Monday, January 16, 2012

" हमारा मुंह तो भगवान् जी ने ही काला करके हमे भेज दिया "......????

सांवले और काले मुंह वाले परम प्रिय मित्रो , जय श्री कृष्ण !! आज जय श्री कृष्ण इस लिए लिखा , क्योंकि वो भी काला था !! और हम भी काले हैं | आज कल सफेद मुंह वालों को काला बनाया जा रहा है !! जिसका मुंह कालाहो जाता है उसके समर्थक दुसरे का पोस्टर ही काला कर आते हैं !! ऐसा न जाने कब तक दोहराया जायेगा ....राम ही जाने .....!!!  " हमारा मुंह तो भगवान् जी ने ही काला करके हमे इस दुनिया में भेज दिया "......???? अब हम किसके आगे जाकर रोयें ?? बचपन में जब हमारी माता जी के सामने अपनी ये समस्या रखी तो वो दार्शनिक अंदाज़ में हमें समझाती  हुई बोलीं ...की बेटा भगवान श्री कृष्ण जी ने भी अपनी माता से यही सवाल पूछा था .? और उन्होंने मुझे सूरदास जी का भजन सुना कर शांत कर दिया था !! भारत के महानतम शरीफ , त्यागी , और मोह - माया से दूर रहने वाले श्री मान चिदम्बरम जी , प्रशांत भूषण जी , अडवानी जी , शरद पवार जी और त्याग की देवी श्री मति सोनिया जी को काले रंग से पोता जा रहा है या किसी को थप्पड़ मारा जा रहा है आदि आदि ?? जो की एक निंदनीय कार्य है बेशक सभी पार्टियों के नेता अपनी तनख्वाह बढ़ने के इलावा इस मामले में भी एक जुट हैं !! भाई इज्जत तो सबको प्यारी है न ....? परन्तु ये सारे लोग इस बात पर विचार क्यों नहीं करते की जनता को ये सब करने की नोबत ही क्यों पैदा हुई ?? क्यों आदर की भावना में कमी आई ???? क्यों रैलियों में खरीदकर भीड़ इकठ्ठा करनी पड़ती है ??? क्यों शराब पिलाकर या रूपये दे कर वोट खरीदने पड़ते हैं ??? राजनीति " धंधा " क्यों बन कर रह गयी ....??? कभी किया गया इन बातों पर विचार हमारे नेताओं द्वारा ......??? नहीं ....तो फिर कौन दोषी है जो इस प्रकार के काण्ड हो रहे हैं , उन सबके लिए ....???ज़रा " आइना " देखिये हजूर .....कंही आप का चेहरा भी तो काला नहीं हो चूका ......??? बचाइये अपने चेहरे को .....!! जय .....श्री .....राम ...!! प्रिय मित्रो , इस लेख को पढने के बाद कृपया अपने मित्रों को भी भेजें , और अपनी अनमोल राय भी इस ब्लॉग पर जा कर लिखें | हर बुधवार और रविवार को मेरे द्वारा सम - सामायिक विषयों पर लेख लिखे जाते हैं | जिनको आपका भरपूर प्यार और स्नेह मिल रहा है | हज़ारों की संख्या में आप इन्हें पसंद करते हैं , उसके लिए भी धन्यवाद !! और ज्यादा लेख देखने हेतु कृपया लाग - आन करें www.pitamberduttsharma.blogspot.com. ब्लॉग का नाम है " 5th pillar corrouption killer " इसी नाम से मेरा एक ग्रुप भी है | उसमे आप भी सदस्य बन सकते हैं और अपने विचार भी लिख सकते हैं || तो आज ही ज्वाइन कीजिये बिलकुल मुफ्त !! कोई चाहे तो इन लेखों को कंही भी प्रकाशित भी कर सकता है || ज्यादा जानकारी हेतु संपर्क करें :- पीताम्बर दत्त शर्मा , मोबाईल नंबर :- 09414657511

Sunday, January 15, 2012

" सोच - समझ " कर पीना जी अब, " रोज़ एक गिलास दूध ".....? ? ? ? ? ?

