Monday, December 31, 2012

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-...!!!


रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-






 मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।
आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।

बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये ।
शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो ।
सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।


नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी-
 दाम, दामिनी दमन, दम, दंगा दपु दामाद ।
दरबारी दरवेश दुर, दुर्जन जिंदाबाद ।

दुर्जन जिंदाबाद, अनर्गल भाषण-बाजी ।
कर शब्दों से रेप, स्वयंभू बनते गाजी ।

बारह, बारह बजा, बीतती जाय यामिनी । 
नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी ।।



मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल- रविकर 
विनम्र श्रद्धांजलि 
ताड़ो नीयत दुष्ट की,  पहचानो पशु-व्याल |
मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल |

रखो अपेक्षित ख्यालपिता पति पुत्र सरीखे
 बनकर सच्चा मित्र, 
हिफाजत करना सीखे ||


एक घरी का स्वार्थ, जिन्दगी नहीं उजाड़ो |
जोखिम चलो बराय, मुसीबत झटपट ताड़ो ||


बलात्कार के बाद की ज़लालत

Virendra Kumar Sharma at कबीरा खडा़ बाज़ार में -11 minutes ago

यह तो है बेहूदगी, होय दुबारा रेप ।
सड़ी व्यवस्था टेस्ट की, गया डाक्टर खेप ।
गया डाक्टर खेप, योनि में ऊँगली डाले ।
सम्भावना का खेल, गलत ही पता लगा ले ।
बार बार बालात, नहीं यह रविकर सोहै ।
रीति चुनो आधुनिक, बेहूदगी यह तो है ।



अस्त-व्यस्त नेटवर्क, ग्राम में बहुत व्यस्त था-रविकर

 सादर नमस्ते 
विदा 2012
स्वागत है 2013 
"क्षमा"
 व्यस्त बहुत रविकर रहा, कुहरा पाला शीत ।
दो डिग्री था न्यूनतम, यू पी से भयभीत ।
  यू पी से भयभीत, भाग के झारखंड में ।
नौ डिग्री में मौज, मजे से आज ठण्ड में ।
लम्बा यह व्यवधान, कर्म में किन्तु मस्त था ।
अस्त-व्यस्त नेटवर्क, ग्राम में बहुत व्यस्त था ।।
कर्तव्य पथ 
विसराता मनुष्य ।
अधिकार पर 
हर्षाता युग ।।
 निकृष्ट जीवन 
आत्मा अशुद्ध 
भूलता यथार्थ 
अनर्गलता पुष्ट ।।
चेतो रे चश्मों 
बहाओ प्रेमनीर 
देखने को हर्षित 
नववर्ष है अधीर ।। 
 शुभकामनायें

Friday, December 28, 2012

" रह गयीं अब दुनिया में " नाम " की खुशियाँ , तेरे मेरे किस " काम " की खुशियाँ.....??

         प्यारे दोस्तों,नमस्कार! आज मैं बहुत उदास हूँ !! जिंदगी साथ छोड़ गयी, मौत ने गले लगा लिया उसको , जो " जीना " चाहती थी !! लेकिन प्रश्न ये उठता है कि अगर वो स्वस्थ होकर हमारे समाज में रहने-जीने हेतु वापिस आ जाती,तो क्या हम और हमारा समाज उसे जीने देता,या मान-शान से रहने देता....????
 ओरत ही ओरत की दुश्मन वाली कहावत तो कंही सच नहीं हो जाती....??
                            
सड़े हुये system और सोये हुये जनतंत्र की परिणती है एक मौत..... कभी- कभी लगता है, क्या सचमुच हमारे देश मे प्रजातन्त्र है? यह कैसा प्रजातन्त्र है, जो राजतंत्र की तरह व्यवहार करता है? अपनी जिद और स्वयं को सर्वोच्च साबित करने के लिए किसी भी हद को पार कर सकता है.... दामिनी की मौत शायद तभी हो गई थी, जब उसे सिंगापूर के लिए रवाना किया गया, आखिर कैसे यह सरकार एक ऐसी शाखिसयत को जिंदा रहने दे सकती थी जो उसे आजीवन तमाचा दीखती रहे...! वो ज़िंदा रहना चाहती थी, लेकिन उसे मार दिया गया। उसे केवल 6 बलात्कारियों ने नही मारा, उसे मारा है आदिकाल से चले आ रहे इस पुरुषत्व के अहंकार ने.... आने वाले समय मे भी शायद कुछ परिवर्तित नहीं होगा, शोक सभाये होंगी, हमदर्दी का मुखौटा लगाए लोग, आसू टपकाएँगे, 31दिसंबर तक समाचार चैनल उसकी बातें करेंगे, और फिर हम सब नए साल की मस्ती मे डूब जाएंगे.... लेकिन याद रखना होगा हम सब को, मौत अंत नही है, यह एक शुरुआत है,। और अगर दामिनी के लगाए हुये तमाचे को महसूस नहीं किया हमने तो आज दामिनी कल कोई और...
 
