Tuesday, October 30, 2012

" जलन 50 करोड़ वाली गर्ल फ्रेंड की "...???

     थरूर की पहली बीवी तिलोत्तमा मुखर्जी फिर दूसरी बीवी क्रिस्टा गाइल्स से तलाक हो गया था। उन्होंतने अगस्त 2010 में सुनंदा पुष्कर से शादी की। सुनंदा पुष्कार शशि थरूर की तीसरी बीवी हैं। आईपीएल कोच्चि टीम में सुनंदा की हिस्सेदारी के लिए 70 करोड़ या ज्यादा रकम कहां से आई? इसी को लेकर काफी बवाल मचा। आखिरकार थरूर को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। कश्मीर यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट सुनंदा की शादी दिल्ली में काम करने वाले एक व्यक्ति से हुई थी। 14 साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी। सुनंदा का एक 19 साल का बेटा है। रियल एस्टेट मार्केट में भी उनका दखल बताया जाता रहा है। सुनंदा मूल रूप से कश्मीर के सोपोर जिले की रहने वाली हैं, लेकिन आतंकवाद की वजह से उनका परिवार जम्मू आ गया था। उनके पिता आर्मी में सीनियर ऑफिसर रह चुके हैं। वह 2005 से टीकॉम इंवेस्टमेंट कंपनी में बतौर सेल्स मैनेजर काम कर रही थी। 
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राज्यमंत्री मानव संसाधन विभाग शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर पर टिप्पणी करते हुए उन्हें 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था। मोदी ने क
हा था कि संसद में सुनंदा को जानने से इंकार करने वाले थरूर ने उनसे एक महीने बाद ही शादी कर ली थी। मोदी की टिप्पणी के बाद थरूर ने ट्विटर पर नरेंद्र मोदी को जवाब देते हुए कहा- 'मेरी पत्नी की कीमत तुम्हारे काल्पनिक 50 करोड़ से कहीं ज्यादा है, वो बेशकीमती हैं लेकिन यह समझने के लिए तुम्हें प्यार करने के लायक बनना पड़ेगा।
लेकिन इस एक ट्वीट ने ट्विटर पर नई बहस जरूर छेड़ दी। पेश हैं चुनिंदा टिप्पणियां -

Pankaj Choudhary
असल में थरूर मोदी या किसी और को सफाई नहीं दे रहे हैं बल्कि वो अपनी बेशकीमती पत्नी को बता रहे हैं कि वो अब चौथी शादी का खर्चा नहीं उठा पाएंगे।
Rabi Agrawal
यारो जरा ठंड रखो, उस ट्वीट से शशि थरूर सिर्फ अपनी पत्नि को इंप्रेस कर रहे थे।
Yashasvi
थरूर की थ्योरी है आप जितने ज्यादा लोगों से शादी करेंगे उतना ज्यादा ही प्यार के बारे जानेंगे।
Kabootar Khana
और शशि थरूर के पास तो देने के लिए इतना प्यार है कि उन्हें तीन बार शादी करनी पड़ी।
Yash
शशि थरूर ने कहा कि मेरी पत्नी बेशकीमती हैं...शायद यह जीरो लॉस थ्योरी का नया वर्जन है।
Priyarag Verma
थरूर और मोदी एक औरत के ऊपर लड़ रहे हैं..अच्छा अगर थरूर की पत्नी बेशकीमती हैं तो फिर संसद में उसे पहचानने से इंकार क्यों कर दिया था?
chiknachamela
अब मेरी समझ में आया थरूर को पुनर्विवाह सीरीयल पसंद है।
rahul of वासेपुर
2जी और कोयला घोटाले के बाद अब 'बेशकीमती' घोटालों का अगला चरण लगता है।
और अंत में आपका हरिहर कहता है -
उनका एक भी विवाह नहीं, इनके तीन तीन
ये बेवक्त की है बीन
ये जमाना तो कुब्बत का है
कांग्रेस के राज में छीन सके सो छीन ||
                                                                                           प्रिय मित्रो, आपका क्या कहना है ...इस विषय पर ......???? अपने विचार आप मेरे ब्लॉग पर , जिसका नाम है..:- " 5th pillar corrouption killer " जाकर लिख सकते हैं !! जिसको खोलने का लिंक ये है...www.pitamberduttsharma.blogspot.com. आप मेरे ये लेख फ
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पीताम्बर दत्त शर्मा
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आर. सी.पी. रोड, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( श्री गंगानगर )( राजस्थान ) मोबाईल नंबर :- 9414657511. फेक्स :- 1509 - 222768.

Monday, October 29, 2012

अन्ना के नए केजरीवाल हैं जनरल वी. के. सिंह.....?????

    " अन्ना का सेनापति वाक्चातुर्य में कमज़ोर "



v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare v k singh anna hazare

v k singh anna hazare


नई दिल्ली।सोमवार को एक बार फिर अन्ना हजारे की दहाड़ सुनाई दी। मुंबई में पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के सिंह के साथ मीडिया से मुखातिब हुए अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ठीक उसी अंदाज में अन्ना से किए जा रहे सवालों का जवाब दे रहे थे, जैसे कुछ वक्त पहले तक अरविंद केजरीवाल दिया करते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि सिंह ने वह जगह भर दी है, जो अरविंद केजरीवाल के राजनीति में जाने के बाद खाली हो गई थी।

मुंबई में अन्ना हजारे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना से पूछे गए कई सवालों का जवाब पूर्व सेना प्रमुख ने दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की नई नीतियों के बारे में बताया। अन्ना से पूछे जा रहे टेढ़े सवालों का जवाब सिंह खुद ही दे रहे थे और अपनी तरफ से सफाई भी दे रहे थे। सिंह की यह भूमिका ठीक वैसी ही है, जैसी कि अन्ना के लिए अरविंद केजरीवाल की रही है। जन लोकपाल के लिए चलाए गए आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल ही खुद पहल करके अन्ना से पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दिया करते थे।


अन्ना हजारे ने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व सेना प्रमुख को पूरा सम्मान दिया। देश की यात्रा करने का ऐलान करते हुए अन्ना ने कहा, 'हम सिर्फ दो लोग नहीं हैं। हमारे आंदोलन के समर्थन में लाखों-करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आएंगे।' इसके बाद वी. के. सिंह ने ही अन्ना की तरफ से मोर्चा संभाला। उन्होंने न सिर्फ आंदोलन को लेकर रणनीति का खुलासा किया, बल्कि मीडिया के सवालों का जवाब भी दिया। इस तरह से लग रहा है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह ने मौजूदा टीम अन्ना में वही स्थान हासिल कर लिया है, जो पुरानी टीम अन्ना में अरविंद केजरीवाल का था।
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" मिलावटी - फेरबदल " जनता को चिढा रहा है..??

