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Showing posts from December, 2012

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-...!!!

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रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-


नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं : चर्चामंच-1111

 मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास । आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।
बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये । शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।
रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो । सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।

नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी-  दाम, दामिनी दमन, दम, दंगा दपु दामाद । दरबारी दरवेश दुर, दुर्जन जिंदाबाद ।
दुर्जन जिंदाबाद, अनर्गल भाषण-बाजी । कर शब्दों से रेप, स्वयंभू बनते गाजी ।
बारह, बारह बजा, बीतती जाय यामिनी ।  नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी ।।


मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल- रविकर  विनम्र श्रद्धांजलि 

" रह गयीं अब दुनिया में " नाम " की खुशियाँ , तेरे मेरे किस " काम " की खुशियाँ.....??

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         प्यारे दोस्तों,नमस्कार! आज मैं बहुत उदास हूँ !! जिंदगी साथ छोड़ गयी, मौत ने गले लगा लिया उसको , जो " जीना " चाहती थी !! लेकिन प्रश्न ये उठता है कि अगर वो स्वस्थ होकर हमारे समाज में रहने-जीने हेतु वापिस आ जाती,तो क्या हम और हमारा समाज उसे जीने देता,या मान-शान से रहने देता....????
 ओरत ही ओरत की दुश्मन वाली कहावत तो कंही सच नहीं हो जाती....??

सड़े हुये system और सोये हुये जनतंत्र की परिणती है एक मौत..... कभी- कभी लगता है, क्या सचमुच हमारे देश मे प्रजातन्त्र है? यह कैसा प्रजातन्त्र है, जो राजतंत्र की तरह व्यवहार करता है? अपनी जिद और स्वयं को सर्वोच्च साबित करने के लिए किसी भी हद को पार कर सकता है.... दामिनी की मौत शायद तभी हो गई थी, जब उसे सिंगापूर के लिए रवाना किया गया, आखिर कैसे यह सरकार एक ऐसी शाखिसयत को जिंदा रहने दे सकती थी जो उसे आजीवन तमाचा दीखती रहे...! वो ज़िंदा रहना चाहती थी, लेकिन उसे मार दिया गया। उसे केवल 6 बलात्कारियों ने नही मारा, उसे मारा है आदिकाल से चले आ रहे इस पुरुषत्व के अहंकार ने.... आने वाले समय मे भी शायद कुछ परिवर्तित नहीं होगा, शोक सभाये होंगी, हम…

पहले नए साल की शुभकामनाएँ देंगे और फिर खूब गालियाँ........Happy New Year.........!!????

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उस रात मैं बहुत व्याकुल था। वैसे यहाँ व्याकुल शब्द मुझे कुछ जम नहीं रहा है क्योंकि इसका प्रयोग अक्सर कृष्ण के वियोग में गोप गोपियों के लिए किया जाता है कि वे कृष्ण के विरह में बहुत व्याकुल थे। अब मैं न तो गोप समान मोटा हूँ और न ही गोपियों जैसा कमसिन। तो उस रात मैं बहुत बैचैन था। उस रात यानी किस रात। ३१ दिसम्बर की रात। वर्ष के आखिरी दिन की रात। सब लोगों की तरह मैं भी इन्तज़ार कर रहा था कि कब रात्री के बारह बजें और `कृपाला जी नए साल के रूप में प्रकट हों। कब `हेप्पी न्यू इयर' का खाता खुले। बेचारे सारे मोबाइल ठीक बारह का गजर बजते ही यातनाओं के अँधेरे में सफर करने के लिए बिना वाइब्रेशन मोड के ही उन पर आने वाले संकट की कल्पना से थर थर काँप रहे थे। सबेरे से ही लोग परेशान थे। नया साल जो आने वाला था। ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार ही आ रहा हो। रात के बारह बजते ही एक जोर के धमाके की आवाज़ सुनाई दी। कान के पर्दे शायद फट ही गए थे। थोडा सा पानी कान में डाल कर देखा कि कहीं गले में तो नहीं आ रहा है देख कर संतोष हुआ कि पर्दे अच्छी क्वालिटी के थे। ईश्वर ने पर्दो के टेण्डर में सबसे कम रेट वाले पर्दो जै…

‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’.....!!!???

