढ़ने लगे तो पचास साल में कोई ३६,५०० घंटे (२ घंटे प्रतिदिन) वह इबादत में लगा देता है. इसमें कुरान की तिलावत और रमजान के दिनों में की जाने वाली विशिष्ट इबादत को जोड़ दे तब कम से कम यह आंकडा ५०,००० घंटो से कम नहीं हो सकता. डेढ़ अरब मुसलमानो में कम से कम आधे (७५ करोड़ ) तो नमाज पढ़ते ही है जिसके परिणामस्वरूप कम से कम १०२ अरब घंटे हर रोज़ मुसलमान एक अनुत्पादक कर्मकांड में व्यर्थ करता है. ७५ करोड़ लोगो में यदि १० प्रतिशत लोगो को प्रोफेशनल मान लिया जाए और उनकी प्रति घंटा उत्पादकता दर मात्र दस डालर भी मान ले तब इस समय की कीमत हर रोज़ करीब डेढ़ अरब डालर बैठती है. हवाई जहाज निर्माण मौजूदा दुनिया की इंजीनियरिग का सबसे अनूठा और सर्वश्रेष्ठ उत्पाद है जिसे बनाने में करीब दस लाख घंटे लगते है, जाहिर है इसके निर्माण में सैकड़ो लोग रात दिन काम करते हैं …

‎" 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " टीम के तत्वाधान में योग्य एवं लोकप्रिय विधायक चुनने हेतु "सर्वे व मतदाता जागुरुकता अभियान " ‎...!!

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चुनाव में किस छवि वाले को वोट -पत्रक जारी किया




विधान सभा चुनाव में किस छवि वाले को वोट दिया जाना चाहिए फिफ्थ पिल्लर क्रप्शन किलर ने लोगों की राय जानने को पत्रक जारी किया खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत सूरतगढ़, 17 फरवरी 2013.फिफ्थ पिल्लर क्रप्शन किलर ब्लॉग के एक लेखक पीताम्बर दत्त शर्मा ने चुनाव के बाद निर्वाचित जन प्रतिनिधियों द्वारा आम लोगों की पीड़ा को नहीं समझने और संपर्क नहीं रखने की परेशानी को समझते हुए लोगों को जगाने का एक अभियान शुरू किया है।
इसके लिए बारह फरवरी को एपेक्स सामुदायिक भवन में पत्रकार वार्ता की गई और एक टीम बनाई गई है।
इस टीम में संयोजक पीताम्बरदत्त शर्मा, संरक्षक डा.दलीप सिहाग और एडवोकेट भागीरथ कड़वासरा हैं।
इनके अलावा टीम में वित्त प्रभार परसराम भाटिया व डा.हरप्रीतसिंह,लेखन प्रभार पी.के.मिश्रा व तुलसीराम शर्मा,मंच प्रभार के.के.खासपुरिया प्रचार प्रसार प्रभार राजेन्द्र पटावरी,विजय स्वामी और प्रेस प्रवक्ता प्रभार एडवोकेट विष्णु शर्मा के पास हैं।
 17 फरवरी को सुभाष चौक पर लोगों की राय के लिए एक पत्रक का विमोचन किया गया है जिसमें कुछ सवाल है कि लोग किस प्रकार के विधायक को च…
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" 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER "
         टीम के तत्वाधान में
  योग्य एवं लोकप्रिय विधायक चुनने हेतु

   "सर्वे व मतदाता जागुरुकता अभियान "
        दीजिये 6 प्रश्नों के उत्तर में अपनी महत्वपूर्ण"राय",और

     जीतिए आकर्षक 165 ईनाम !!
लक्की-ड्रा खुलने की तिथि 30,अप्रैल 2013
लक्की-ड्रा खुलने का स्थान हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार !!                          एन्ट्री फीस मात्र - 5/-रूपये !!

 शुभारम्भ - दिनांक17,फ़रवरी 2013.रविवार
 स्थान - सुभाष चौक, सूरतगढ़ !!
 समय - प्रातः 11:15 पर
 आप सब सादर आमंत्रित हैं !!

" मेरा रंग दे बासन्ती चोला.....माये "....!!!

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कामदेव का पूजन होता था वसन्तोत्सव के दिन

आज हम वसन्त ऋतु में वसन्त पंचमी और होली त्यौहार मनाते हैं किन्तु प्राचीन काल में वसन्तोत्सव मनाया जाता था। वसन्तोत्सव, जिसे कि मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, मनाने की परम्परा हमारे देश में अत्यन्त प्राचीनकाल से ही रही है। संस्कृत के प्रायः समस्त काव्यों, नाटकों, कथाओं में कहीं न कहीं पर वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव या मदनोत्सव का वर्णन अवश्य ही आता है। वसन्त को ऋतुराज माना गया है क्योंकि यह मानव की मादकता एवं कोमल भावनाओं को उद्दीप्त करता है। वसन्त पंचमी से लेकर रंग पंचमी तक का समय वसन्त की मादकता, होली की मस्ती और फाग का संगीत से सभी के मन को मचलाते रहता है। टेसू और सेमल के रक्तवर्ण पुष्प, जिन्हें कि वसन्त के श्रृंगार की उपमा दी गई है, सभी के मन को मादकता से परिपूर्ण कर देते हैं। शायद यही कारण है वसन्तोत्सव मनाने की।