" मिलावट के आदी हो चुके " प्यारे मित्रो,शुद्ध   प्यार भरा नमस्कार स्वीकार करें !!
                            हमारे" पावर - फुल " प्रधानमंत्री जी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया ! जनता और हम जैसे तथाकथित बुद्धिजीवियों ने सोचा था कि जिन्होंने सही तरीके से काम नहीं किया उन्हें बदला जाएगा ....लेकिन हुआ वो जिसकी आशा " चोरों " को थी !! हम जैसे तो हमेशां हाथ मलते ही रह जाते हैं !! उन्होंने ये भी कहा कि हम 5 साल पूरे करेंगे !! तथा ये भी कहा कि " शायद " ये हमारा आखरी विस्तार होगा !! बस !! यही उनकी कही बात मुझे खाए जा रही है !!
                                 प्रधानमंत्रीजी ने ये बात क्यों और किसे कही ??? क्या वो मंत्रिमंडल का विस्तार कर कर के थक गए हैं ??? या वो " हस्ताक्षेप " से परेशान हैं ??? क्या उनकी एक भी कभी नहीं चली ???? क्या वो इतने " भोले " है ...?? या वो ज्यादा " चतुर " हैं ??????
                            कईसरदार टाईप के बुद्धिजीवियों का मानना है कि वो 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री बने रहें , बस इसीलिये सब " सह " रहे हैं !! मैं पूछता हूँ की ऐसा मानलो हो भी गया तो क्या कोई बड़ी बात हो जायेगी ?? मंत्रियों और संगठन के गलत कार्यों का " खामियाजा " उस " उपलब्धि " से ज्यादा बड़ा नहीं है  !! 
                               कौननहीं जानता कि इस फेरबदल में सोनिया जी और राहुल जी के अधिकार की कितनी " मिलावट " थी ???? परन्तु भारतवासी सभी चीजों में मिलावट के आदि हो चुके हैं !!!!!!! मिलावटी दूध, मिठाई और सभी खाद्यान्न हमारी आदत में शुमार हो चुके हैं !!
                  प्रधानमंत्री जी अपनी बहादुरी दिखाइए ....!!! अगर आप किसी बात से " दुखी " हैं तो जनता को बताकर अपना दर्द कम कर लीजिये...अन्यथा जनता आपको भी बराबर का दोषी मानेगी !!!!!!! आप एक हाथ में सत्ता और दुसरे हाथ में पाक- साफ़ दामन नहीं रख सकते...... !!!!!!????
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Sunday, October 28, 2012

" आज सिर्फ चित्र देखिये मित्रो "....!!!



















     " आज सिर्फ चित्र देखिये मित्रो "....!!!
 प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !! ( join this grup " 5th PILLAR CORROUPTION KILLER " )
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपक
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आपका मित्र
पीताम्बर दत्त शर्मा 

Saturday, October 27, 2012

" इसका कोई मुकाबला नहीं.. नरेंद्र मोदी भाई कमाल हैं " ...!!!!!

 इसे    पढ़िए, विचारिये और  सबसे  चर्चा  कीजिये..
    मोदी जी कि चेन्नई में दी गयी ऐतिहासिक Speech के कुछ अंश -

''
मुझे आज तक इस सेकुलरिस्म शब्द का अर्थ समझ में नहीं आया क्योंकि इसका डिक्शनरी में जो अर्थ दिया गया है वो बिलकुल अलग है उससे जो कि हमारे देश में लागू किया जाता है , एक जमाना था जब हमारे देश में लोग सेकुलरिस्म के बारे में बोलते थे तो उनका मतलब होता था कि अगर आप सभी धर्मों के प्रति समान भाव और सम्मान का भाव रखते हैं तो आप सेकुलर हैं ,


धीरे-२ देश में इसका रंग बदला गया कुछ स्वार्थी तत्वों के द्वारा , धीरे-२ सेकुलरिस्म का मतलब होना शुरू हुआ कि अगर आप मुसलमानों के पक्ष में बोलते हो ,हर बात में उनका बचाव करते हो ,उनकी तरफदारी करते हो चाहे बात गलत ही क्यों ना हो तो आप सेकुलर हो

उसके बाद धीरे-२ इसका रंग फिर बदला और सेकुलरिस्म का मतलब हो गया मुसलमानों का तुष्टिकरण करना ,अगर आप उन्हें बराबरी का नहीं बल्कि दुसरे से ज्यादा महत्व देते हो तो आप सेकुलर हो

उसके बाद फिर इसका रंग बदला और आज इसका मतलब हो गया है हिंदू धर्म से नफरत करना , अगर आप हिंदू होकर भी हिंदू धर्म कि बुराई करते हो ,उसे कमजोर करते हो तो आप सेकुलर हो

हर 5 साल में इसका मतलब बदलता है साहब ,तो इसलिए मैंने सोचा कि मुझे भी इसका अर्थ बदलना चाहिए और इसीलिए मैं जिस सेकुलरिस्म में यकीन रखता हूँ वो है इंडिया फर्स्ट और मेरा साफ़ मानना है कि देश में सच्चे सेकुलरिस्म कि नींव अगर रखनी है तो उसका एकमात्र मंत्र है विकास

मैं हैरान हूँ कि जब हमारे देश का प्रधानमंत्री ओन रिकोर्ड ये कहता है कि देश कि संपत्ति और संसाधनों पे पहला हक मुसलमानों का है तो उस पर कोई हो-हल्ला नहीं किया जाता ,मैं उस मीटिंग में मौजूद था जिसमें प्रधानमंत्री ने ये ब्यान दिया था और मैंने अकेले खड़े होकर उनके इस ब्यान का विरोध किया था और कहा था कि प्रधानमंत्री जी आप ऐसा गैर-जिम्मेदाराना ब्यान कैसे दे सकते हैं ,क्या आप ये नहीं कह सकते थे कि देश कि सम्पति और संसाधनों पर पहला हक देश के गरीब से गरीब व्यक्ति का है चाहे वो किसी भी जाती या धर्म का क्यों ना हो ,

