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Showing posts from October, 2012

" जलन 50 करोड़ वाली गर्ल फ्रेंड की "...???

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थरूर की पहली बीवी तिलोत्तमा मुखर्जी फिर दूसरी बीवी क्रिस्टा गाइल्स से तलाक हो गया था। उन्होंतने अगस्त 2010 में सुनंदा पुष्कर से शादी की। सुनंदा पुष्कार शशि थरूर की तीसरी बीवी हैं। आईपीएल कोच्चि टीम में सुनंदा की हिस्सेदारी के लिए 70 करोड़ या ज्यादा रकम कहां से आई? इसी को लेकर काफी बवाल मचा। आखिरकार थरूर को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। कश्मीर यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट सुनंदा की शादी दिल्ली में काम करने वाले एक व्यक्ति से हुई थी। 14 साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी। सुनंदा का एक 19 साल का बेटा है। रियल एस्टेट मार्केट में भी उनका दखल बताया जाता रहा है। सुनंदा मूल रूप से कश्मीर के सोपोर जिले की रहने वाली हैं, लेकिन आतंकवाद की वजह से उनका परिवार जम्मू आ गया था। उनके पिता आर्मी में सीनियर ऑफिसर रह चुके हैं। वह 2005 से टीकॉम इंवेस्टमेंट कंपनी में बतौर सेल्स मैनेजर काम कर रही थी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राज्यमंत्री मानव संसाधन विभाग शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर पर टिप्पणी करते हुए उन्हें 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था। मोदी ने क हा था कि संसद में सुनंदा को जानने से इंका…

अन्ना के नए केजरीवाल हैं जनरल वी. के. सिंह.....?????

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    " अन्ना का सेनापति वाक्चातुर्य में कमज़ोर "





नई दिल्ली।सोमवार को एक बार फिर अन्ना हजारे की दहाड़ सुनाई दी। मुंबई में पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के सिंह के साथ मीडिया से मुखातिब हुए अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ठीक उसी अंदाज में अन्ना से किए जा रहे सवालों का जवाब दे रहे थे, जैसे कुछ वक्त पहले तक अरविंद केजरीवाल दिया करते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि सिंह ने वह जगह भर दी है, जो अरविंद केजरीवाल के राजनीति में जाने के बाद खाली हो गई थी।

मुंबई में अन्ना हजारे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना से पूछे गए कई सवालों का जवाब पूर्व सेना प्रमुख ने दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की नई नीतियों के बारे में बताया। अन्ना से पूछे जा रहे टेढ़े सवालों का जवाब सिंह खुद ही दे रहे थे और अपनी तरफ से सफाई भी दे रहे थे। सिंह की यह भूमिका ठीक वैसी ही है, जैसी कि अन्ना के लिए अरविंद केजरीवाल की रही है। जन लोकपाल के लिए चलाए गए आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल ही खुद पहल करके अन्ना से पूछे जाने वाले सवालों के…

" मिलावटी - फेरबदल " जनता को चिढा रहा है..??

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" मिलावट के आदी हो चुके " प्यारे मित्रो,शुद्ध   प्यार भरा नमस्कार स्वीकार करें !!
                            हमारे" पावर - फुल " प्रधानमंत्री जी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया ! जनता और हम जैसे तथाकथित बुद्धिजीवियों ने सोचा था कि जिन्होंने सही तरीके से काम नहीं किया उन्हें बदला जाएगा ....लेकिन हुआ वो जिसकी आशा " चोरों " को थी !! हम जैसे तो हमेशां हाथ मलते ही रह जाते हैं !! उन्होंने ये भी कहा कि हम 5 साल पूरे करेंगे !! तथा ये भी कहा कि " शायद " ये हमारा आखरी विस्तार होगा !! बस !! यही उनकी कही बात मुझे खाए जा रही है !!
                                 प्रधानमंत्रीजी ने ये बात क्यों और किसे कही ??? क्या वो मंत्रिमंडल का विस्तार कर कर के थक गए हैं ??? या वो " हस्ताक्षेप " से परेशान हैं ??? क्या उनकी एक भी कभी नहीं चली ???? क्या वो इतने " भोले " है ...?? या वो ज्यादा " चतुर " हैं ??????
                            कईसरदार टाईप के बुद्धिजीवियों का मानना है कि वो 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री बने रहें , बस इसीलिये सब " सह…

" आज सिर्फ चित्र देखिये मित्रो "....!!!