                                                 नई दिल्ली: अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो... देश भर में महिलाओं के साथ बढ़ रही छेड़छाड़, दुष्कर्म और गैंगरेप की घटनाओं के बाद देश की हर बेटी शायद यही कहेगी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गैंगरेप की शिकार लड़की की मौत ने जहां पूरे देश का झकझोर कर रख दिया है, वहीं महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाओं में‌ किसी स्तर पर कोई कमी नहीं आ रही है। पिछले 48 घंटो में देश के कई हिस्सों में महिलाओं के साथ दरिंगदी का खेल खेला गया।

घटना 1: कार में अगवा कर छात्रा से गैंगरेप
हरियाणा के सोनीपत की कबीरदास कालोनी निवासी एक किशोरी ने पुलिस को शिकायत देकर तीन युवकों के खिलाफ उसे अगवा कर सामूहिक दुराचार करने का आरोप लगाया है। पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक पीड़िता मुरथल के एक स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ती है। गुरूवार सुबह वह घर से स्कूल के लिए निकली थी। ऑटो पकड़ने के लिए जब वह कालूपुर चुंगी पर खड़ी थी, तभी दो युवक एक बाइक पर वहां आए और उसे लिफ्ट की पेशकश करने लगे। किशोरी ने जब लिफ्ट लेने से मना किया तो युवकों ने वहीं खड़े रहकर किसी को फोन करके एक कार मंगवा ली। लड़की ने बताया कि उन्होंने जबरन उसे अपनी कार में डाला और सुनसान जगह पर ले जाकर सांय पांच बजे तक तीनों ने उससे दुराचार किया।पुलिस ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को कार सहित गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों को देर शाम धर दबोचा गया।

घटना 2: स्टूडियो में फोटो खिंचवाने गई युवती से गैंगरेप
गैंगरेप की दूसरी घटना भी सोनीपत की ही है। पीड़ित लड़की शुक्रवार सुबह महलाना चौक स्थित फोटो स्टूडियो में फोटो खिंचवाने गई थी। वहां स्टूडियो के मालिक प्रवीन और उसके दो अन्य साथियों ने उससे जबरन दुराचार किया। युवती ने वहां से निकलकर सिटी थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने दुकान के मालिक सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही है।

घटना 3: नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर दुराचार
भिवानी के गांव खानक में एक नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर गांव के ही युवक ने दुराचार किया। लड़की ने शिकायत में कहा है कि युवक ने अपने साथियों के साथ साजिश रच कर उसे बहला फुसलाकर गांव के ही एक खंडहरनुमा मकान में उसे बंधक बना लिया। युवक तीन दिन तक नाबालिक से दुराचार करता रहा। लड़की की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुराचार और उसके चार अन्य साथियों के खिलाफ साजिश रचने व छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज किया है।

घटना 4: अनाथ नाबालिग लड़की से दुराचार
फतेहगढ़ साहिब के थाना डिवीजन नंबर दो के एक गांव में एक नाबालिग लड़की से दुराचार का मामला सामने आया। मिली जानकारी के अनुसार 14 वर्षीय पीड़ित लड़की अनाथ है और अपने चाचा-चाची के पास रह रही है। पीड़ित आठवीं कक्षा की छात्रा है। आरोपी एक ट्रक ड्राइवर है और पीड़िता के परिवार को जानता है। गुरूवार को जब पीड़िता फतेहगढ़ साहिब में आयोजित शहीदी जोड़ मेले के उपलक्ष्य में लगाए गए लंगर में जा रही थी, तो काका सिंह उसे बहलाकर व डरा-धमकाकर अपने ट्रक में ले गया जहां उसने पीड़िता से दुराचार किया। पुलिस ने लड़की और उसके चाचा-चाची के बयान के आधार पर मामला दर्ज करके आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