दूध पीन वाले सभी मित्रों को मेरा सलाम !! पिछले २ - ३ दिनों से समाचारों में लगातार आ रहा है की देश में नकली दूध की आवक युद्ध  स्तर हो रही है !! क्या गाँव क्या शहर सब जगह नकली दूध ही बन और सप्लाई हो रहा है !! जिस गाँव में एक भी गाय और भेंस नहीं वंहा रोज़ कई सो किलो दूध और खोया बन और बिक रहा है || दिल्ली के मंत्री जी भी मान रहे हैं की जब दूध की मांग बढ़ जाती है तो हम पौडर का दूध बना कर बेच देते हैं | इसलिए भाइयो और बहनों अब सोच - समझ कर पीना जी अब " रोज़ एक गिलास दूध ".....?????? T.V. वाले पत्रकार भाई तो दूध बनाने की विधि और विधान भी दिखाते हैं शायद इसलिए की जिसको अब तक नकली दूध बनाना नहीं आया वो भी सीख लें !! गाय - भैंस को पालने का श्रम तो अब किसी के बस में रहा नहीं , लेकीन दूध चाहिए डिब्बों में बंद और ज्यादा मात्र में तो नकली ही मिलेगा न ???? पहले हमारे ऋषियों मुनियों ने गाय पालन को " पुण्य " का कार्य बताया था तो हम बचपन में अपनी माता से पूछा करते थे की माँ सिर्फ गाय पालना ही पुन्य क्यों ??? भैंस पलने से पुन्य क्यों नहीं मिलता दूध तो हमें वो भी देती है तो माँ हमारी हमें समझाती थी की गाय के शरीर में सभी देवता विराजमान रहते हैं इसलिए उसका गोबर , मूत्र ,और सारा शरीर यानि उसकी चमड़ी भी हमारे काम आती है | गाय का दूध ओशधियों से भरपूर होता है भैंस का नहीं , इसलिए गाय को पालना पुन्य बताया गया है !! तो आज मैं सभी मानव जातियों से हाथ जोड़ कर अनुरोध करना चाहता हूँ की कम से कम एक गाय तो हम अवश्य पालें अन्यथा समय वो आ जायेगा जब इस संसार में कोई भी खाद्य वस्तु असली नहीं मिलेगी !! हमारे साइंस दानों ने प्रयोग कर - कर के सभी सब्जियों और फलों का असली स्वाद ही गायब कर दिया है !! नदियाँ हमारी शुद्ध नहीं रहीं !! हमारे ग्रंथों में भी लिखा है की जब प्रलय का समय आता है तब नदियाँ गायब हो जाती हैं , प्रकृति अपनी खूबियों को समेटने लगती है और पाप बढ़ जाता है तब समझलो प्रलय आने वाली है ............तो वोही कुछ हो रहा है .......आया समझ में .....बोलो ....जय ....श्री .....राम !!! 

Wednesday, January 11, 2012

" साधू " और " चोरी - ठगी " का " मिलन " बहुत पुराना है .....! ! !

