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Showing posts from August, 2012

" उल्लू के पठ्ठों की पंचायत "

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एक बार एक हंस और एक हंसिनी जंगल
में घूम रहे थे बातों बातों में समय
का पता नहीं चला शाम हो गयी,
वो अपने घर का रास्ता भूल गए और
चलते-चलते एक सुनसान जगह पर एक पेड़
के नीचे जाकर रुक गए .
हंसिनी बोली मैं बहुत थक गयी हूँ
चलो रात यहीं बिताते हैं सुबह होते
ही चलपड़ेंगे. हंस बोला ये बहुत
सुनसान और वीरान जगह लगती है
(----''यहाँ कोई उल्लू
भी नहीं रहता है''-----) चलो कोई
और जगह देखते हैं. उसी पेड़ पर बैठा एक
उल्लू हंस और हंसिनी बातें सुन
रहा थावो बोला आप लोग घबराएँ
नहीं मैं
भी यहीं रहता हूँ ,डरने की कोई बात
नहीं है आप सुबह होते ही चले
जाईयेगा. हंस और हंसिनी उल्लू
की बात मानकर वहीँ ठहर गए .
सुबह हुई हंस और हंसिनी चलने लगे
तो उल्लू ने उन्हें रोक लिया और हंस
से बोला तू हंसिनी को लेकर
नहीं जा सकता ये मेरी पत्नीहै. हंस
बोला भाई ये क्या बात कर रहे
हो तुम जानते
हो कि हंसिनी मेरी पत्नी है. उल्लू
बोला नहीं हंसिनी मेरी पत्नी है तू
इसे लेकर नहीं जा सकता . धीरे-
धीरे झगड़ा बढ गयाऔर तू-तू में-में
होने लगी . उल्लू हंस की बात मानने
को तैयार ही नहीं था .
तभी चतुराई से उल्लू बोला
कि हम पंचों से इ…

" मेरा - भारत - महान " ?????

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समाज का जो तबका मकान नहीं बनाता पर बड़े मकान में रहता है ! जो लोग अनाज नहीं उगाते पर जिनके अन्न भण्डार भरे हुए ही रहते हैं ! जो गाय नहीं चराते पर दूध मक्खन से तर रहते हैं ! जो ताल में जाल नहीं फेंकते लेकिन सबसे बढ़िया मछली खाते हैं ! जो कारखाने में मशीन नहीं चलाते लेकिन सारा उत्पादन जिनके उपभोग के लिये होता है !
यही तबका राजनीति की दिशा तय करता है ! वही तय करता है कृषी नीति क्या होनी चाहिये ! वही बताते हैं कि मजदूरों को कितने अधिकार दिये जा सकते हैं ! यही लोग तय करते हैं कि गरीब की अधिकारों की लड़ाई कितनी नैतिक और कब अनैतिक है ! यही तबका तय करने की कोशिश कर रहा है कि गरीब कैसे और किन हथियारों से लड़े !
यही तबका कांग्रेस का नेता है यही भाजपा के शीर्ष पर है , यही वामपंथी पार्टियों के नेता हैं , यही नक्सली दलों में चोटी पर बैठे हैं ! यही तबका गांधीवादी हैं ! यही धार्मिक और सांस्कृतिक तबका है ! यही कवि है ! संसद के मालिक यही , अदालत में जज इसी तबके के , सेना में अफसर भी यही हैं , बुद्धिजीवी भी इसी तबके के हैं , सारे एनजीओ इसी तबके के लोगों के हैं !
सरकार
 इनकी , मोदी इनका , मोदी के विरोधी भी यही…

भगवान के कल्कि अवतार से होगा कलयुग का अंत !!! ????

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भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं| भगवान विष्णु ईश्वर के तीन मुख्य रुपों में से एक रूप हैं इन्हें त्रिमूर्ति भी कहा जाता है ब्रह्मा विष्णु, महेश के मिलन से ही इस त्रिमूर्ति का निर्माण होता है| सर्वव्यापक भगवान श्री विष्णु समस्त संसार में व्याप्त हैं कण-कण में उन्हीं का वास है उन्हीं से जीवन का संचार संभव हो पाता है संपूर्ण विश्व श्री विष्णु की शक्ति से ह ी संचालित है वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं|

पुराणों में भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन है। इनमें से नौ अवतार हो चुके हैं, दसवें अवतार का आना अभी शेष है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कल्कि अवतार कहलाएगा। पुराणों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह अवतार होगा, इसलिए इस दिन कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाता है।

भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार-

जब-जब पृथ्वीलोक पर धर्म की हानि हुई तब- तब भगवान विष्णु ने अपने भक्तों को बचाने व धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिए| भगवान विष्णु के कुछ अवतार इस प्रकार हैं-

मत्स्य अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली का रूप धरा और पृथ्वी के जल मग्न …

" हमलावर " बनाती सांसदों को " हमारी सोनिया जी" ....????