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‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’ ‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’ – यह नारा लगाते हुए भ्रष्ट संघ ने भारत बंद का आवाहन किया। चूँकि भ्रष्ट होना कोई पाप नहीं है और भारतीय भ्रष्टों ने पिछले कई सौ वर्षों से भी अधिक समय से इसे सप्रमाण सिद्ध भी किया है, इस लिये हर क्षेत्र के भ्रष्टों ने बंद में बढ़-चढ़कर भाग लिया। परिणामस्वरूप सारे सरकारी दफ़्तर बंद हो गये, बाज़ार बंद हो गये, न्यायालय बंद हो गये, पुलिस थाने बंद हो गये, रेल गाड़ियाँ और यात्रा के साधन बंद हो गये और यहाँ तक कि संसद भी बंद हो गई। भ्रष्टों के तर्क मजबूत थे। उनके भारत बंद का आधार मजबूत था और सबसे बड़ी बात यह कि भ्रष्ट लोग मानव हैं, जिनके मानवाधिकारों और उनके शांतिपूर्वक हड़ताल करने के अधिकारों की संविधान भी रक्षा करता है, इस लिये पूरा भारत बंद हो गया। बचे केवल भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन और अनशन करने वाले मुट्ठी भर ईमानदार लोग, जिनकी ईमानदारी शंका के घेरे में आ रही थी तथा सरकार के थोड़े-से मन्त्री, जो इस बंद के समर्थक होते हुए भी राष्ट्रीय कारणों से इसमें शामिल नहीं हो सकते थे।

" वाहवाही " मिले मुझे," गाज़ " गिरे तुझ पे ! क्योंकि मैं नेता और तू कर्मचारी...?????

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 देखलो  ,प्रिय   मित्रो !! लगातार   3बार दिल्ली  की   लोकप्रिय मुख्यमंत्री  श्रीमती  शीला  दीक्षित  जी  और  उनके सुपुत्र सांसद श्री संदीप दीक्षित जी पिछले 4 दिनों से केंद्र सरकार को कह रहे हैं कि दिल्ली के प्रदर्शन को बिगाड़ने में वंहा की " पुलिस"जी का हाथ है.....!! लेकिन गृह-मंत्रालय है की सुनता ही नहीं..!!

                             जब इतने बड़े नेताओं की बात सुनने में ये सरकार इतना वक्त लगाती है तो आम आदमी की बात ये सरकार जल्द सुनेगी,ऐसी उम्मीद ही भला क्यों की जाती है ??? आजकल तो नेताओं के हाथ बहुत ही बढ़िया " फार्मूला " हाथ लगा हुआ है, वो ये की अगर कोई गलत काम जनता के सामने खुल जाये तो झटसे करमचारियों पर गाज़ गिराकर उन्हें " बलि " का बकरा बना दो...!! और अगर कोई वाहवाही का काम भूल से हो जाये तो मालाएं स्वयं  पहन्लो.......!!!!????
                                एक बात ईमानदारी से कहनी पड़ेगी कि इस काम में कांग्रेसी नेता ही निपुण हैं या हो पाए हैं बाकी तो भावुकता में अपनी भूल स्वयं ही मानकर अपने पदों से स्तीफा दे देते है !! हां नयी पनीरी के गडकरी जी और येदिय…

" सरकार के भोंपू, ये आधुनिक....पत्रकार "...??

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                  किसी का साधन बनना, बुरा नहीं होता जब उद्देश्य भलाई का हो ! लेकिन जब सरकार की कमियाँ छिपाने हेतु, उनकी भाषा कोई " पत्रकार "  बोले तो समझो...." मामला गड़बड़ है " ! 
                    आज के नेता अपने आपको किसी राजा, और नेत्रियाँ स्वयं को किसी महारानी से कम नहीं समझतीं ! चाहे वो ग्राम स्तर के ही क्यों ना हो !! इसमें सत्ता के नशे का असर तो होता ही है , कुछ जनता की " जी-हजूरी " का भी दोष होता है ! पुराने भारतीय राजा तो रात को भेष बदल कर जनता के बीच में जाया करते थे, ये जानने हेतु कि उनके राजमे जनता, कैसे अपना जीवन व्यतीत कर रही है! लेकिन आज के नेता सिर्फ चुनावों के समय में ही जनता के बीच में जाते हैं, वो भी सिर्फ वोट लेने और झूठे आश्वासन देने हेतु !!