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 " आज सिर्फ चित्र देखिये मित्रो "....!!!
प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !! ( join this grup " 5th PILLAR CORROUPTION KILLER " )
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपक े प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत शर्मा , हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ ! ( जिला ; श्री गंगानगर, राजस्थान, भारत ) मो.न. 09414657511.फेक्स ; 01509-222768. कृपया आप सब ये ब्लॉग पढ़ें, इसे अपने मित्रों संग बांटें और अपने अनमोल कमेंट्स ब्लाग पर जाकर अवश्य लिखें !! आप ये ब्लॉग ज्वाईन भी कर सकते हैं !! धन्यवाद !! जयहिंद - जय - भारत !! आप सदा प्रसन्न रहें !! ऐसी मेरी मनोकामना है !! मेरे कुछ मित्रों …

" इसका कोई मुकाबला नहीं.. नरेंद्र मोदी भाई कमाल हैं " ...!!!!!

 इसे    पढ़िए, विचारिये और  सबसे  चर्चा  कीजिये..
मोदी जी कि चेन्नई में दी गयी ऐतिहासिक Speech के कुछ अंश -

''
मुझे आज तक इस सेकुलरिस्म शब्द का अर्थ समझ में नहीं आया क्योंकि इसका डिक्शनरी में जो अर्थ दिया गया है वो बिलकुल अलग है उससे जो कि हमारे देश में लागू किया जाता है , एक जमाना था जब हमारे देश में लोग सेकुलरिस्म के बारे में बोलते थे तो उनका मतलब होता था कि अगर आप सभी धर्मों के प्रति समान भाव और सम्मान का भाव रखते हैं तो आप सेकुलर हैं ,


धीरे-२ देश में इसका रंग बदला गया कुछ स्वार्थी तत्वों के द्वारा , धीरे-२ सेकुलरिस्म का मतलब होना शुरू हुआ कि अगर आप मुसलमानों के पक्ष में बोलते हो ,हर बात में उनका बचाव करते हो ,उनकी तरफदारी करते हो चाहे बात गलत ही क्यों ना हो तो आप सेकुलर हो

उसके बाद धीरे-२ इसका रंग फिर बदला और सेकुलरिस्म का मतलब हो गया मुसलमानों का तुष्टिकरण करना ,अगर आप उन्हें बराबरी का नहीं बल्कि दुसरे से ज्यादा महत्व देते हो तो आप सेकुलर हो

उसके बाद फिर इसका रंग बदला और आज इसका मतलब हो गया है हिंदू धर्म से नफरत करना , अगर आप हिंदू होकर भी हिंदू धर्म कि बुराई करते हो ,उसे कमजोर …

" विश्वसनीयता दांव पे सहयोगी नेताओं की "

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कांग्रेस और बीजेपी को चाहिए जासूस:

पिछले कुछ समय में जिस तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदला है, उसने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को ही चिंतित कर दिया है। सबसे बड़ी बात है कि इन्हें अपने ही सहयोगियों पर भरोसा नहीं रह गया है। पता नहीं कब कौन गच्चा दे दे। इसलिए इन दोनों ही दलों ने एक विशेष योजना बनाई है। हाल में एक प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी ने स्वीकार किया कि इन पार्टियों के नेताओं ने उनकी सेवाएं मांगी हैं। उन्हें यूपीए और एनडीए के घटक दलों के महत्वपूर्ण नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखनी है।

इस बात पर गौर करना है कि उनके घर या दफ्तर में उनसे मिलने कौन-कौन आ रहा है। पार्टियां असल में यह देखना चाहती हैं कि कहीं उनके गठबंधन के नेता दूसरे गठबंधन के नेताओं से तो नहीं मिल रहे। वैसे एक निजी जासूसी संस्था ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके अनुसार उसके लोग बड़ी संख्या में एक दल में कार्यकर्ता के रूप में शामिल होंगे।

संकेतों से पता चल रहा है कि जेडीयू में ऐसे जासूस शामिल होंगे, क्योंकि बीजेपी को आशंका है कि कहीं जेडीयू और कांग्रेस में कोई खिचड़ी तो नहीं पक रही। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बयान स…

" व्यापार " राजनीती का ...क्यों आवश्यक ??