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      " हमला " सहने वाले सभी मित्रों को मेरा शान्ति भरा नमस्कार !! कृपया सभी मित्र स्वीकार करें !!!!
                              "माता,                                                  पिता,चाचा,चाची,मामा, मामी,भाई,बहन,और दादा दादीआदि रिश्तेदार एवं हमारे गुरुजन जब हम पर कोई गुस्सा या हमारे शरीर पर कोई चोट     ( हमला ) करते हैं तो वो हमारे भले के लिए होता है !! लेकिन अगर हमारा नेता " हमलावर " हो जाये जैसा की u.p.a.की अध्यक्षा जी कह रही हैं अपने सांसदों को तो क्या वो हमारे भले के लिए होगा ??? हमारे नेता तो पहले से ही " हिंसक " हुए पड़े हैं !!ऊपर से उनका नेत्रित्व करने वाले ही जब ऐसा निर्देश देंगे तो वो क्या- क्या " गुल " खिलाएंगे, ये सब राजनीति के जानकार लोग भली भाँती समझ सकते हैं !!
                                  अभी,ही ये हालात हैं कि हमारे नेता लोग " कार्यपालिका,न्यायपालिका और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ यानी मिडिया को भी कुछ नहीं समझते    , उनका वे जब भी जैसा जी में आता है, वैसा इनका इस्तेमाल करते हैं !! आजकल तो " डांटने- डपटने &q…

" कृषि प्रधान " देश नहीं ये " बलात्कार प्रधान " देश है !!??

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आखिर ये मुँह ही तो थक चुका था यह कहते कहते कि भारत एक कृषि प्रधान देश है ,भारत एक कृषि प्रधान देश है। इस वाक्य को मंत्र की तरह बार बार, बार बार दुहराना होता था।लेखों में तो, भाषणों में तो, सभी जगह कृषि प्रधान देश था भारत। किसान सूखे से तबाह हो जाता था, बाढ में चौपट हो जाता था, फसल पर पाला पड़ जाता था, खलिहान में आग लग जाती थी, बेमौसम की बरसात किये कराये पर पानी फेर देती थी, पर देश कृषि प्रधान ही बना रहता। हम इसे अपनी मौलिक सोच की तरह कहते थे तो पता चलता था कि ये तो नकल है और जब दूसरे भी यही दुहराते तो ऐसा लगता था जैसे कि मेरी नकल कर रहे हों । झल्लाहट होती थी यह सुन सुन कर कि कौन किसकी नकल कर रहा है- मातृवत परदारेषु जैसा मामला था कि हमारी बीबी तुम्हारी माता, तुम्हारी बीबी हमारी माता पता नहीं कि हम तुम्हारे बाप या तुम हमारे।      
       आजादी आने के बाद भी लम्बे समय तक देश कृषि प्रधान ही बना रहा, यहाँ तक कि शर्म आने लगी कि यह  अभी तक कृषि प्रधान ही बना हुआ है। दूसरे देश कहाँ से कहाँ तक की प्रधानी पर पहुँच गये और एक हम हैं कि अभी तक वहीं के वहीं डले हुए हैं। बगल वाला पाकिस्तान तक आतंक प्…

लौह अयस्क में भी दो हजार करोड़ का घोटाला !! ???

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ठ्ठ नीलू रंजन, नई दिल्ली केंद्र सरकार के हजारों करोड़ रुपये के घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन, कोयला ब्लाक आवंटन व दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निजीकरण में घोटाले के बाद अब नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएमडीसी) द्वारा लौह अयस्कों की बिक्री में घोटाले का पर्दाफाश कैग ने किया है। खास बात यह है कि खुद स्टील मंत्रालय इस घोटाले पर मुहर लगा रहा है। एनएमडीसी के ऑडिट के दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को लौह अयस्कों को बेहद कम कीमत पर बेचे जाने के सुबूत मिले हैं। कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार इससे सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैग के इस आकलन से स्टील मंत्रालय भी सहमत है। पिछले एक महीने में कार्मिक मंत्रालय को भेजे गए दो पत्रों में स्टील मंत्रालय ने एनएमडीसी में लौह अयस्क की बिक्री में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र किया है। कार्मिक मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार घोटाले की स्वीकारोक्ति के पीछे स्टील मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा 
की मंशा कई महीने से खाली चल रहे एनएमडीसी के सीएमडी के पद पर मनपसंद अधिकारी को ब…

" क्यों चुप हैं तथाकथित सेकुलर और मिडिया " डर गए क्या ????