साधू जैसे स्वभाव वाले मेरे प्रिय मित्रो , मेरा साधुवाद स्वीकार करें !! साधू का मन कब चोरी , ठगी , आशिकी , उठाईगिरी और राजनीती करने पर आ जाये ...!! कुछ कहा नहीं जा सकता ?? आप कहोगे की आज ये कौन सा विषय ले कर बैठ गए शर्मा जी , तो मेरे परम मित्रो , मैं ये कन्हुगा की साधुओं का सनातन इतिहास है उस पर ज़रा नज़र डाल लो , तो आपको मेरी उपरोक्त बात सच्ची जान पड़ेगी || वो चाहे ऋषि " विश्वामित्र " हों या " दुर्वासा " , रावन भी " साधू के भेष में ही सीता जी का अपहरण कर ले गया था ???? हर युग और काल में साधुओं के भेष में कुछ न कुछ अत्याचार या अनाचार अवश्य हुआ है !! राजनीति में हस्तक्षेप तो शुरू से यानी ब्रह्मा जी के समय से ही होता आया है ????  बहुत पहले जब हम छोटे थे तो हमारे पिता जी बताया करते थे की बेटा जो साधू लोग हरिद्वार , ऋषिकेश , कनखल , कुरुक्षेत्र और बनारस आदि में अपना डेरा या आश्रम बनाये बैठे हैं , उनमे से ज्यादातर साधू चोर और ठुग हैं | ये बात मुझे आज भी सत्य लगती है || रोज़ कोई न कोई साधू या संत अनाचार या दुराचार का दोषी पाया जाता है || ऐसे समाचार आते ही रहते हैं ||आप कहोगे की चलो मान लेते हैं की कुछ  साधुओं ने थोड़ी बहुत शरारतें कर दी होंगी , लेकिन आज ये विषय क्यों उठाया गया है ??? तो मेरा जवाब ये है की उत्तर - प्रदेश में एक साधवी जी ने एक नेता जी को ये मान कर B.J.P. में शामिल कर लिया की अब ये नेता शरीफ हो गया है क्योंकि बहन मायावती जी द्वारा B.S.P. से नकला जाना उनके मन पर चोट कर गया है ??? प्रदेश के ज्यादा समझ दार नेता श्री मान विनय कटियार जी ने भी झट से हाँ करदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी जी जो R.S.S. से संस्कार सीखकर आये हैं उन्होंने भी रातो रात अपनी सहमती दे दी !!! लेकिन .......!! एक और महात्मा और U.P. के ही B.J.P. नेता ने शोर मचा दिया ...... की ये उचित नहीं है , हम जैसे छोटे छोटे कार्यकर्ताओं को भी ये बहुत बुरा लगा की ताज़ा - ताज़ा अन्ना जी ने देश में भ्रष्टाचार के प्रति भावनाएँ जगाईं हैं और उसे सबसे पहले हमारी B.J.P. के नेत्रित्व ने ही तोडा .......???? और भ्रष्टाचारी अन्य नेताओं को ही बोलने का मौका दे दिया ??? जय हो समझदार नेताओं की ???  लालू यादव जी ने बहुत बढ़िया बात कही एक T.V. इंटरव्यू में , " कोई पार्टी न तो कला धन वापिस लाना चाहती है और न ही भ्रष्टाचार को मिटाना चाहती है ||  अगर वास्तव में काला धन देश में पड़ा है जो ,वो समाप्त करके देश के काम में लाना है तो लोगों की सारी  संपत्ति को " राष्ट्रीय संपत्ति " घोषित कर दिया जाना चाहिए || और बाद में एक - एक की जांच कर उसे उतना  धन दे दिया जाना चाहिए !! देश का " तंत्र "पूरी तरह से बिगड़ गया  है | कर्मचारी और अफसर जनता का वाजिब काम करते हुए भी डरते हैं | और लोगों तो टरकाने की कोशिश करते हैं || यंहा तक की R.T.I. तक का जवाब भी ठीक तरह से नहीं दिया जाता !! इसी उहापोह की स्थिति के चलते देश के चुनाव - आयोग ने भी U.P. में अजीब फैसला सुनाया है ....मूर्तियों को ढंकने का ???? न्यायालय भी दबाव में देखे जा सकते हैं !! मित्रो मैं तो कहता हूँ की एक बड़ा अधिवेशन बुलाया जाना चाहिए , जिसमे सभी तरह के जन - प्रतिनिधि , सेक्रेटरी , और क़ानून - विद  शामिल हों , देश के हर क़ानून पर विस्तृत चर्चा हो , सरकारी तंत्र से फ़ालतू के नियम और शर्तें बाहर कर देनी चाहियें , और नया संविधान बनाना चाहिए ??? ताकि रोज़ की झिख - झिख समाप्त हो जाये || इस अधिवेशन की अवधि तब तलक समाप्त नहीं होनी चाहिए जितनी देर सभी कार्य संपन्न न हो जाएँ ???? नेता चाहे जितनी मर्ज़ी सस्ती रोटियाँ और मुर्गे खा जाएँ .....????प्रकृति का नियम है बदलाव , और हमें इसे मानना ही चाहिए ,ऐसा नहीं सोचना चाहिए की ये संविधान हमारे बुजुर्गों ने बनाया था इस लिए इसे बदलना नहीं है ?? बोलो --- जय श्री राम !! 