आज ये सेकुलरिस्म के ठेकदार मजहबी बजट तक तैयार कर रहे हैं ,ऐसे ठेकेदारों को मैं कहना चाहता हूँ कि तुम किस मुंह से सेकुलरिस्म कि बात करते हो भाई ??, तुम्हारे जैसों को कोई हक ही नहीं बनता सेकुलरिस्म कि बात करने का

जब मैंने गुजरात में कन्या शिक्षा अभियान चलाया तो उसका फायदा किसको मिला ?? उसका फायदा गरीब से गरीब कन्या को मिला चाहे वो किसी भी जाती या धर्म कि क्यों ना हो


और इस सबके बावजूद भी उल्टा मेरे बारे में कहते रहते हैं कि मोदी साम्प्रदायिक है ,मोदी साम्प्रदायिक है ,अरे !! क्या तुम्हें साम्प्रदायिक होने का मतलब भी मालुम है , क्या आतंकवाद के विरुद्ध बोलना साम्प्रदायिक होना है ??, अगर आतंकवाद के विरुद्ध बोलना साम्प्रदायिकता है तो ठीक है मैं हूँ साम्प्रदायिक और मैं रहूँगा साम्प्रदायिक और इसके लिए मुझे जो भी कीमत चुकानी पडेगी मैं तैयार हूँ ''


- नरेंद्र मोदी
मोदी जी कि चेन्नई में दी गयी ऐतिहासिक Speech के कुछ अंश -
 
''
 मुझे आज तक इस सेकुलरिस्म शब्द का अर्थ समझ में नहीं आया क्योंकि इसका डिक्शनरी में जो अर्थ दिया गया है वो बिलकुल अलग है उससे जो कि हमारे देश में लागू किया जाता है , एक जमाना था जब हमारे देश में लोग सेकुलरिस्म के बारे में बोलते थे तो उनका मतलब होता था कि अगर आप सभी धर्मों के प्रति समान भाव और सम्मान का भाव रखते हैं तो आप सेकुलर हैं , 


धीरे-२ देश में इसका रंग बदला गया कुछ स्वार्थी तत्वों के द्वारा , धीरे-२ सेकुलरिस्म का मतलब होना शुरू हुआ कि अगर आप मुसलमानों के पक्ष में बोलते हो ,हर बात में उनका बचाव करते हो ,उनकी तरफदारी करते हो चाहे बात गलत ही क्यों ना हो तो आप सेकुलर हो 

उसके बाद धीरे-२ इसका रंग फिर बदला और सेकुलरिस्म का मतलब हो गया मुसलमानों का तुष्टिकरण करना ,अगर आप उन्हें बराबरी का नहीं बल्कि दुसरे से ज्यादा महत्व देते हो तो आप सेकुलर हो 

उसके बाद फिर इसका रंग बदला और आज इसका मतलब हो गया है हिंदू धर्म से नफरत करना , अगर आप हिंदू होकर भी हिंदू धर्म कि बुराई करते हो ,उसे कमजोर करते हो तो आप सेकुलर हो 

हर 5 साल में इसका मतलब बदलता है साहब ,तो इसलिए मैंने सोचा कि मुझे भी इसका अर्थ बदलना चाहिए और इसीलिए मैं जिस सेकुलरिस्म में यकीन रखता हूँ वो है इंडिया फर्स्ट और मेरा साफ़ मानना है कि देश में सच्चे सेकुलरिस्म कि नींव अगर रखनी है तो उसका एकमात्र मंत्र है विकास 

मैं हैरान हूँ कि जब हमारे देश का प्रधानमंत्री ओन रिकोर्ड ये कहता है कि देश कि संपत्ति और संसाधनों पे पहला हक मुसलमानों का है तो उस पर कोई हो-हल्ला नहीं किया जाता ,मैं उस मीटिंग में मौजूद था जिसमें प्रधानमंत्री ने ये ब्यान दिया था और मैंने अकेले खड़े होकर उनके इस ब्यान का विरोध किया था और कहा था कि प्रधानमंत्री जी आप ऐसा गैर-जिम्मेदाराना ब्यान कैसे दे सकते हैं ,क्या आप ये नहीं कह सकते थे कि देश कि सम्पति और संसाधनों पर पहला हक देश के गरीब से गरीब व्यक्ति का है चाहे वो किसी भी जाती या धर्म का क्यों ना हो ,
 
आज ये सेकुलरिस्म के ठेकदार मजहबी बजट तक तैयार कर रहे हैं ,ऐसे ठेकेदारों को मैं कहना चाहता हूँ कि तुम किस मुंह से सेकुलरिस्म कि बात करते हो भाई ??, तुम्हारे जैसों को कोई हक ही नहीं बनता सेकुलरिस्म कि बात करने का 

जब मैंने गुजरात में कन्या शिक्षा अभियान चलाया तो उसका फायदा किसको मिला ?? उसका फायदा गरीब से गरीब कन्या को मिला चाहे वो किसी भी जाती या धर्म कि क्यों ना हो
 

और इस सबके बावजूद भी उल्टा मेरे बारे में कहते रहते हैं कि मोदी साम्प्रदायिक है ,मोदी साम्प्रदायिक है ,अरे !! क्या तुम्हें साम्प्रदायिक होने का मतलब भी मालुम है , क्या आतंकवाद के विरुद्ध बोलना साम्प्रदायिक होना है ??, अगर आतंकवाद के विरुद्ध बोलना साम्प्रदायिकता है तो ठीक है मैं हूँ साम्प्रदायिक और मैं रहूँगा साम्प्रदायिक और इसके लिए मुझे जो भी कीमत चुकानी पडेगी मैं तैयार हूँ ''
 

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Thursday, October 25, 2012

" विश्वसनीयता दांव पे सहयोगी नेताओं की "

     
                                     कांग्रेस और बीजेपी को चाहिए जासूस:

पिछले कुछ समय में जिस तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदला है, उसने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को ही चिंतित कर दिया है। सबसे बड़ी बात है कि इन्हें अपने ही सहयोगियों पर भरोसा नहीं रह गया है। पता नहीं कब कौन गच्चा दे दे। इसलिए इन दोनों ही दलों ने एक विशेष योजना बनाई है। हाल में एक प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी ने स्वीकार किया कि इन पार्टियों के नेताओं ने उनकी सेवाएं मांगी हैं। उन्हें यूपीए और एनडीए के घटक दलों के महत्वपूर्ण नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखनी है।