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इस 11 अगस्त (शनिवार) को मुम्बई के आजाद मैदान पर मुस्लिमों द्वारा हिंसा का जो दृश्य खड़ा किया गया वह सोचने पर मजबूर करता है कि राजनीतिक सत्ता पाने के लिए देश विभाजन के रूप में जो महंगा मूल्य चुकाया गया, अब 65 वर्ष बाद क्या खंडित भारत पुन:विभाजन के कगार पर पहुंच गया है? 13 अगस्त के अंग्रेजी दैनिक 'हिन्दू' में प्रकाशित मुम्बई पुलिस की आंतरिक जांच रपट के अनुसार असम के बोडो क्षेत्र और म्यांमार में अराकान प्रांत के रोहिंगिया या मुसलमानों के प्रति सहानुभूति और समर्थन के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के नाम पर आयोजित सभा में पुलिस और टेलीविजन चैनलों पर हमले की पूरी तैयारी पहले से की गयी थी। पुलिस रपट में बताया गया है कि मंच पर 17 वक्ता थे। उनमें से केवल पांच के भाषण पूरे हो पाये थे। पांचवें वक्ता मौलाना गुलाम अब्दुल कादरी का भड़काऊ भाषण चल ही रहा था कि झंडे, बैनर ही लेकर 1000 मुस्लिम युवकों की भीड़ छत्रपति शिवाजी टर्मिनल रेलवे स्टेशन से बाहर निकली और शांति व्यवस्था के लिए तैनात पुलिस दल व सभा को 'कवर' करने के लिए टीवी चैनलों की 'ओबी बैन' पर टूट पड़ी। वाहनों में आग लगा द…

" हर दर्द की दवा है ...ये समय " !!

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  समय की कद्र करने वाले सभी मित्रों को मेरा "सामयिक"नमस्कार !! कृपया स्वीकारें !
        इंसान की फितरत है की वो हर दर्द को कुछ समय के पश्चात् भूल जाता है, चाहे वो कितनी भी बड़ी " चोट " क्यों ना हो !! घरेलू चोट चंद दिनों में, समाज की चोट चन्द हफ़्तों में, दोस्तों,रिश्तेदारों की चोट चंद महीनों या सालों में और नेताओं की चोट 5-10 सालों में भूल जाता है !! लेकिन कई चोटें ऐसी होतीं हैं ,जो भुलाये नहीं भूलतीं, जैसे इस निक्कम्मी सरकार का एक मंत्री श्री बेनीप्रसाद वर्मा जी दे रहे हैं!
          वो फरमाते हैं कि " मुझे ख़ुशी होती है जब मंहगाई बढती है " !!!??उनकी अपनी अजीब दलील है की इससे किसानों को फायदा होता है !!?? अब मैं इनको पागल कंहूँ या उनको जिन्होंने इन्हें मंत्री बनाया है ??? ये सरकार लगातार जनता को ऐसी - ऐसी चोटें पंहुचा रही है कि पूछो मत !! जनता इन चोटों को भूला पायेगी ऐसा मुझे नहीं लगता !! आपको ऐसा लगता है क्या ?? क्या जनता अगले चुनावों में इन चोटों का बदला इन ढीठ नेताओं को चुनावों में हराकर लेगी ?????
            आप अपने विचारों को हमारे ब्लॉग " 5TH PI…

" फांसी पर चढाओ उनको, जिन्होंने कलमाड़ी जी को चोर कहा था " ???????

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 " झूठे इल्जामों से बदनाम " हो चुके मेरे इमानदार मित्रो !! चमकदार सफाई वाला नमस्कार स्वीकारिये जी !                                                                                     आज कलथोडा सा आदमी कुछ बन जाये सही, बस पूछो मत जी, दोस्त कम - दुश्मन ज्यादा बन जाते हैं आदमी के !! ऐसा ही अपने कलमाड़ी जी के साथ हुआ

  है ! अगले  की सारी इज्ज़त मिटटी में मिलादी इन   इलेक्ट्रोनिक  मिडिया  ,प्रिंट मिडिया और सोशल  मिडिया  वालों   ने  !!!!?????        
 c.b.i. वाले   अब कह  रहे   हैं   की   उनका कंही  नाम ही नहीं था !! वो तो बस ऐसे ही शोकिया जेलयात्रा कर आये थे !! ???
           आप भी अपने विचार लिखिए हमारे ब्लॉग पर जिसका नाम है " 5th pillar corrouption killer " और जिसका लिंक है  :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. हमारी बातें अच्छीं लगें तो शेयर भी अवश्य करें !!