Saturday, January 7, 2012

आखिर " उगल " ही दिया बी .जे .पी . ने " बाबू " को !! ??

सब कुछ लुटा के होश मैं आने वाले प्यारे दोस्तों , लुटा पुटा नमस्कार स्वीकार करें !! u. p. में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मर्ज़ी से नहीं , चोर श्री बाबू लाल कुशवाहा की मर्ज़ी से आखिर " उगल " ही दिया बी .जे .पी . ने " बाबू " को !! ?? सांप के मुंह में छुछुदर की तरह फंस गया था वो जो प्यारा लगा था केंद्रीय नेत्रित्व को या श्री विनय कटियार को ये हमें पता नहीं ??? लेकिन हमें ये अवश्य पता है की R.S.S. हो या B.J.P. दोनों में सत्ता सँभालने की या राजनीति करने की समझ अभी तलक विकसित नहीं हुई है !! आम कार्यकर्त्ता जिस बात को दूर से भांप लेता है उसे ये बड़े नेता बात हो जाने के बाद तक भी नहीं समझ पाते आश्चर्य की बात है ???? फिर अपनी न समझी को सही ठहराने हेतु अजीब - अजीब तर्क भी प्रवक्ता लोग देते हैं T.V. पर आ कर ???? 1975. को भी जनता पार्टी जब ढाई वर्ष ही शासन कर पाई , तब भी जनता में ऐसा ही मानना था की इन " विपक्षी " लोगों को राज करना ही नहीं आता ?? B.J.P. के पास जब सत्ता नहीं होती तब R.S.S. अपना हस्तक्षेप बाधा देता है , और जब राज करने का समय आता है और प्रशासनिक मुश्किल भरे निर्णय लेने होते हैं तब R.S.S. ये कहते हुए बाहर हो जाता है की हम हस्तक्षेप नहीं करते ???? मैं यंहा साफ़ करदूं की हालांकि बाबु लाल कुशवाहा को R.S.S. से पूछ कर पार्टी में शामिल नहीं किया होगा लेकीन  जिन्हों ने भी ये काम किया होगा वो अवश्य R.S.S. की अनुशंसा से पार्टी में मनोनीत हुए होंगे !! किसी भी नेता का कोई कोर्स या डिप्लोमा क्यों नहीं होता इस देश में ???? क्यों किसी का बेटा , बहन , पत्नी , भाई आदि एक दम से इस जनता का " लीडर " बन जाता है और उस पार्टी के एनी नेता उसके तलवे चाटने में लग जाते हैं ???? युवाओं को कोई नौकरी देनी हो तो इस देश में तरह - तरह के टेस्ट और इंटरव्यू आदि देने पड़ते हैं और ये नेता एक दम से देश के कर्ण धार बन जाते हैं , और ये समझ दार " जनता " देर सवेर उसे कबूल भी लेती है ??? अभी तो शुरुआत है ....... आगे 4. महीनो में क्या - क्या नाटक इस देश की जनता को देखने को मिलेंगे कुछ कह नहीं सकते ??? देश की जनता भी बड़ी भोली है एक उदहारण देता हूँ ... की एक गाँव में एक महात्मा आया और वंहा के कुछ लोगों को इकठ्ठा करके कथा सुनाने लगा ..... की एक जगह 5. किलो गुड पड़ा था , जनता बोली अच्चा जी , संत बोला वंहा एक एक करके बहुत साडी मखियाँ आकर उस गुड पर बैठने लगीं ....., जनता बोली अच्चा जी , संत बोला वो मख्खियाँ उस गुड को उठा कर चल दीं ..... जनता फिर बोली अच्चा जी ....., ???? तो भाइयो और बहनों तथा मेरे प्यारे दोस्तों ....जागते रहो .......!!! और जगाते रहो ......अन्यथा ....पता नहीं किस भेष मैं देश का दुश्मन आ जाए और देश को लूट कर चला जाये ......!! पंजाबी में कहते हैं की ......रब्ब ------ राखा ......!!  एक साप नाथ है तो दूसरा ....राजनीती का ...... नाग नाथ ........???? निवेदन :- सभी पाठक बंधुओं से , कृपया इसे पहले पढ़ें , पसंद आये तो इसे दूसरों को भी पढ़ाएं , तब अपने अनमोल विचार मेरे ब्लॉग पर ही जाकर लिखें तथा फिर इसे पसंद यानी लायिक करें !! धन्यवाद !