इस बात पर गौर करना है कि उनके घर या दफ्तर में उनसे मिलने कौन-कौन आ रहा है। पार्टियां असल में यह देखना चाहती हैं कि कहीं उनके गठबंधन के नेता दूसरे गठबंधन के नेताओं से तो नहीं मिल रहे। वैसे एक निजी जासूसी संस्था ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके अनुसार उसके लोग बड़ी संख्या में एक दल में कार्यकर्ता के रूप में शामिल होंगे।

संकेतों से पता चल रहा है कि जेडीयू में ऐसे जासूस शामिल होंगे, क्योंकि बीजेपी को आशंका है कि कहीं जेडीयू और कांग्रेस में कोई खिचड़ी तो नहीं पक रही। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बयान से बीजेपी के कान खड़े हो गए हैं कि जो भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगा, उसे वे अपना समर्थन देंगे। उधर कांग्रेस को यह सवाल परेशान कर रहा है कि मुलायम सिंह कब तक उसके साथ टिके रहेंगे।

असल में हर पार्टी को लग रहा है कि आम चुनाव कभी भी हो सकते हैं। दिलचस्प तो यह है कि कांग्रेस और बीजेपी ही नहीं, दूसरी पार्टियों को भी इस बात का पता चल गया है कि अगला उनके यहां जासूसी करवा रहा है। इसलिए वे हर किसी को संदेह के नजरिए से देख रही हैं। बल्कि कुछ जासूसी एजेंसियां तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ही काम कर रही हैं। पिछले दिनों दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कुछ सीनियर लीडरों को सलाह दी गई कि वे पब्लिक से मिलने में थोड़ी सावधानी बरतें। किसी भी कार्यकर्ता से ज्यादा घुलने-मिलने की जरूरत नहीं है। क्या ठिकाना वह कोई जासूस हो और बातों ही बातों में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य उगलवा ले।

कहा गया है कि पत्रकारों से मिलने में भी बेहद सावधानी बरती जाए। पत्रकार बनकर भी कोई जासूस आ सकता है। राजनीतिक पार्टियों के इस डर से निश्चय ही प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों की चांदी हो गई है। उन्होंने अपने रेट बढ़ा दिए हैं। ऐसा मौका बार-बार थोड़े ही मिलता है।


                                                           
प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !! ( join this grup " 5th PILLAR CORROUPTION KILLER " )
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Wednesday, October 24, 2012

" व्यापार " राजनीती का ...क्यों आवश्यक ??

     व्यापारी भाइयों को मेरा नमस्कार ! व प्यार !!
                         मित्रो!! पहले व्यापर सिर्फ हीरे-जवाहरातों का ही होता था , फिर कपडे का, फिर खाद्यान्नों का, फिर मशीनों का,फिर इंसानों का, धरती का और फिर रिश्तों -राजनीती व भावनाओं का भी व्यापार होने लगा इस देश में !! जैसे-जैसे धन की प्रमुखता बढती गयी हमारे जीवन में , वैसे-वैसे व्यापार की " वैरायटी " बढती गयी !! हमने अपने           घर को नहीं छोड़ा तो देश को भला कैसे बक्श देते ?? 

                          लोकतंत्र का नियम था कि जिस राजनितिक दल को बहुमत प्रदान करेगी वो " लोक-सेवक " जनता व देश की बागडोर संभालेगा ....लेकिन जब जनता ने किसी एक राजनितिक दल को बहुमत नहीं दिया ...तो तीन बहाने बना कर हमारे नेताओं ने इस देश में एक नयी परम्परा चला दी, जिसे बहुदलीय - सरकार कहा जाने लगा !!! पहला बहाना था खर्च के बोझ का, दूसरा बहाना लोकतंत्र की स्वस्थ परम्परा का और तीसरा बहाना साम्प्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखने का !!
                          कभी तीसरा मोर्चा बना तो कभी यू.पी.ऐ. जिनको इनमे किसी कारण वश जगह नहीं मिल पायी उन्होंने एन.डी.ऐ.बना लिया !!! ना कोई विचारों का मेल, ना कोई नीतियों का मेल .....बस ..साहब एक घाल -मेल सा बन कर रह गयी ये... हमारी ...राजनीति !! पहले चोर, मवाली और व्यपारी छुपकर इन राजनेताओं की मदद किया करते थे , बाद ये सब भी धीरे-धीरे हमारे " भाग्य -विधाता  " बन गए !!! लोकतंत्र का कोई खम्भा , किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया ....!!!!!
                        देश में  हर तरफ बस " जुगाड़ " ही नज़र आने लगे !! नियम-क़ानून सब बेकार समझे जाने लगे !! आज देश में हालात ये हो गए हैं कि क़ानून-नियम-सिध्धांत की बात करनेवाला पागल समझा जाने लगा है !!......क्यों......????
                           " बुराई "रुपीरावण हर साल बड़ा हो रहा है और  "अच्छाई " रुपी राम छोटा होता जा रहा है !!!...........कलयुग......है शायद इसलिए !! आपका क्या विचार है...??? अवश्य बताएं ..!! मेरा तो बस यही कहना है कि......
                                        अपना    " वोट " कोई जाति,धर्म,इलाका,पार्टी और पहनावा देखकर नहीं बल्कि....सिर्फ शिक्षा, व्यवहार और देश-प्रेम देखकर ही देवें !! सधन्यवाद !! 
                           प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!         मेरे कुछ मित्रों ने मेरी लेखन सामग्री को अपने समाचार-पत्रों में प्रकाशित करने की आज्ञा चाही है ! जिसकी मैं  सहर्ष आज्ञा देता हूँ !! सभी मित्र इसे फेसबुक पर शेयर भी कर सकते है तथा अपने अनमोल विचार भी मेरे ब्लाग पर जाकर लिख सकते हैं !! मेरे ब्लाग को ज्वाईन भी कर सकते है !! 
                                            आपका  मित्र
                                              पीताम्बर दत्त शर्मा 

Sunday, October 21, 2012

" खप गयी - - खाप "....???