आजादी के 65 साल बीत जाने के बाद देश के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं और इसके क्या कारण हैं ?

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वास्तव में प्रजातंत्र हिन्दू का स्वभाव है। यह अंग्रेजों की देन है, ऐसा मैं नहीं मानता। प्रजा क्या चाहती है, उसका हमारे यहां पंचायतों के माध्यम से गांव-गांव में निराकरण किया जाता था और न्याय भी उस आधार पर होता था। पंचायतों के माध्यम से कानून का पालन भी होता था। यानी प्रजातंत्र हमारे स्वभाव में है। मगर अंग्रेजों ने जिस प्रकार का प्रजातंत्र हमें दिया है वह पूरे देश के लिए सोचने और विचारने का विषय है। प्रजातंत्र आज बड़े-बड़े हिंसक समाजों और जातिवादी घृणा पैदा करने वालों के हाथों में जा रहा है। वे धीरे-धीरे समाज का नेतृत्व कर रहे हैं। यह प्रजातंत्र हमारे देश को विनाश की ओर ले जा रहा है। पूरे देश को सोचना पड़ेगा कि क्या ऐसे तत्वों के हाथों में देश का भविष्य-भवितव्य देना चाहिए?
ऐसा नेतृत्व जब हमारे सामने खड़ा हो गया है तो उसके दुष्परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। भ्रष्टाचार के ऐसे मामले उजागर होने लगे हैं, जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। कालेधन की चर्चा चारों ओर होने लगी है। यह सब भारतीय स्वभाव के बिल्कुल प्रतिकूल हो रहा है। इस प्रकार का प्रजातंत्र हमारे यहां कभी रहा ही नहीं। इसे अंग्रेजों …

" डरो-मत , मुकाबला करो,इन दंगाइयों का " !!

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 मुकाबला करने वाले सभी मित्रों को मेरा झुक कर सलाम !!                                                                                                                                   गुंडे - बदमाश चाहे वो कंही के हों, उनका डट कर मुकाबला करना ही चाहिए !! सरकार चाहे उनसे डर कर उनकी हिंसा की जांच ना कराये , उन पर कंट्रोल ना कर सके, मीडिया चाहे अपना मुंह बंद करले , तो भी आप सब मिलकर अपनी सुरक्षा करें !! मिडिया  की तो हमेशां से  यही चाल रही है की जब हम अपनी रक्षा  करने लगते  हैं तभी वो चीखता है की देखो हिंदुस्तान में " सेकुलर " मारे जा रहे हैं !! 
                   हमें अपनी जान बचाने का पूर्ण अधिकार इस देश संविधान ने दे रख्खा है !!
 सब " साम्प्रदायिक शक्तियों " एक हो जाओ !!
  चुप मत बैठो,उठो !! लड़ो !! भाजपा, चाहे चुप रहे !!....... भागो मत !!!

" आओ देश को साफ़ करें " ! ! !

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 सफाई पसंद सभी मित्रों को मेरा नमस्कार !! 
  आज सब जान गए हैं की हमारा वतन पूरी तरह से गन्दा हो चुका है ! जिसमे हमारा भरपूर हाथ है ! एक पुरानी कहावत है कि " चोर को मारने से पहले, उसकी माँ को मारो" ! इसलिए क्योंकि हम सब ही चोर की "माँ " हैं !! सबसे पहले हमें,अपने-आप को ही मारना पड़ेगा !!?? यानीकि अपनी " इच्छाओं" को मारना पड़ेगा !! इच्छाएं सीमित हो जाएँगी तो भ्रष्टाचार अपने आप कम हो जायेंगी !! क्योंकि धन के पीछे भागना हमारा बंद हो जाएगा !!
               फिर हमें " झाड़ू " उठाना पड़ेगा और जंहाँ भ्रष्टाचार हो रहा हो वंहा सफाई करदो !! आप पूछोगे कि वो कैसे ??? तो मित्रो,वो ऐसे कि " सब अपने मोबाईल                                       से हो रहे भ्रष्टाचार की मूवी बनाओ और यू-ट्यूब में लोड करदो " फिर देखना सब भ्रष्टाचारी जैसे-जैसे नंगे होते जायेंगे वैसे वैसे ये कम होते जायेंगे !! अगर फिर भी अगर ऐसा काम हो तो सब मिलकर एक" छित्तर-पार्टी " बनाओ !! जूतों की माला पहनाओ, गधे पर बिठा कर " शोभायात्रा " निकालो !! शर्तिया इलाज है ये !! 
   …

" मन्नू " बाबा बोलेंगे लाल किले की प्राचीर से क्या ..???