Wednesday, January 4, 2012

" राजनीति " " कला - या - साइंस ".....???

सभी कलाकार राजनीतिज्ञ मित्रो , झुक कर सलाम करता हूँ , कबूल कीजिये !! देश के ५ राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं , सभी राजनितिक दलों के नेताओं की " कलाकारी "आम - जनता को विभिन्न माध्यमो से नज़र भी आ रही है और समझ भी आ रही है !! जब मैंने b.a. में राजनीती शास्त्र पढ़ा तो पहला पाठ यही था की ये ससुरी राजनीती साइंस है या आर्ट ?? तब प्रोफेसर साहिब के लाख समझाने पर भी हम समझ ही नहीं सके थे की ये " राजनीती " साइंस और कला दोनों कैसे हो सकतीं हैं ????? लेकिन अब समझ में आ रहा है की वो पाठ सही था और गुरु जी भी सही थे !!पंजाब में बदल जी और कप्तान साहिब , u.p. में " मोसेरे भाई बहन " और b.j.p. वाले ऐसे ऐसे नाटक दिखा रहे हैं की नाटक करने में जो माहिर हैं , वो भी " दांतों तले उंगलियाँ " दबाने को मजबूर हो रहे हैं ????/ परम आदरणीय मुलायम जी और सुश्री माया बहन जी ने 4.साल 6. महीनो तलक तो कोंग्रेस पार्टी के साथ कदम से कदम मिला कर " सत्ता " का परम सुख भोगा केंद्र में , कहा तो ये गया की ये साथ साम्प्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखने हेतु था ??? लेकिन जनता ने देखा की इनका स्वयं का स्वार्थ ज्यादा था ??? सब मस्त हाथी की तरह राज करने में मस्त थे ?? अब जब चुनाव घोषित हुए तो सब एक दुसरे से नकली लड़ाई लड़ रहे हैं ?? बहन जी की सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे तो , प्रखर राजनीतिज्ञ का परिचय देते हुए , बिना कोई देर किये , अपने ऊपर कोई आंच न आने पाए , इस लिए अपने 20. मंत्रियों को बर्खास्त करके पार्टी से बाहर कर दिया || ताकि कोई बहन जी को " काला " न कह सके ??? जनता को भी अब कुछ सच्चाई सहने लायक हो जाना चाहिए , जैसे किसी प्रिय की मृत्यु हो जाने पर हम सब्र के इलावा कुछ नहीं कर पाते , उसी तरह , राजनीति में " सत्य " की मृत्यु को भी हमें कबूलना होगा !! इसके साथ - साथ सदाचार , निष्ठा और जनता की सेवा की भावना भी मृतु शैया पर पड़ी " भीष्म पितामह की तरह अपनी मृत्यु  की प्रतीक्षा कर रही है !! आज मूल्यों की अपेक्षा करने वाला " मूरख " साबित कर दिया जाता है !! चाहे वो अकेला हो या उसके पीछे लाखों की गिनती में इस देश की जनता ही क्यों न हो ??? जिस तरह से भारत के नेताओं ने " अन्ना " जैसे सच्चे व्यक्ति के जायज़ विषय पर चलाये गए आन्दोलन को न केवल लटका दिया है ,बल्कि उसकी धार को भोथरा भी कर दिया है .....?? उस से तो यही साबित होता है की हमारे नेता भी उच्च क्वालिटी के कलाकार हैं .... इन्हें तो " आस्कर " मिलना चाहिए ???? एक दल से निकले गए " चोरों " को दुसरे राजनितिक दल वाले अपने में शामिल करने के कार्य को कैसे उचित ठहराते हैं ??? ये कला भी भारत की जनता को देखने हेतु उपलब्ध हो रही है ????? मुझे तो इस अवसर पर मुकेश जी का एक गीत याद आ रहा है की ...." जय बोलो बे - ईमान की जय बोलो .........!!!!! बोलो जय श्री .....राम ....!!!