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     व्यापारी भाइयों को मेरा नमस्कार ! व प्यार !!
                         मित्रो!! पहले व्यापर सिर्फ हीरे-जवाहरातों का ही होता था , फिर कपडे का, फिर खाद्यान्नों का, फिर मशीनों का,फिर इंसानों का, धरती का और फिर रिश्तों -राजनीती व भावनाओं का भी व्यापार होने लगा इस देश में !! जैसे-जैसे धन की प्रमुखता बढती गयी हमारे जीवन में , वैसे-वैसे व्यापार की " वैरायटी " बढती गयी !! हमने अपने           घर को नहीं छोड़ा तो देश को भला कैसे बक्श देते ?? 

                          लोकतंत्र का नियम था कि जिस राजनितिक दल को बहुमत प्रदान करेगी वो " लोक-सेवक " जनता व देश की बागडोर संभालेगा ....लेकिन जब जनता ने किसी एक राजनितिक दल को बहुमत नहीं दिया ...तो तीन बहाने बना कर हमारे नेताओं ने इस देश में एक नयी परम्परा चला दी, जिसे बहुदलीय - सरकार कहा जाने लगा !!! पहला बहाना था खर्च के बोझ का, दूसरा बहाना लोकतंत्र की स्वस्थ परम्परा का और तीसरा बहाना साम्प्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखने का !!
                          कभी तीसरा मोर्चा बना तो कभी यू.पी.ऐ. जिनको इनमे किसी कारण वश जगह नहीं मिल पा…

" खप गयी - - खाप "....???

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एक थी खाप
एक दिन

हुकुम हुआ
बेटियां ब्याह दी जाएँ
सोलह वर्ष से पूर्व

जनक ने सुना
स्वयंवर रचा
हजारों में
महापराक्रमी राम को चुना
और सोलह वर्ष से पूर्व
ब्याह दी गयी सीता
"फिर भी"
हरण/अग्निपरीक्षा/वन गमन
(अंत में भूमिगत ही होना पड़ा)

एक थे द्रुपद
उन्होंने ने सुना
स्वयंवर रचा
और सौंपी अपनी पुत्री
पांच महापराक्रमी पुरुषों की सुरक्षा में
फिर भी
चीरहरण?..............(क्या पहना था द्रौपदी ने उस समय कहीं मिनी स्कर्ट तो नहीं?)

एक थी अहिल्या............
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अरे त्रेता के धोबियों
कलयुग में फिर से आ गए
नेता बनकर??
-मृदुला शुक्ला

प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !!
आप जो मुझे इतना प्यार दे रहे हैं, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद-शुक्रिया करम और मेहरबानी ! आपकी दोस्ती और प्यार को हमेशां मैं अपने दिल में संजो कर रखूँगा !! आपके प्रिय ब्लॉग और ग्रुप " 5th pillar corrouption killer " में मेरे इलावा देश के मशहूर लेखकों के विचार भी प्रकाशित होते है !! आप चाहें तो आपके विचार भी इसमें प्रकाशित हो सकते हैं !! इसे खोलने हेतु लाग आन आज ही करें :-www.pitamberduttsha…

" कांग्रेस पार्टी हाय - हाय ...भाजपा गंगा में नहाय - नहाय "

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खुर्शीद अपाहिज का पैसा खाए,


सिब्बल की पत्नी कसाईखाना चलाए,

सोनिया विदेश में इलाज कराए,

वाडरा बिन जांच विदेश हो आए,

मनमोहन खुद को बेदाग बताए,

...काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

गरीब के घर ना रोटी पाए,

मनमोहन हजारों की थाली खाए,

बेरोजगारों की गिनती बढ़ती जाए,

चिदम्बरम FDI लेके आए,

राहुल की नौटंकी कौन बताए,

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

दिग्विजय को बोलना कौन सिखाए?

मनमोहन सिंह को कैसे बुलवाए?

CBI जब सरकार बचाए ?

बंगलादेशी वोटिंग कार्ड पाए ?

देश के नागरिक बोल न पाए ?