घटना 5: फतेहपुर में मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या
फतेहपुर के हंसवा गांव में घर से खेलने निकली सात साल की मासूम से दुष्कर्म के बाद पड़ोसी दुराचारी ने चाकुओं से उसकी हत्या कर दी। गांव के खंडहर में रक्तरंजित शव मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। घंटों मौके से पुलिस को शव नहीं उठाने दिया गया। मौके पर पहुंचे एसपी के आश्वासन के बाद ग्रामीण माने। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लेने का दावा किया है। लापरवाही बरतने के आरोप में हंसवा चौकी इंचार्ज सुभाष पांडेय और हेड कांस्टेबल विमलेश को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है।

घटना 6: अमरोहा में शिक्षिका से गैंगरेप
शुक्रवार सुबह अमरोहा के हसनपुर में एक शिक्षिका दरिंदगी की शिकार बन गई। स्कूल जाते वक्त दो युवकों ने गन्ने के खेत में खींचकर उसके साथ गैंगरेप किया। वारदात पर भड़के ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर थाना घेर कर हंगामा किया पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा। देरशाम पुलिस ने आरोपी युवकों को गिरफ्तार भी कर लिया।
                                                          प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !! ( join this grup " 5th PILLAR CORROUPTION KILLER " )
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Thursday, December 27, 2012

पहले नए साल की शुभकामनाएँ देंगे और फिर खूब गालियाँ........Happy New Year.........!!????