Sunday, January 1, 2012

आइये .. ! नव वर्ष पर खुशियों का, " सम्भोग " करें .....! ! !

मेरे प्यारे " संभोगी " मित्रो , नव वर्ष पर आइये हम सब प्यारी - प्यारी खुशियों का मिलकर " सम्भोग करे !! व्याकरण के ज्ञाता लोग जानते हैं की जिस तरह से मेरे जैसे कई सज्जनों को इंग्लिश नहीं आती , वैसे ही कई मित्रों को मुझ सहित हिंदी भी नहीं आती | कई ऐसे शब्द हैं जिन्हें बिना वजह के बुरा मान लिया गया है उन्हें किसी अच्छी जगह प्रयोग ही नहीं किया जाता | जैसे " सम्भोग " , ये शब्द सम + भोग , के दो शब्दों से बना एक प्यारा सा शब्द मात्र है जिसे बुद्धिजीवियों द्वारा केवल शारीरिक सुख भोगते वक्त को व्य्ख्याकित करने हेतु ही प्रयोग करते हैं | जबकि इसका शाब्दिक अर्थ मात्र इतना है की बराबर - बराबर किसी बात ,या वास्तु का आनंद उठाना | इसमें चाहे दो जने , भाग लेवें या दो से ज्यादा ...?? जैसे किसी खेल को देखते समय सेंकडो , हजारों लोग एक साथ ख़ुशी का भोग लगते है | या लंगर में इकठ्ठे हो कर सब भोजन करते हैं तो उसे सह भोज कहते हैं , वंहा " सम्भोग " शब्द का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता ??? शायद इसी लिए क्योंकि ये उस वक्त को दर्शाने हेतु प्रयोग होता है जब दो विपरीत लिंग वाले जीव शारीरिक आनंद उठाने मैं मगन होते हैं ??? न जाने क्यों हमरे समाज ने इस सुन्दर क्रिया को गन्दा बना दिया है ??? जबकि हमारे ऋषि - मुनियों ने इस विषय पर न केवल रिसर्च की है बल्कि " कोक - शास्त्र " नामक एक ग्रन्थ भी लिखा है | जिसे विदेशियों ने तो पढ़ कर ज्ञान प्राप्त किया , लेकिन हमने कभी उसे देखना भी उचित नहीं समझा ?? कुछ वर्ष पहले सेक्स की शिक्षा की बात भी चली थी लेकिन उसे दबा दिया गया || अगर हम हमारा धार्मिक इतिहास देखें तो हम पाएंगे की पौराणिक समय में स्त्रियाँ बहुत ही स्वतंत्र स्वभाव की होती थी , उन्हें अपना जीवन साथी चुनने की पूरी छूट होती थी , और सेक्स के बारे में भी पूरी जानकारी होती थी तभी तो कुंती ने " सूर्य " से " करण " रुपी पुत्र प्राप्त किया था ??? स्वयंबर तो तरह - तरह के हुए हैं || ये मुस्लिम राजाओं और अंग्रेजों के शासन में पर्दा प्रथा भय के कारन शुरू हुई क्योंकि ओर्तों की इज्जत को खतरा होता था !! शायद इसी लिए माताएँ अपनी पुत्रियों को सेक्स एक बुरी बात है यह समझाती हैं | जिसका फल ये होता है की वो उस सच्चे सुख को पाने और समझने से वंचित रह जाती है , जब तक उसे ये बात समझ आती है तब तलक वो 