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

महंगाई डायन सी बढ़ती जाए,

गिरता रुपया वो रोक ना पाए,

पोल उनकी अब खुलती जाए,

पर जनता को ओर दबाए,

ऐसे अर्थशास्त्री से राम बचाए,

काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... ।

हा हा हा हा... अट्टहास.(LOL)
Photo: खुर्शीद अपाहिज का पैसा खाए, सिब्बल की पत्नी कसाईखाना चलाए, सोनिया विदेश में इलाज कराए, वाडरा बिन जांच विदेश हो आए, मनमोहन खुद को बेदाग बताए, ...काँग्रेस पार्टी हाय-हाय...... । गरीब के घर ना रोटी पाए, मनमोहन हजारों की थाली खाए, बेरोजगारों की गिनती बढ़ती जाए, चिदम्बरम FDI लेके आए, राहुल की नौटंकी कौन बताए, काँग्रेस पार्टी हाय-हा…

रामलीला और राजलीला

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रामलीला और राजलीला
रामलीला आ रही है, सभी पूर्व पात्र अपने अपने रंग ढंग में  आने लगे है,  जो पिछले साल का राम था वह कही भगा हुआ है, उसकी जगह किसी नए अपरिपक्व लौंडे ने लिया है और पुराने वाले की तरह का अभिनय करने की कोशिश कर रहा है, हालाकि दोनों ही अभिनयी है लेकिन एक अनुभवी दूसरा "अनु -भवी" . पिछले साल दोनों ने साथ में राम लीला किया था, अबकी मेहनताना में गड़बड़ी हो गयी सो अनुभवी अभिनयी भाग लिया, या यों कहिये नए अभिनवी ने जादा मेह्नाताना के चक्कर में अनुभवी अभिनयी को भगा दिया और खुद नए परोगो से अनुभव जूटा मंझा हुआ अभिनयी बनने की कोशिश कर रहा है , धाय्न रहे सिर्फ अभिनय के लिए. 
खैर, लीला तो  सिर्फ लीला है, और ये होना भी चाहिए, इससे समाज में सन्देश जाए या ना जाये, लेकिन मनोरंजन जरुर होता है. और रामलीला यदि मिडिया प्रायोजित हो तो कसम से मजा दोगुना. इस तरह के रामलीला से किसी को कुछ मिले या न मिले लेकिन मिडिया को टी आर पि जरुर मिलता है और मिडिया को इससे जादा चाहिए भी क्या?? 
हे नकली राम ये कैसा बाण है तुम्हारा ?? छोड़ते हो लेकिन लगता किसी को नहीं ? निशाना गड़बड़ है या डाईरेकटर के …

रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है

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रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है चर्चाकारः अनूप शुक्ल आजकल टेलिविजन वालों को अपना प्राइम टाइम और बहस टाइम का विषय खोजने के लिये पसीना नहीं बहाना पड़ता। उनका यह काम या तो खाप पंचायतें कर देती हैं या माननीय केजरीवालजी। प्राइम टाइम से जैसे जनता का मनोरंजन होता रहता है। केजरीवाल के खुलासों पर अपनी फ़ेसबुकिया राय रखते हुये जगदीश्वर चतुर्वेदी ने लिखा है- केजरीवाल तो समाचार चैनलों के रीयलिटी शो हो गए हैं।
आगे  अपने एक और स्टेटस में वे फ़रमाते हैं-
कल से केजरीवाल एंड कंपनी के लोग फिर से टीवी चैनलों पर बैठे मिलेंगे और कहेंगे एक सप्ताह बाद हम फिर से फलां-फलां की पोल खोलने जा रहे हैं। गडकरी की पूर्व सूचना वे विज्ञापन की तरह वैसे ही दे रहे थे जैसे कौन बनेगा करोडपति का विज्ञापन दिखाया जाता है। कहने का अर्थ यह है कि केजरीवाल एंड कंपनी अपने प्रचार के लिए राजनीति कम और विज्ञापनकला के फार्मूलों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वे किसी एक मुद्दे पर टिककर जनांदोलन नहीं कर रहे वे तो सिर्फ रीयलिटी शो कर रहे हैं और हरबार नए भ्रष्टाचार पर एक एपीसोड बनाकर पेश कर रहे हैं। रियलिटी शो से करप्शन वैध बनता है…

" बलात्कार " दोषी कौन.. परिभाषा क्या..????????