                      आजके नेता अपने वातानुकूलित कमरे,गाड़ियों और कार्यालय से बाहर निकलकर जनता के बीच जाने में अपनी हेकड़ी समझते हैं !! और उनके इस कदम को न्यायोचित ठहराने हेतु चेनलों वाले किसी रिटायर्ड कर्मचारी,पत्रकार                                                                                    …

" 5th pillar corrouption killer " द्वारा सफलता पूर्वक कराया गया सभी राजनितिक दलों के कार्यकर्ताओं का सम्मलेन ओजस्वी व जागरूक विचारों के आदान-प्रदान से संपन्न !! आगे और कार्यक्रम कराये जाने की अनुशंसा भी प्रकट की...!!

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प्रिय मित्रो, सादर नमन !!    " 5th pillar corrouption killer " द्वारा सफलता पूर्वक कराया गया सभी राजनितिक दलों के कार्यकर्ताओं का सम्मलेन ओजस्वी व जागरूक विचारों के आदान-प्रदान से संपन्न !! आगे और कार्यक्रम कराये जाने की अनुशंसा भी प्रकट की उपस्थित सज्जनों ने !!
                       पूर्व घोषित कार्यक्रमानुसार,सूरतगढ़ की अग्रवाल धरमशाला में गणमान्य नागरिक इकठ्ठे हुए, जिनमे सर्व श्री प्रयाग चन्द अग्रवाल,भागीरथ कडवासरा,श्याम मोदी,एन.डी.सेतिया,पवन मोदी,विनोद गर्ग, के.के. खास्पुरिया,सोहन अग्रवाल,अमित कल्याणा,श्याम नागपाल, अमर सिंह जाटोलिया,संपत बगेरिया,तुलसी राम शर्मा,अरविन्द कौल,महेन्दर जाटव, राजिंदर पटावरी, विजय स्वामी, रामलाल,जसबीर सिंह जस्सा, सहित कई पार्षद, समाजसेवी व कार्यकर्त्ता शामिल थे !! 
                          सर्वप्रथम भारत माता के चित्र का पूजन व पुष्प माल्यार्पण किया गया ! फिर श्री प्रयाग चन्द अग्रवाल जी को कार्यक्रम का अध्यक्ष चुना गया, फिर अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया, फिर " 5th pillar corrouption killer " ब्लॉग के संचालक व लेखक श्री पीता…

" आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!!

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  "प्यार करना" सीख चुके,मेरे सभी मित्रों को  मेरा  सादर प्रणाम !! हिंदी सिनेमा का एक गीत था कि...                                                                                                    " आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!! जो बहुत प्रसिद्ध हुआ था ! आज मुझे अपने देश में इस " रस " की बड़ी कमी सी महसूस हो रही है ना जाने क्यों......!! तुलसी दास जी रामायण में कह गए हैं कि " कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा !! फेसबुक, ट्विटर के जमाने में प्यार के नाम तो हैं,लेकिन सच्चा प्यार कंही नज़र ही नहीं आता !! 
                          मेरे एक प्रिय मित्र डा. पुनीत अग्रवाल जी ने पति-पत्नी के प्यार पर एक कविता लिखी है ......आप भी पढ़िए ज़रा....
थोड़ा मुसकुरा ले----कम से कम तू तो बिक लेती----150012
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थोड़ा मुसकुरा ले।
परेशान पति ने पत्नी से कहा –
‘एक मैं हूं जो तुम्हें निभा रहा हूँ
लेकिन अब,
पानी सर से ऊपर जा चुका है
इस लिये ‘आत्म-हत्या’ करने जा रहा हूँ।’
पत्नी बोली – ‘ठीक है,
लेकिन हमेशा की तरह
आज मत भूल जाना,
और लौट…