45. की हो चुकी होती है ??? इसी लिए हमारे हिन्दुस्तान में पुरुष भी बुढ़ापे में ज्यादा आशिकी करते हैं .......??? दूसरा शब्द है " बलात्कार " , ये शब्द भी बलात + कार्य , दो शब्दों से बना शब्द है , ये भी बुद्धिजीवी लोग सिर्फ उस वक्त प्रयोग में लाते हैं जब किसी ओरत के साथ किसी व्यक्ति ने जबरदस्ती शारीरिक सुख प्राप्त किया हो ...?? लेकिन बलात्कार तो तब भी होता है जब हम किसी से कोई भी कार्य जबरदस्ती करवाते हैं ????? जैसे आजकल कांग्रेसियों के साथ जनता और अन्ना , रामदेव जैसे लोग कर रहे हैं ....??? सभी नेता , ठेकेदार और अफसर लोग भारतीय " संपदा " का मिलकर " सम्भोग " ही तो कर रहे हैं .....???? जनता इनसे " बलात्कार " ही तो कर रही है उस सुख से वंचित करके जो उन्हें इन कार्यों से प्राप्त हो रहा है || इस लिए तो मुहावरा बना है की " मियाँ बीवी राज़ी , तो क्या करेगा .....क़ाज़ी ...??? हम इक्कसवीं सदी में प्रवेश कर रहे हैं .... हमें कुछ तो आधुनिक होना ही चाहिए की नहीं , एक तो सेक्स फ्री होना चाहिए और दूसरा भ्रष्टाचार फुल होना चाहिए .....???? तभी तो " प्रलय " आएगी ... या भगवन " कल्कि " अवतार लेंगे , और गीता में अपना दिया वचन पूरा करेंगे ...??? की ...." यदा यदा ही धर्मस्य , ग्लानिर भवति भारत:, अभ्युथानम : धर्मस्य तदात्मानं सृज्यम्य्हम ||...... बोलिए जय जय श्री ...राधे !!!!!!!! देश के दुश्मन , भारत पर तरह - तरह से वार कर रहे हैं , जो न तो जनता को समझ आ रहा है और न ही हमारे देश के करण धार समझ प् रहे हैं ??? जैसे नशे , नरेगा ,अश्लील साहित्य और पैसे की चमक से हमारा युवा वर्ग .. आलसी और कमज़ोर हो रहा है ?? TV.,फिल्मों से हमारी महिलाएं बिगड़ रही हैं ?? आज के नेता अपनी मूर्तियाँ लगाकर अपनी वाह -  वाही करवाना चाहते हैं देश के असली हीरों को लोग भूलते जा रहे हैं ???? नकली नोट छापे जा रहे हैं !! बोर्डर सिकुड़ रहे हैं .....??? रुपया गिर रहा है .... आदि आदि बहुत सी बाते हैं जिन पर हमें जागुरुक रहने की आवश्यकता है ...!! जय श्री राम !!.......तो सम्भोग करो , सब सम्भोग करो !! .....और मस्त रहो ....!!  

आखिर अंबेडकर को पीएम के तौर पर देखने की बात कभी किसी ने क्यों नहीं की ? -साभार :- श्री मान पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी !

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते । ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या राजनीतिक दल हमेशा उठाते रहे ...