 एक थी खाप
एक दिन

हुकुम हुआ
बेटियां ब्याह दी जाएँ
सोलह वर्ष से पूर्व

जनक ने सुना
स्वयंवर रचा
हजारों में
महापराक्रमी राम को चुना
और सोलह वर्ष से पूर्व
ब्याह दी गयी सीता
"फिर भी"
हरण/अग्निपरीक्षा/वन गमन
(अंत में भूमिगत ही होना पड़ा)

एक थे द्रुपद
उन्होंने ने सुना
स्वयंवर रचा
और सौंपी अपनी पुत्री
पांच महापराक्रमी पुरुषों की सुरक्षा में
फिर भी
चीरहरण?..............(क्या पहना था द्रौपदी ने उस समय कहीं मिनी स्कर्ट तो नहीं?)

एक थी अहिल्या............
..................................
..................................

अरे त्रेता के धोबियों
कलयुग में फिर से आ गए
नेता बनकर??
-मृदुला शुक्ला


                                                                                 
प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!

Friday, October 19, 2012

" कांग्रेस पार्टी हाय - हाय ...भाजपा गंगा में नहाय - नहाय "

                                     
 खुर्शीद अपाहिज का पैसा खाए,


सिब्बल की पत्नी कसाईखाना चलाए,

सोनिया विदेश में इलाज कराए,

वाडरा बिन जांच विदेश हो आए,

मनमोहन खुद को बेदाग बताए,

...काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

गरीब के घर ना रोटी पाए,

मनमोहन हजारों की थाली खाए,

बेरोजगारों की गिनती बढ़ती जाए,

चिदम्बरम FDI लेके आए,

राहुल की नौटंकी कौन बताए,

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

दिग्विजय को बोलना कौन सिखाए?

मनमोहन सिंह को कैसे बुलवाए?

CBI जब सरकार बचाए ?

बंगलादेशी वोटिंग कार्ड पाए ?

देश के नागरिक बोल न पाए ?

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

महंगाई डायन सी बढ़ती जाए,

गिरता रुपया वो रोक ना पाए,

पोल उनकी अब खुलती जाए,

पर जनता को ओर दबाए,

ऐसे अर्थशास्त्री से राम बचाए,

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

हा हा हा हा... अट्टहास.(LOL)
Photo: खुर्शीद अपाहिज का पैसा खाए, सिब्बल की पत्नी कसाईखाना चलाए, सोनिया विदेश में इलाज कराए, वाडरा बिन जांच विदेश हो आए, मनमोहन खुद को बेदाग बताए, ...काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... । गरीब के घर ना रोटी पाए, मनमोहन हजारों की थाली खाए, बेरोजगारों की गिनती बढ़ती जाए, चिदम्बरम FDI लेके आए, राहुल की नौटंकी कौन बताए, काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... । दिग्विजय को बोलना कौन सिखाए? मनमोहन सिंह को कैसे बुलवाए? CBI जब सरकार बचाए ? बंगलादेशी वोटिंग कार्ड पाए ? देश के नागरिक बोल न पाए ? काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... । महंगाई डायन सी बढ़ती जाए, गिरता रुपया वो रोक ना पाए, पोल उनकी अब खुलती जाए, पर जनता को ओर दबाए, ऐसे अर्थशास्त्री से राम बचाए, काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।
                                                                              प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!

Thursday, October 18, 2012

रामलीला और राजलीला


रामलीला और राजलीला


रामलीला आ रही है, सभी पूर्व पात्र अपने अपने रंग ढंग में  आने लगे है,  जो पिछले साल का राम था वह कही भगा हुआ है, उसकी जगह किसी नए अपरिपक्व लौंडे ने लिया है और पुराने वाले की तरह का अभिनय करने की कोशिश कर रहा है, हालाकि दोनों ही अभिनयी है लेकिन एक अनुभवी दूसरा "अनु -भवी" . पिछले साल दोनों ने साथ में राम लीला किया था, अबकी मेहनताना में गड़बड़ी हो गयी सो अनुभवी अभिनयी भाग लिया, या यों कहिये नए अभिनवी ने जादा मेह्नाताना के चक्कर में अनुभवी अभिनयी को भगा दिया और खुद नए परोगो से अनुभव जूटा मंझा हुआ अभिनयी बनने की कोशिश कर रहा है , धाय्न रहे सिर्फ अभिनय के लिए. 

खैर, लीला तो  सिर्फ लीला है, और ये होना भी चाहिए, इससे समाज में सन्देश जाए या ना जाये, लेकिन मनोरंजन जरुर होता है. और रामलीला यदि मिडिया प्रायोजित हो तो कसम से मजा दोगुना. इस तरह के रामलीला से किसी को कुछ मिले या न मिले लेकिन मिडिया को टी आर पि जरुर मिलता है और मिडिया को इससे जादा चाहिए भी क्या?? 

हे नकली राम ये कैसा बाण है तुम्हारा ?? छोड़ते हो लेकिन लगता किसी को नहीं ? निशाना गड़बड़ है या डाईरेकटर के हिसाब से हो ? भाई आपके अभिनय  का जो लोहा मानते है वो तो ये भी कहते है की तुम्हारा दिमाग ऐसा  है जिधर मुड़ेगा गोला दागेगा ?भाई गोला दागो, जनता को गोली मत दो, जनता वैसे भी हर प्रकार की गोली और गोले की अभ्यस्त है, जो सरकार समय समय पर दगती ही रहती है . भाई कैसा तोप है आपका ? कहीं लकड़ी का तो नहीं, जिसमे बारूद  की जगह "भूसा" भरा है ? 

आपके मानने वाले आपको सच  का राम समझाते है, खैर मनाने और मनाने का का क्या ?? मेरी दादी  जी आज भी अरुण गोविल  को राम  ही मानती है, किसी धारावाहिक में देखा तो बोल पड़ती है  देखो राम  जी, उनको अरुण गोविल और राम का भेद नहीं पता है. लेकिन इस प्रकार के भोले लोगो के भरोसे अपना अभिनय कब तक जारी रख पाओगे ?  क्योकि आजकल की दुनिया में भोले  लोग कम है और भालू लोग  जादा , भालू भी एइसे जो मधुमख्खी के छत्ते से भी मधु निकाल ले, बिना डरे. 