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 कभी कभी बोलने वाले मित्रों को मेरा नमस्कार !!
  हमारे माननीय प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी , 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से क्या बोलेंगे यही भारत और विश्व रहा सोच है । अन्ना टीम रो - रो कर थक गयी और शायद बिखरने के कगार  पर पंहुच गयी है और बाबा रामदेव जी भी संसद को चल पड़े हैं रामलीला मैदान को त्यागकर !!
  सरकार ससुरी सो रही है !!
                              मिडिया भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है यानी " पैसा फेंको तमाशा देखो " ?? 10-10 दिनों के आन्दोलनों पर भी सरकार के कानों पर " जूँ " तक नहीं रेंगती , तो जनता बेचारी इस भारी मंहगाई में रोटी का इंतजाम करे या लम्बे आन्दोलन करे ??? ये बात सरकार भी जानती है !!
      अब तो किसी को जबरदस्ती सत्ता परिवर्तन करना पड़ेगा या जनता को " समझदार " बनना पड़ेगा ......!!! क्योंकि इस लोकतंत्र के सारे रास्ते " नेताओं के चरणों " के नीचे से होकर गुज़रते हैं !!! और नेता तो नेता होता है जी ??????
                              आपका क्या विचार है जी ??? 
     " 5th pillar corrouption killer " पर जाकर टाईप करे…

क्या आप जानते है की कोई मीडिया समूह हिन्दू या हिन्दू संघठनो के प्रति इतना बैरभाव क्यों रखती है.

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-भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नहीं…
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सन २००५ में एक फ़्रांसिसी पत्रकार भारत दौरे पर आया उसका नाम फ़्रैन्कोईस था उसने भारतमें हिंदुत्व के ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में अध्ययन किया और उसने फिर बहुत हद तक इस कार्
य के लिए मीडिया को जिम्मेवार ठहराया.
फिर उसने पता करना शुरू किया तो वह आश्चर्य चकित रह गया की भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नहीं… फीर मैंने एक लम्बाअध्ययन किया उसमे निम्नलिखित जानकारी निकल कर आई जो मै आज सार्वजानिककर रहा हु ..
विभिन्न मीडिया समूह और उनका आर्थिक श्रोत……
१-दि हिन्दू … जोशुआ सोसाईटी , बर्न, स्विट्जरलैंड , इसके संपादक एन राम , इनकी पत्नी ईसाई में बदल चुकी है.
२-एन डी टी वी … गोस्पेल ऑफ़ चैरिटी, स्पेन , यूरोप
३-सी एन एन , आई बी एन ७,सी एन बी सी …१००% आर्थिक सहयोग द्वारा साउदर्न बैपिटिस्ट चर्च
४-दि टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नवभारत , टाइम्स नाउ… बेनेट एंड कोल्मान द्वारासंचालित ,८०% फंड वर्ल्ड क्रिस्चियन काउंसिल द्वारा , बचा हुआ २०% एक अँगरेज़ और इटैलि…

* पूरे विश्व को सभ्यता हमने सिखाई और आज हम उनसे सभ्यता सिख रहे हैं ==========================================