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   " कभी न कभी - किसी न किसी से कोई न कोई " कार्य - बलात " करवाने वाले सभी सज्जनों , सादर- नमस्कार !! 
                      लेकिन भारत में ज्यादातर लोग इस शब्द का केवल एक ही अर्थ समझते हैं , पता नहीं क्यों ??? और फिर सब महिलाओं को " अबला - निर्दोष- भोली- अंजान " और ना जाने क्या- क्या कहने लग जाते हैं जबकि इस दुनिया में " औरत " देवी होने के साथ - साथ " डाकू , कन्या भ्रूण हत्या करवाने वाली सास, बहु को जलाने वाली, चालबाज़, विषकन्या,सेक्स की भूखी , ओरतों की दलाल " आदि आदि ना जाने क्या क्या होती है !! सब जानते हैं ! लेकिन........
                               टी.वी. चेनलों पर आकर, मोटी बिंदी माथे पे लगाकर, महेश भट्ट जैसे ज्ञानियों व एंकरों के साथ बैठ " महिलाओं के हक़ व आज़ादी " के नाम पर पहले तो ये मक्कार ओरतें हमारी बहु- बेटियों को बिगाडती हैं , विदेशी एजेंटों से भारी धन लेकर, और फिर जब बलात्कार - अनाचार देश में होने लगता है तो कमबख्त यही 15-20 ओरतें उन अत्याचार की शिकार हुईं महिलाओं की " रक्षक " भी बन जाती हैं !! " घाघ-…

" छलिया मेरा नाम - छल्ना मेरा काम, हिन्दू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई सबको मेरा सलाम !! ??

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‎...........इस बार धोखा मत खाना आप ......
एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक
लड़का दौड़ता आया
‘‘मामाजी ! मामाजी !’’—लड़के ने लपक कर चरण छूए।
वे पहचाने नहीं। बोले—‘‘तुम कौन ?’’
‘‘मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे ?’’ ‘
‘मुन्ना ?’’ वे सोचने लगे।
‘‘हाँ, मुन्ना। भूल गये आप मामाजी ! खैर, कोई बात नहीं, इतने
साल भी तो हो गये।’’
‘मैं आजकल यहीं हूँ।’’
‘‘अच्छा।’’
‘‘हां।’’
मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे। चलो, कोई साथ
तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर। फिर पहुँचे
गंगाघाट।
बोले कि सोचा रहा हूँ , नहा लूँ
‘‘जरूर नहाइए मामाजी ! बनारस आये हैं और नहाएंगे नहीं, यह कैसे
हो सकता है ?’’
मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई। हर-हर गंगे। बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब !
लड़का...मुन्ना भी गायब !
‘‘मुन्ना...ए मुन्ना !’’
मगर मुन्ना वहां हो तो मिले। वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।
‘‘क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है ?’’ ‘‘कौन मुन्ना ?’’
‘‘वही जिसके हम मामा हैं।’’
लोग बोले ‘‘मैं समझा नहीं।’’
‘‘अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।’’
वे तौलिया लपेटे यहां से वहां दौड़ते रहे। मुन्ना नहीं मिला।
.....…

" सेकुलरों की चालबाजियां " - बंटता - " हिन्दू " !!???

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कैसे हिंदुओं को जाति में बांटा गया?
पाइंट 1. बौद्ध और शंकराचार्य के काल में स्मृति और पुराण ग्रंथों में हेरफेर किया गया। इस हेरफेर के चलते ही शास्त्र में उल्लेखित क्षूद्र शब्द के अर्थ को समझे बगैर ही आधुनिक काल में निचले तबके के लोगों को यह समझाया गया कि शस्त्रों में उल्लेखित क्षूद्र शब्द आप ही के लिए इस्तेमाल किया गया है। जबकि वेद कहते हैं कि जन्म से सभी क्षूद्र होते हैं और वह अपनी मेहनत तथा ज्ञा न के बल पर श्रेष्ठ अर्थात आर्य बन जाते हैं।

क्षूद्र एक ऐसा शब्द था जिसने देश को तोड़ दिया। दरअसल यह किसी दलित के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। लेकिन इस शब्द के अर्थ का अनर्थ किया गया और इस अनर्थ को हमारे आधुनिक साहित्यकारों और राजनीतिज्ञों ने बखूबी अपने भाषण और लेखों में भुनाया।

पाइंट- 2 मध्यकाल में जबकि मुस्लिम और ईसाई धर्म को भारत में अपनी जड़े जमाना थी ‍तो उन्होंने इस जातिवादी धारणा का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और इसे और हवा देकर समाज के नीचले तबके के लोगों को यह समझाया गया कि आपके ही लोग आपसे छुआछूत करते हैं। मध्यकाल में हिन्दू धर्म में बुराई…