उस रात मैं बहुत व्याकुल था। वैसे यहाँ व्याकुल शब्द मुझे कुछ जम नहीं रहा है क्योंकि इसका प्रयोग अक्सर कृष्ण के वियोग में गोप गोपियों के लिए किया जाता है कि वे कृष्ण के विरह में बहुत व्याकुल थे। अब मैं न तो गोप समान मोटा हूँ और न ही गोपियों जैसा कमसिन। तो उस रात मैं बहुत बैचैन था। उस रात यानी किस रात। ३१ दिसम्बर की रात। वर्ष के आखिरी दिन की रात। सब लोगों की तरह मैं भी इन्तज़ार कर रहा था कि कब रात्री के बारह बजें और `कृपाला जी नए साल के रूप में प्रकट हों। कब `हेप्पी न्यू इयर' का खाता खुले।
बेचारे सारे मोबाइल ठीक बारह का गजर बजते ही यातनाओं के अँधेरे में सफर करने के लिए बिना वाइब्रेशन मोड के ही उन पर आने वाले संकट की कल्पना से थर थर काँप रहे थे। सबेरे से ही लोग परेशान थे। नया साल जो आने वाला था। ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार ही आ रहा हो। रात के बारह बजते ही एक जोर के धमाके की आवाज़ सुनाई दी। कान के पर्दे शायद फट ही गए थे। थोडा सा पानी कान में डाल कर देखा कि कहीं गले में तो नहीं आ रहा है देख कर संतोष हुआ कि पर्दे अच्छी क्वालिटी के थे। ईश्वर ने पर्दो के टेण्डर में सबसे कम रेट वाले पर्दो जैसा झंझट नहीं पाला था। बाद में मालूम हुआ कि वह धमाका नए साल के आने की खुशी में पडौस के कुछ युवा नवजवानों ने किया था या हो सकता है पुराने साल के जाने की खुशी में किया हो जो किसी न किसी को केाई न कोई दु:ख जरूर दे जाता है।
यह पक्का हो गया था कि धमाका किसी आतंककारी गतिविधियों का परिणाम नहीं था। वैसे हमारे पडौस के उन वीर जवानों अलबेले और मस्तानों की खुशी का इज़हार यदा कदा सुतली बमों के धमाकों से ही हुआ करता था। वे भी किसी आतंककारी से कम नहीं थे। क्रिकेट मैच में भारत जीते तो धमाका, पाकिस्तान हारे तो धमाका, हाँकी में कोई भी जीते तो धमाका, क्योंकि अगर भारत के जीतने का इन्तजाऱ करते रहे तब तो सुतली बम पडे पडे ही सड़ जाएँगे। किसी परिचित की बारात हो तो उसके आगे धमाका कुछ न मिले तो प्रत्येक दिन कोई न कोई धार्मिक आयोजन तो हैं ही अर्थात धमाका करने के लिए कोई न कोई बहाना चाहिए। यदि बम पटाखेां से मन न भरे तो कानफोढू संगीत हाज़िर है। लगता है उन लोगों के कान के पर्दे भी किसी मोटी खाल के बने है या उनकी पूरी ही खाल गेंडे की खाल से बनी है जिस पर कोई असर नहीं होता है।
रात्रि के लगभग साढ़े बारह बजे तक आतंककारी गतिविधियाँ चलती रहीं और फिर उसके बाद मोबाइल और टेलिफोन ने मोर्चा संभाल लिया। लोग न तो खुद सो रहे थे न दूसरों को सोने दे रहे थे। सबको ये महसूस हो रहा था कि आज और इसी वक्त यदि इसको शुभ कामनाएँ नहीं दीं तो मालूम नहीं बेचारे का पूरा साल किस मुसीबत में गुज़रे। कोई भी मेरे जीवन में आने वाले पूरे वर्ष में होने वाली मुसीबतों की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने को तैयार नहीं था। `भई मैंने तो नया साल आते ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना तथा शुभकामनाएँ उन्हें उसी समय दे दीं थी अब उन पर मुसीबत आ गई तो इसमें मेरा हाथ नहीं है। हो सकता है गुप्ता जी का होगा उन्होंने अभी तक `हेप्पी न्यू इयर' नहीं बोला।
सुबह सुबह उठते ही दूध वाले ने आवाज़ लगाई। साब' नए साल की रामराम'।मैं उसकी इस राम राम का आशय समझ रहा था।उसका मतलब था कि आज एक तारीख हो गई और दूध का पुराना हिसाब चुकता कर दीजिए।जिन लोगों ने ये गीत बनाया कि `खुश है ज़माना आज पहली तारीख है' उन्होंने एक तारीख को आने वाले संकट की कल्पना नहीं की होगी।मैं `हेप्पी न्यू इयर' का ब्रह्मास्त्र फेकने वालों से मुँह छुपाता फिर रहा था। उसमें बहुत से लोग शामिल थे। दूध वाले के अतिरिक्त बर्तन वाली बाई, धोवन ,अखबार वाला, केबल वाला, टेलीफोन, बिजली, चौकीदार आदि आदि। तभी पडौसी जैन साहब बाहर दरवाजे के सामने से गुजरते दिखाई दिए।
मैं उनसे आँख चुराता कि उनकी आवाज़ आई। `` नव वर्ष आपको मंगलमय हो...''। लग रहा था जैसे आकाशवाणी हुई हो। मैंनें भी कुछ अभिनय करते हुए एकाएक चौंक कर इस तरह उनकी तरफ देखा जैसे मुझे इनकी उपस्थिति का भान उनकी आवाज़ सुन कर ही हुआ हो। न चाहते हुए भी मैं बस इतना ही कह पाया ``आपको भी''। पिछले कुछ दिनों पूर्व ही किसी बात पर उनसे मेरी कहा सुनी हो गई थी। मेरे घर की बाउन्ड्री की दीवार पर उन्होंने अपने कमरे की दीवार उठा ली थी तब से हमारी कुछ बोलचाल बन्द सी थी। नव वर्ष की शुभकामनाओं के पीछे उसका शायद यही मकसद था कि मैं अब उस मामले में चुप्पी साध जाऊॅं।
एकाएक शर्मा जी अपने स्कूटर पर सामने से आते दिखे। मैंनें उन्हें रोक कर वही प्रचलित जुमला उन की तरफ उछाल दिया। `हेप्पी न्यू ईयर' शर्मा जी। उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया लगता था वे मेरी बात को सुनकर भी अनसुना कर रहे थे। मैंने पुन: प्रसारण कर दिया। इस बार उन के माथे पर कुछ केंचुए से लहराते दिखाई दिए जिन्हें बल कहा जाता है।`काहे का न्यू ईयर' ये हमारा नया साल थोडे ही है। ये तो अंग्रेजों का नया साल है हमारा नया साल तो चैत्र में शुरू होता है उस समय शुभकामनाएँ दीजिएगा। अभी से क्यों हेप्पी फेप्पी लगा रखी है।' पर पूरी दुनिया तो आज ही नया साल मना रही है इसलिए आज भी शुभकामनाएँ स्वीकार कर लीजिए चैत्र में फिर ले लीजिए इसमें कौन सी अपनी गॉंठ से कुछ जा रहा है।`भैया बिना सही वक्त के न तो हम कुछ लेते है और न कुछ देते है। तुम्हें यदि इतना ही शौक है तो आज तो बहुत सारे मिल जाएँगे जो न जान न पहचान हर ऐरे गैरे को शुभकामनाएँ देते फिर रहे है। शुभकामनाएँ देने के कुछ पैसे तो लग नहीं रहे है। यदि पैसे लगते तो देखते कितने लोग शुभकामनाएँ देते'। मैंने तो सुबह से टीवी ही नहीं चलाया। जिस चैनल को चलाओ वही देश भर के लोगों के भले की कामना कर रहा है अरे तुम्हारे एक दिन कहने से ही क्या देश में खुशहाली आ जाएगी। अभी संसद की कार्यवाही के सीधे प्रसारण वाला चैनल देखो पहले तो सब एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएँ देंगे और फिर खूब गालियाँ। सारी शुभकामनाएँ एक तरफ धरी रह जाएँगी। झूठे कहीं के।
मुझे महसूस हुआ कि लोग अपने मुँह से तो औपचारिकतावश नए वर्ष या त्यौहारों पर दूसरों को शुभकामनाएँ देने की रस्म तो निभा देते हैं किन्तु दिल से नहीं देते। यदि सबके दिलों में दूसरों के प्रति शुभकामनाएँ देने की इच्छा बनी रहे तो खास मौकों पर इस रस्म को निभाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी।
By sharad tailang
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Wednesday, December 26, 2012

‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’.....!!!???


‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’

‘हम भ्रष्ट हैं और हमें भ्रष्ट होने का पूरा-पूरा अधिकार है’ – यह नारा लगाते हुए भ्रष्ट संघ ने भारत बंद का आवाहन किया। चूँकि भ्रष्ट होना कोई पाप नहीं है और भारतीय भ्रष्टों ने पिछले कई सौ वर्षों से भी अधिक समय से इसे सप्रमाण सिद्ध भी किया है, इस लिये हर क्षेत्र के भ्रष्टों ने बंद में बढ़-चढ़कर भाग लिया। परिणामस्वरूप सारे सरकारी दफ़्तर बंद हो गये, बाज़ार बंद हो गये, न्यायालय बंद हो गये, पुलिस थाने बंद हो गये, रेल गाड़ियाँ और यात्रा के साधन बंद हो गये और यहाँ तक कि संसद भी बंद हो गई। भ्रष्टों के तर्क मजबूत थे। उनके भारत बंद का आधार मजबूत था और सबसे बड़ी बात यह कि भ्रष्ट लोग मानव हैं, जिनके मानवाधिकारों और उनके शांतिपूर्वक हड़ताल करने के अधिकारों की संविधान भी रक्षा करता है, इस लिये पूरा भारत बंद हो गया। बचे केवल भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन और अनशन करने वाले मुट्ठी भर ईमानदार लोग, जिनकी ईमानदारी शंका के घेरे में आ रही थी तथा सरकार के थोड़े-से मन्त्री, जो इस बंद के समर्थक होते हुए भी राष्ट्रीय कारणों से इसमें शामिल नहीं हो सकते थे।

कुछ वर्ष पहले भ्रष्टों ने जब अपनी यूनियन बनाई थी, तो सम्बन्धित क़ानूनों का पूरा-पूरा पालन किया था और उसे सरकार के श्रम मन्त्रालय से मान्यता भी दिलवाई थी। सरकार के मन्त्रियों ने भ्रष्टों के इस अखिल भारतीय भ्रष्ट संघ की पूरी-पूरी मिन्नत-समाजत की और उन्हें रिश्वत देने की कोशिश भी की, लेकिन भ्रष्ट अपने भारत बंद से टस-से-मस नहीं हुए। उनका कहना था रिश्वत तो हम रोज ही लेते हैं, इसमें नई बात क्या है। सरकार हमारी सारी माँगों को माने और हमें रिश्वत के अलावा और भी बहुत कुछ दे, तब हम बंद वापस लेने पर विचार कर सकते हैं।