हे नकली राम, आप तो पहले एसे राम हो जिसका "हनुमान" पहले ही भाग खड़ा हुआ है, या यों कहिये के राजनीति के रामायण के चक्कर में आपने पहले ही भगा रखा है, बिना हनुमान के आप सुंदरी सत्ता , माफ़ करीए सीता तक कैसे पहुचोगे ?? असली राम ने बहुत पापड़ बेले थे , समुद्र बाँध लिया था..भोली जनता के राम बन  ये क्या कर रहे  हो आप ?  मजा तो तब है जब भोली के साथ भालू जनता भी आपके साथ हो, क्या आप भूल गए, सीता के पास पहुचने का मार्ग प्रशस्त करने वाला एक भालू ही था. लेकिन आप है, की भालू को भोला समझाने की भूल कर रहे हैं, और भालू का शहद अकेले डकारने के चक्कर में है. भाई आपसे आग्रह है असली वाला राम ही बनो, न की असली का खोल पहन नकली राम, क्योकि खोल पहनने का काम भेडिये का होता है. आपकी अन्युयाई भोली जनता आपको सचमुच का "राम" समझने लगी है, बहुत ही भ्रम में है है, कृपया इस भ्रम को तोडिये नहीं बिचारे किसी काम के नहीं रह जायेंगे. सूना था आज आपने कोई बड़ा तीर छोड़ने का कहा था, इतना सुनते ही भोली जनता अपना बुध्धि विवेक खो, आपके समर्थन " गोला , तोप , बन्दुक , या, वा" तमाम प्रकार के लेख भी डाले, लेकिन अफ़सोस एसा कुछ नहीं हुआ उनका लिखा बेकार चला गया, आपने बता दिया की आपके लिखने वाले समर्थक ब्रम्हा नहीं, और आपके  लोटे में पेंदा नहीं. आपने उनकी नाक कटा दी , दिल तोड़ दिया, बिचारो को "डी-मोर्लाईज्ड" कर दिया, आपने जिस कब्जे की बात को ले के गडकरी का नाम उछाला , उसी जमीन को आज सुबह सुबह एक किसान पाना बता रहा है और कहता अहि अभी भी हमारे पास है. 

अभी तक आपने जितने भी गोले छोड़े है सब फुस्सी, जितने तीर छोड़े सब रास्ते  ही काट दिए गए, ये असली वाले राम के लक्षण तो नहीं, कृपया अपना असली रूप जल्दी सामने लाये, भोली -भालू जनता को बेवकूफ न बनाये, क्योकि खोल का रंग भी एक समय पे आके उतरने लगता है, तब आपकी पहचान अपने आप होती जाएगी, और समय आपके लिए बड़ा दुखदायी होगा, क्योकि तब न माया मिलेगी न सत्ता, माफ़ करीए सीता. 

आपका एक दर्शक 

कमल कुमार सिंह 
                                                           प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!
                                                       

रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है


रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है

आजकल टेलिविजन वालों को अपना प्राइम टाइम और बहस टाइम का विषय खोजने के लिये पसीना नहीं बहाना पड़ता। उनका यह काम या तो खाप पंचायतें कर देती हैं या माननीय केजरीवालजी। प्राइम टाइम से जैसे जनता का मनोरंजन होता रहता है। केजरीवाल के खुलासों पर अपनी फ़ेसबुकिया राय रखते हुये जगदीश्वर चतुर्वेदी ने लिखा है- केजरीवाल तो समाचार चैनलों के रीयलिटी शो हो गए हैं।
आगे  अपने एक और स्टेटस में वे फ़रमाते हैं-  
कल से केजरीवाल एंड कंपनी के लोग फिर से टीवी चैनलों पर बैठे मिलेंगे और कहेंगे एक सप्ताह बाद हम फिर से फलां-फलां की पोल खोलने जा रहे हैं। गडकरी की पूर्व सूचना वे विज्ञापन की तरह वैसे ही दे रहे थे जैसे कौन बनेगा करोडपति का विज्ञापन दिखाया जाता है। कहने का अर्थ यह है कि केजरीवाल एंड कंपनी अपने प्रचार के लिए राजनीति कम और विज्ञापनकला के फार्मूलों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वे किसी एक मुद्दे पर टिककर जनांदोलन नहीं कर रहे वे तो सिर्फ रीयलिटी शो कर रहे हैं और हरबार नए भ्रष्टाचार पर एक एपीसोड बनाकर पेश कर रहे हैं। रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है।
जिस तेजी से केजरीवाल जी लोगों के काम उजागर कर रहे हैं उससे जो मुझे लगा वह मैंने कल अपने स्टेटस में लिखा:
केजरीवाल जी के काम करने के तरीके से पता चलता है कि वे पुराने नौकरशाह हैं। जैसे नौकरशाह रोज फ़ाइलें निपटाते हैं वैसे ही वे रोज एक नया घपला निपटा देते हैं।
 लगता तो मुझे यह भी है:
केजरीवाल जी और राजनीतिक पार्टियों में भाषाई मतभेद दिखते हैं। जिसको केजरीवालजी ’ राजनीतिक पार्टियों की मिलीभगत ’ मानते हैं उसे राजनीतिक पार्टियां शायद ’शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व’ मानती हैं।
तस्वीरये जो शांतिपूर्ण सह अस्तित्व वाली बात है वह अपने एक कार्टून में राजेश दुबे जी ने भी बयान की है देखिये। मजाक की बात से अलग से हटकर देखा तो समाजवादी चिंतक किशन पटनायक जी  भ्रष्टाचार की समस्या पर विचार करते हुये लिखा है:
  1. सिर्फ भ्रष्टाचार की विशेष घटनाओं के प्रति जन आक्रोश को संगठित किया जा सकता है , किसी एक घटना को मुद्दा बनाकर एक राजनैतिक कार्यक्रम चलाया जा सकता है , जैसे बोफोर्स , बैंक घोटाला इत्यादि । भ्रष्टाचार्करनेवाले व्यक्ति के विरुद्ध प्रचार अभियान चलाकर उसे थोडे समय के लिए बदनाम भी किया जा सकता है ।लेकिन इन कार्यक्रमों से भ्रष्टाचार का उन्मूलन नहीं होता । समाज , राजनीति ,और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार इस तरह के आन्दोलनों के द्वारा प्रभावित नहीं होता है , ज्यों का त्यों बना रहता है ।
  2. ’भ्रष्टाचार – भ्रष्टाचार ’ चिल्लाने से उसमें कोई कमी नहीं आती । इसका मतलब है कि भ्रष्टाचार को नियंत्रण में रखनेवाली स्थितियाँ बिगड़ चुकी हैं और नियंत्रण करनेवाली व्यवस्था में बहुत खोट आ गई है । कभी – कभी भ्रष्टाचार की कुछ सनसनीखेज घटनाओं को लेकर जो भ्रष्टाचार विरोधी वातावरण बनता है या ’ लहर’ देश में पैदा होती है । उसका खोखलापन यह है कि उसमें सामाजिक स्थिति और नियंत्रण व्यवस्था की बुनियादी खामियों पर ध्यान नहीं जाता है । यहाँ तक कि मुख्य अपराधी को दंडित करने के बारे में गंभीरता नहीं रहती । वह सिर्फ एक व्यक्ति-विरोधी या घटना-विरोधी प्रचार होकर रह जाता है । कभी-कभी तो लगता है कि इस प्रकार के विरोधी प्रचार को चलाने के पीछे कुछ निहित स्वार्थ सक्रिय हैं । 
  3. भ्रष्टाचार को जड़ से समझने के लिए निम्नलिखित आधारभूत विकृतियों की ओर ध्यान देना होगा – (१) प्रशासन के ढाँचे की गलतियाँ । जवाबदेही की स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया का न होना , भारतीय शासन प्रणाली का मुख्य दोष है । (२) समाज में आय-व्यय तथा जीवन-स्तरों की गैर-बराबरियाँ अत्यधिक हैं । जहाँ ज्यादा गैर-बराबरियाँ रहेंगी , वहाँ भ्रष्टाचार अवश्य व्याप्त होगा । (३) राष्ट्रीय चरित्र का पतनशील होना ।
  4. भ्रष्टाचार की उत्पत्ति के अन्य बिन्दुओं पर सचमुच मूलभूत परिवर्तन यानी क्रान्तिकारी परिवर्तन की जरूरत होगी । आधुनिक समाज में आर्थिक गैर-बराबरी भ्रष्टाचार की जननी है । जैसे – जैसे गैर-बराबरियों के स्तर अधिक होने लगते हैं , उनके दबाव से निचले स्तरों के लोग वैध तरीकों से ही उच्च स्तर के जीवन तक पहुँचने की कोशिश कर पाते हैं । नई आर्थिक नीतियों के बाद आमदनियों की गैर-बरबरी बहुत बढ़ने लगी है । मध्य वर्ग में से एक ऐसा तबका तैयार हो रहा है,जिसका मासिक वेतन २० हजार रुपये से एक लाख रुपया होगा । इसका जो प्रभाव नीचे के स्तरों पर होगा , उससे जहाँ भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं है , वहाँ अपराध की तीव्रता बढ़ेगी ।
                                                      प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
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Friday, October 12, 2012