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ध्यान-साधना, योग, आयुर्वेद, ये सारी अनमोल चीजें हमारी विरासत थी लेकिन अंग्रेजों ने हम लोगों के मन में बैठा दिया कि ये सब फालतू कि चीज़े हैं और हम लोगों ने मान भी लिया पर आज जब उनको जरुरत पड़ रही हैं इन सब चीजों कि तो फिर से हम लोगों कि शरण में दौड़े-भागे आ रहे हैं और अब हमारा योग 'योगा' बनकर हमारे पास आया तब जाकर हमें एहसास हो रहा हैं कि जिसे हम कंचे समझकर खेल रहे थे, वो हीरा था। उस आयुर्वेद के ज्ञान को विदेशी वाले अपने नाम से पेटेंट करा रहे हैं जिसके बाद उसका व्यापारिक उपयोग हम नहीं कर पायेंगे। इस आयुर्वेद का ज्ञान इस तरह रच बस गया हैं हम लोगों के खून में कि चाहकर भी हम इसे भुला नहीं सकते ...आज भले ही बहुत कम ज्ञान हैं हमें आयुर्वेद का पर पहले घर कि हरेक औरतों को इसका पर्याप्त ज्ञान था तभी तो आज दादी माँ के नुस्खे या नानी माँ के नुख्से पुस्तक बनकर छप रहे हैं। उस आयुर्वेद की छाया प्रति तैयार करके अरबी वाले 'यूनानी चिकित्सा' का नाम देकर प्रचलित कर रहे हैं।

जिस समय पश्चिम में आदिमानवों ने कपडे पहनना सीखा था...उस समय हमारे यहाँ लोग पुष्पक विमान में उड़ा करते थे। आज अगर व…

क्या गलत कहा आडवाणी जी ने ? यूपीए 2 को अवैध और करोड़ो रुपये देकर बनाई सरकार कहा तो क्या गलत है ?

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आईबीएन समूह के सर्वेसर्वा राजदीप सरदेसाई अगर ब्रिटेन या अन्य यूरोपीय देशों में होते तो निश्चित मानिए कि उनकी जगह जेल होती और उनके न्यूज चैनल आईबीएन पर ताला जड़ गया होता। सामाजिक जलालत अलग से झेंलनी पड़ती। कानूनों की घेरेबंदी में इनकी ईमानदारी के पचखडे उड़ गये होते। इनकी पेज थ्री संस्कृति जमींदोज हो जाती। सड़कों पर चलने के दौरान इनके उपर अंडे-टमाटरों की बरसात होती। इनकी ज्ञात और अज्ञात संपति भी अपराध की श्रेणी में खड़ी होती। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है जिसका मतलब है कि अनैतिक, पतनशील और भ्रष्ट सत्ता वाली व्यवस्था के अंतर्गत ही राजदीप सरदेसाई जैसी संस्कृति जन्म ले सकती है और फल-फूल सकती है।

कैश फॉर वोट कांड में राजदीप सरदेसाई एक अपराधी के तौर पर खड़े हैं।

एक साथ इन्होंने कई अपराधिक षडयंत्रों को रचा और संबंधित कानूनों के पचखड़े उड़ाये। प्रसारण नियमावली का उल्लंधन किया। दर्शकों और पाठको के कानूनी/नैतिक और परम्परागत अधिकार से वंचित किया। राजदीप सरदेसाई को न्यूज दबाने के षडयंत्र के लिए प्रसारण लाइसेंस दिये गये थे क्या? पत्रकारिता के मूल्यों और जिम्मेदारियों की ऐसी हताश प्रक्रिया के उदाहरण…

"अडवानी जी अब - संभावित राष्ट्रपति हो सकते हैं " ???

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 " सम्भावना" तलाशते रहने वाले मित्रों को,मेरा सादर नमस्कार !!
                       अगर जीवन से आशा और सम्भावना समाप्त हो जाए तो जीने का आनंद ही ख़त्म हो जाता है !! राजनीति में तो विशेष रूप से ये आवश्यक हो जाता है अन्यथा आप " लाइन " में नहीं रह पाते !! सन 2009 के चुनावों में भाजपा ने उनको संभावित प्रधानमंत्री मान लिया था लेकिन कोई क्या करता , संसद में उतनी सीटें ही नहीं मिल पायीं !!N.D.A. के घटक दल भीं  बेचारे क्या कर सकते थे ???
                        अब जनता के दिल में नरेंदर मोदी जी विराजमान हो चुके हैं !भाजपा उन्हें चाहे चुनावों से पहले अपना संभावित प्रधानमंत्री घोषित करे या बाद में ,ये उसके नेत्रित्व को सोचना है ! केंद्रीय भाजपा नेता सब अब सिर्फ केंद्र में मंत्री बन्ने के काबिल ही रह गए हैं !! या फिर राज्यपाल,चाहे वो सुषमा जी हों या जेटली जी,ये सबको समझना होगा !! और अगर भाजपा ऐसा नहीं करती तो अडवानी जी का कथन सत्य साबित हो जाएगा !!! भाजपा को घटक दलों से ये स्पष्ट कह देना चाहिए की चुनावों के बाद चर्चा करेंगे !!
                         अगर ऐसा नहीं होता , तो अन्…