वसन्तोत्सव का दिन कामदेव की पूजा की जाती थी। महाकवि “भवभूति” के ‘मालती-माधव’ संस्कृत नाटक के अनुसार एक विशेष मदनोद्यान का निर्माण करके वहाँ पर मदनोत्सव मनाया जाता था।

“मदनोद्यान- जो विशेष रूप से इस उत्सव के लिए ही बनाया जाता था – इसक…

" लोकप्रिय व योग्य विधायक चुनने हेतु सर्वे " विधानसभा - क्षेत्र, सूरतगढ़ !! [ चुनाव वर्ष-2013 ]

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          " सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र " के मतदाता भाइयो,बहनों और युवा साथियों,!!
                हम प्रदेश विधानसभा में जनहित की योजनायें बनाने, क़ानून बनाने और प्रशासन को सुचारू रूप से चलवाने हेतु प्रत्येक 5 वर्ष बाद अपना विधायक चुनकर भेजते हैं ! लेकिन भूतकाल के अनुभवों से हमें यह आभास हुआ है कि एकबार वोट देने के बाद भी हम सारा कुछ उन नेताओं पर छोड़ देते हैं जिससे वे अपनी मनमानी करते हैं !! चुनाव के समय में वो हमें बड़ी चालाकी से अपने " जाल " में फंसा लेते हैं ! शराब या पैसे का लालच देकर,धर्म-जाति के नाम पर बाँट कर और पार्टी इलाके या भाषा में बांधकर वो अपना हित साध लेते हैं ! कुल आबादी के 30% लोग किसी न किसी " झांसे " में आ ही जाते हैं !! जिसका कारण है " अज्ञानता " !! तो इसी अज्ञानता को दूर करने हेतु हमने ये निर्णय लिया है कि आमजन को अपना वोट किसी इमानदार,अनुभवी,मेहनती और देश - भक्त नेता को ही देकर अबकी बार चुना जाए !! इस हेतु आप सबकी राय जानना जरूरी है ! इस " सर्वे " के द्वारा !!
                       तो कृपया आप सबसे निवेदन है  कि आप इस स…

" खत्म हुआ - अफज़ल-गुरु का " फ़साना "...???

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" खत्म हुआ - अफज़ल-गुरु का " फ़साना "...???
अफजल गुरू को फांसी पर लटकाया 
नई दिल्ली। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर पर हमले के गुनहगार अफजल गुरू को आज सुबह फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अफजल गुरू को मुंबई हमले के गुनहगार अजमल आमिर कसाब की तरह ही फांसी दी गई। गृह सचिव आरके सिंह ने बताया कि अफजल को सुबह 8 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। अफजल को फांसी दिए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

अफजल को फांसी पर लटकाए जाने की सिफारिश 23 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजी गई थी। 26 जनवरी को राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमला किया गया था। इसमें 9 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इनमें पांच पुलिस कर्मी शामिल थे। 

अफजल गुरू को इस मामले में दोषी करार दिया गया। 18 दिसंबर 2002 को दिल्ली की एक कोर्ट ने अफजल को फांसी की सजा सुनाई। 29 अक्टूबर 2003 को दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट से भी अफजल को कोई राहत नहीं मिली। 4 अगस्त 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। 

अफजल …

"करिश्मा किसका चलेगा 2013 - 14 के चुनावों में " ....????

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 प्यारे  वोटर  मित्रो  , वासंती   नमस्कार स्वीकारें !!
                         2013-14 में देश के          वोटरों के भाग जागने वाले हैं । कोई दल " समाजवाद " का झुनझुना बजाएगा तो कोई रामराज्य का सपना दिखायेगा, कोई सेकुलरी के गीत गायेगा तो कोई विकास और आरक्षण के खयाली पुलाव पकाकर खिलायेगा हम वोटरों को !! हमें " चने के झाड़ " पर चढ़ा दिया जायेगा और हम इसे अपना " सन्मान " समझ ख़ुशी-ख़ुशी किसी " चालबाज़ " के कहने में आकर अपना " कीमती-वोट " उस दगाबाज़ को दे आयेंगे !! इतिहास तो यही बताता है !!
                     इन  चुनावों  में  करिश्मा  मोदी  - राहुल  - नितीश  - वसुंधरा  - बादल   - मुलायम - ममता  - येदी - रेड्डी- जगन-जयललिता या इन जैसे किसी और नेता का चलेगा या " सोशल-मिडिया " की उपज अन्ना-केजरीवाल-रामदेव या रविशंकर आदि का चलेगा ...???? क्या आज का युवा जागुरुक होगा या पुरानी पीढ़ी की तरह किसी झांसे में आ जायेगा !!
                                      मज़ा तो तब आये जब इसबार 90% पोलिंग हो जाए और बिना किसी लालच के वोट डल जाएँ.....लेकिन राजन…

" दुनिया...पागल है, या फिर मैं ...दीवाना " .....!!!!??