" बलात्कार " दोषी कौन.. परिभाषा क्या..????????

   " कभी न कभी - किसी न किसी से कोई न कोई " कार्य - बलात " करवाने वाले सभी सज्जनों , सादर- नमस्कार !! 
                      लेकिन भारत में ज्यादातर लोग इस शब्द का केवल एक ही अर्थ समझते हैं , पता नहीं क्यों ??? और फिर सब महिलाओं को " अबला - निर्दोष- भोली- अंजान " और ना जाने क्या- क्या कहने लग जाते हैं जबकि इस दुनिया में " औरत " देवी होने के साथ - साथ " डाकू , कन्या भ्रूण हत्या करवाने वाली सास, बहु को जलाने वाली, चालबाज़, विषकन्या,सेक्स की भूखी , ओरतों की दलाल " आदि आदि ना जाने क्या क्या होती है !! सब जानते हैं ! लेकिन........
                               टी.वी. चेनलों पर आकर, मोटी बिंदी माथे पे लगाकर, महेश भट्ट जैसे ज्ञानियों व एंकरों के साथ बैठ " महिलाओं के हक़ व आज़ादी " के नाम पर पहले तो ये मक्कार ओरतें हमारी बहु- बेटियों को बिगाडती हैं , विदेशी एजेंटों से भारी धन लेकर, और फिर जब बलात्कार - अनाचार देश में होने लगता है तो कमबख्त यही 15-20 ओरतें उन अत्याचार की शिकार हुईं महिलाओं की " रक्षक " भी बन जाती हैं !! " घाघ- पत्रकार " दोनों बार पैसा कमाकर देश की जनता को मुर्ख बना जाते हैं !!
                       आज आवश्यकता है कि देश में चल रहे कई विषयों पर और देश के संविधान पर             सरकार व्यापक चर्चाएँ आयोजित करवाए तथा जो अंतिम निर्णय निकले , उसे नए क़ानून का रूप दिया जाए !! 
                    ये क्न्हा की न्याय व्यवस्था है की दुसरे पक्ष की बात ही ना सुनी जाए !! " भावनाओं " में बहकर तो निर्णय नहीं दिए जा सकते !!???? ना कोई " पुरुष- पंचायत" और नाही कोई " महिला- पंचायत " अपना फैसला जनता पर थोप सकती है !! सरकारों को ही ज़िम्मेदारी निभानी ही होगी !! 
                   मेरा" कच्ची उम्र " में एक " शादी-शुदा " महिला ने बलात्कार किया था .....बोलो मैं कंहा जाऊं ????? कितने ही पुरुष महिलाओं से पीड़ित हैं कौनसा क़ानून उन्हें बचाता है ....ज़रा बताइये तो !!???
                  प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!

Thursday, October 11, 2012

" छलिया मेरा नाम - छल्ना मेरा काम, हिन्दू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई सबको मेरा सलाम !! ??