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" दुनिया को पागल समझने वाले" मेरे सभी मित्रों को पीताम्बर दत्त शर्मा का हार्दिक नमस्कार !! दुनिया को पागल समझने वाले ही सच्चाई पर चलने वाले होते हैं और लोग उन्हें " दीवाना " कहकर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं ! जीवन भर ऐसा ही चलता है !! लेकिन जब वो सच्चा आदमी स्वर्ग-सिधार जाता है तो अगली पीढियां उसे " ईसामसीह,बुल्लेशाह,फरीद,कबीर,नानक और मीरां देवी आदि-आदि के नाम से याद करती है !!!! 
                      स्वार्थ के वशीभूत होकर इन्सान " सच " को भी झूठ साबित कर देता है ! क्योंकि उस के साथ सभी तरह के बदमाश मिले हुए होते हैं ! ऐसे लोग " सत्ता " के भी करीब होते हैं ! अल्लाह जाने क्या होगा आगे...., के मौला जाने क्या होगा आगे......!!! इब्तिदाए इश्क है, रोता है क्या...! आगे आगे देखिये , होता है क्या......???????//////////
" दुनिया...पागल है, या फिर मैं ...दीवाना " .....!!!!??
क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
प्रिय मित्रो, ! कृपया आप मेरा ये ब्लाग " 5th pillar corrouption killer " रोजाना पढ़ें , इसे अपने अपने मि…

जेहाद और जिन्दगी को पिरोती विश्वरुप.......!!!!!

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सिल्वर स्क्रिन पर कथक करते कमल हासन.... और सिल्वर स्क्रिन पर ही बारुद में समाया आंतक । यही दो दृश्य विश्वरुपम के प्रोमो में सामने आये और फिल्म देखकर कोई भी कह सकता है कि सिर्फ यह दो दृश्य भर नहीं है विश्वरुपम । विश्वरुपम 9-11 के बाद अलकायदा की जमीन पर रेंगती ऐसी फिल्म है जो अफगानिस्तान के भीतर जेहाद के जरीये जिन्दगी जीने की कहानी कहती है । तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान में नाटो सैनिक के युद्द से लेकर अलकायदा के खिलाफ चलाया जा रहा भारत का मिशन है जिसकी अगुवाई और कोई नहीं विश्वरुप यानी कमल हासन ही कह रहे है ।

मिठ्टी और रेत के बडे बडे टिहो से पटे पडे खूबसूरत अपगानिस्तान में नाटो सैनिको और अलकायदा के बीच बारुद की जंग कितनी खतरनाक है अगर यह हिसंक दृश्यो के जरीये दिखाया गया है तो यह कमल हासन का ही कमाल है कि अफगानिस्तान की बस्तियो में वह तराजू में तौल कर बेचे जा रहे कारतूस और हथियारो के जखीरे के बीच आंखो पर पट्टी डाल बच्चो की नन्ही अंगुलियो के सहारे हथियारो काककहरा पढते-पढाते हुये आंतक के स्कूल की एक नयी सोच महज चंद सीन में दिखा देते है।

दरअसल 9-11 के बाद बनी कई लोकप्रिय फिल्मो की कतारो में विश्व…

व्यंग्य - - : उपाध्यक्ष महोदय .......!!!??? वीरेन्द्र जैन

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जब कोई व्यक्ति किसी संस्था के लिए ''उगलत निगलत पीर घनेरी'' वाली दशाको प्राप्त हो जाता है तो उसे उस संस्था का उपाध्यक्ष बना दिया जाता है। उपाध्यक्ष पदाधिकारियों में ईश्वर की तरह होता है जो होते हुये भी नहीं होता है और नहीं होते हुये भी होता है। यह टीम का बारहवां खिलाड़ी होता है जो पैड-गार्ड बांधे बल्ले पर ठुड्डी टिकाये किसी के घायल होने की प्रतीक्षा में टायलट तक नहीं जाता और मैच समाप्त होने पर फोटोग्रुप के लिये बुला लिया जाता है।
वह कार्यकारिणी का 'खामखां' होता है। किसी भी कार्यक्रम के अवसर पर वह ठीक समय पर पहुंच जाता है तथा अध्यक्ष महोदय के स्वास्थ की पूछताछ इस तरह करता है जैसे वह उनका बहुत हितैषी हो। वह संस्था के लॉन में बाहर टहलता रहता है और अध्यक्ष के आने, और खास तौर पर न आने की आहट लेता रहता है। अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है कि अध्यक्ष महोदय नहीं आ रहे हैं तो वह इस बात की जानकारी अपने तक ही बनाये रखता है तथा बहुत विनम्रता और गम्भीरता से बिल्कुल पीछे की ओर बैठ जाता है, जैसे उसे कुछ पता ही न हो। जब सचिव आदि अध्यक्ष महोदय के न आने की सूचना देते हैं जिसका कारण …