        

                                       ‎...........इस बार धोखा मत खाना आप ......
एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक
लड़का दौड़ता आया
‘‘मामाजी ! मामाजी !’’—लड़के ने लपक कर चरण छूए।
वे पहचाने नहीं। बोले—‘‘तुम कौन ?’’
‘‘मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे ?’’ ‘
‘मुन्ना ?’’ वे सोचने लगे।
‘‘हाँ, मुन्ना। भूल गये आप मामाजी ! खैर, कोई बात नहीं, इतने
साल भी तो हो गये।’’
‘मैं आजकल यहीं हूँ।’’
‘‘अच्छा।’’
‘‘हां।’’
मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे। चलो, कोई साथ
तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर। फिर पहुँचे
गंगाघाट।
बोले कि सोचा रहा हूँ , नहा लूँ
‘‘जरूर नहाइए मामाजी ! बनारस आये हैं और नहाएंगे नहीं, यह कैसे
हो सकता है ?’’
मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई। हर-हर गंगे। बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब !
लड़का...मुन्ना भी गायब !
‘‘मुन्ना...ए मुन्ना !’’
मगर मुन्ना वहां हो तो मिले। वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।
‘‘क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है ?’’ ‘‘कौन मुन्ना ?’’
‘‘वही जिसके हम मामा हैं।’’
लोग बोले ‘‘मैं समझा नहीं।’’
‘‘अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।’’
वे तौलिया लपेटे यहां से वहां दौड़ते रहे। मुन्ना नहीं मिला।
......... भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी यही स्थिति है मित्रो ! चुनाव के मौसम में कोई आता है और हमारे चरणों में गिर जाता है। मुझे नहीं पहचाना मैं
चुनाव का उम्मीदवार। होनेवाला एम.पी.। मुझे नहीं पहचाना ?........आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं। बाहर निकलने पर आप देखते हैं कि वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था, आपका वोट लेकर गायब हो गया। वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया। समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं। सबसे पूछ रहे हैं —क्यों साहब, वह कहीं आपको नज़र आया ? अरे वही, जिसके
हम वोटर हैं। वही, जिसके हम मामा हैं। पांच साल इसी तरह तौलिया लपेटे, घाट पर खड़े बीत जाते हैं।.......२०१४ में फिर चनावी स्टेशन पर कांग्रेसी भांजे आपका इंतज़ार करेंगे...........इस बार धोखा मत खाना आप
via ... पूर्णिमा सेठ


                                      


                                              
प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !!

" सेकुलरों की चालबाजियां " - बंटता - " हिन्दू " !!???


                                   

                                         कैसे हिंदुओं को जाति में बांटा गया?
पाइंट 1. बौद्ध और शंकराचार्य के काल में स्मृति और पुराण ग्रंथों में हेरफेर किया गया। इस हेरफेर के चलते ही शास्त्र में उल्लेखित क्षूद्र शब्द के अर्थ को समझे बगैर ही आधुनिक काल में निचले तबके के लोगों को यह समझाया गया कि शस्त्रों में उल्लेखित क्षूद्र शब्द आप ही के लिए इस्तेमाल किया गया है। जबकि वेद कहते हैं कि जन्म से सभी क्षूद्र होते हैं और वह अपनी मेहनत तथा ज्ञा
न के बल पर श्रेष्ठ अर्थात आर्य बन जाते हैं।

क्षूद्र एक ऐसा शब्द था जिसने देश को तोड़ दिया। दरअसल यह किसी दलित के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। लेकिन इस शब्द के अर्थ का अनर्थ किया गया और इस अनर्थ को हमारे आधुनिक साहित्यकारों और राजनीतिज्ञों ने बखूबी अपने भाषण और लेखों में भुनाया।

पाइंट- 2 मध्यकाल में जबकि मुस्लिम और ईसाई धर्म को भारत में अपनी जड़े जमाना थी ‍तो उन्होंने इस जातिवादी धारणा का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और इसे और हवा देकर समाज के नीचले तबके के लोगों को यह समझाया गया कि आपके ही लोग आपसे छुआछूत करते हैं। मध्यकाल में हिन्दू धर्म में बुराईयों का विस्तार हुआ। कुछ प्रथाएं तो इस्लाम के जोरजबर के कारण पनपी, जैसे सतिप्रथा, घर में ही पूजा घर बनाना, स्त्रीयों को घुंघट में रखना आदि।

पाइंट 3- अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो की नीति' तो 1774 से ही चल रही थी जिसके तहत हिंदुओं में उच-नीच और प्रांतवाद की भावनाओं का क्रमश: विकास किया गया अंतत: लॉर्ड इर्विन के दौर से ही भारत विभाजन के स्पष्ट बीज बोए गए। माउंटबैटन तक इस नीति का पालन किया गया। बाद में 1857 की असफल क्रांति के बाद से अंग्रेजों ने भारत को तोड़ने की प्रक्रिया के तहत हिंदू और मुसलमानों को अलग-अलग दर्जा देना प्रारंभ किया।

हिंदुओ को विभाजित रखने के उद्देश्य से ब्रिटिश राज में हिंदुओ को तकरीबन 2,378 जातियों में विभाजित किया गया। ग्रंथ खंगाले गए और हिंदुओं को ब्रिटिशों ने नए-नए नए उपनाप देकर उन्हों स्पष्टतौर पर जातियों में बांट दिया गया। इतना ही नहीं 1891 की जनगणना में केवल चमार की ही लगभग 1156 उपजातियों को रिकॉर्ड किया गया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज तक कितनी जातियां-उपजातियां बनाई जा चुकी होगी।

पाइंट 4- आजादी के बाद में यही काम हमारे राजीतिज्ञ करते रहे। उन्होंने भी अंग्रेजों की नीति का पालन किया और आज तक हिन्दू ही नहीं मुसलमानों को भी अब हजारों जातियों में बांट दिया। बांटो और राज करो की नीति के तहत आरक्षण, फिर जातिगत जनगणना, हर तरह के फार्म में जाति का उल्लेख करना और फिर चुनावों में इसे मुद्दा बनाकर सत्ता में आना आज भी जारी है।

गरीब दलित यह नहीं जानता की हमारी जनसंख्या का फायदा हमें बांटकर उठाया जा रहा है। आजादी के 65 साल में आज भी गरीब गरीब ही है तो क्यों। नेहरुजी कहते थे हम भारत से जातिवाद और गरीबी को मिटा देगें और आज सोनिया भी यही कहती है कि हमें भारत से गरीबी मिटाना है। क्या 65 साल से ज्यादा लगते हैं गरीबी मिटाने के लिए !! 


                                   



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Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

2014 की कॉरपोरेट फंडिग ने बदल दी है देश की सियासत !!

चुनाव की चकाचौंध भरी रंगत 2014 के लोकसभा चुनाव की है। और क्या चुनाव के इस हंगामे के पीछे कारपोरेट का ही पैसा रहा। क्योंकि पहली बार एडीआर न...