अखिल भारतीय भ्रष्ट संघ की माँगें न तो नाजायज थीं और न ही गलत। वह केवल यही चाहता था कि एक तो सरकार ऐसे सारे कानून रद्द कर दे, जो उन्हें भ्रष्ट होने पर अपराधी और दंडनीय मानते हैं। दूसरे, वह भविष्य में जनलोकपाल या लोकपाल नियुक्त करने का कोई प्रस्ताव पारित न करे। वह दंड संहिता को आमूल-चूल बदलकर यह स्वीकार करे कि भ्रष्ट होना मानवीय स्वभाव का अंग है और हर कोई भ्रष्ट हो सकता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य तो जन्म से ही भ्रष्ट यानि गंदा होता है, इस लिये मनुष्य हज़ारों सालों से भ्रष्ट रहे हैं और हमेशा होते आये हैं। रामायण और महाभारत को देख लीजिये। आपको विभीषण और शकुनि मिल जायेंगे। लाक्षागृह बनाने वाले मिल जायेंगे। इतिहास में आम्भी और जयचंद भी हुए हैं और मीर जाफर भी। अंग्रेज़ी की इस प्रसिद्ध कहावत का हवाला देते हुए कि गलती करना मनुष्य की प्रकृति है, अखिल भारतीय भ्रष्ट संघ ने दावा किया कि भ्रष्ट व्यक्ति दुश्चरित्र या पतित नहीं होता। मनुष्य अगर भ्रष्ट न हो, तो आज दुनिया के सारे काम ठप्प हो जायेंगे, देशों के बीच चीज़ों का क्रय-विक्रय नहीं होगा, शस्त्रास्त्र निर्माता देश अन्य देशों को कोई सामरिक सामग्री नहीं देंगे और सारे लेन-देन बंद हो जायेंगे। यही नहीं, संसार की अर्थव्यवस्थाएँ समाप्त हो जाएँगी। यह दलाली, दस्तूरी, सर्विस चार्जिज और कमीशन जैसी चीज़ें ही हैं, जो अर्थव्यवस्थाओं को फूलने-फलने देती हैं। इन्हें अन्य देश भ्रष्टाचार की संज्ञा नहीं देते। तब जाने क्यों, भारत जैसे पुरातन नैतिकता वाले देश ही देते जा रहे हैं। यह सब समाप्त होना चाहिये, ताकि हम सीना तान कर पूरी ईमानदारी से कह सकें कि हम सच्चे और असली भ्रष्ट हैं। इससे हमारा देश भी संसार की महाशक्ति बन सकेगा।

भारत बंध के दौरान अखिल भारतीय भ्रष्ट संघ ने एक और ऐतिहासिक घटना का हवाला दिया कि कैसे एक बार सम्राट् अकबर ने भी दलाली को भ्रष्टाचार मानते हुए इसपर प्रतिबन्ध लगाने की गलती की थी, जिससे उनका युवराज सलीम यानि जहाँगीर तक बिक गया था। हुआ यह था कि सम्राट अकबर के किसी मुँहलगे मुसाहिब ने उन्हें यह कह दिया कि जहाँपनाह, सामान बेचने वालों और सामान खरीदने वालों के बीच दलाल तो कुछ भी नही करते और पूँजी निवेश तक नहीं करते, लेकिन दलाली लेते हैं चोखी। उनका किसी भी सौदे में कोई नुक्सान नहीं होता, लेकिन मुनाफा जरूर होता है। सम्राट् अकबर को यह बात सही लगी, इस लिये उन्होंने दलाली पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि बीरबल ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी, लेकिन ज़िल्ले सुभानी नहीं माने। नतीजा यह हुआ कि अकबर के राज्य में दलाल भूखे मरने लगे। आख़िर वे अपने अत्यन्त अनुभवी और रिटायर्ड मुखिया के पास गये। मुखिया ने उनकी तकलीफों पर गौर करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि आप निशाख़ातिर रहें। मैं बादशाह सलामत को मनवा कर छोडूँगा कि दलाली बेईमानी नहीं है, इस लिये वे अपने इस प्रतिबंध को हटा लें।

मुखिया ने महारानी जोधाबाई का नमक खाया था। उसने उनके दरबार में फरियाद की, लेकिन बड़ी चतुराई के साथ। उसने महारानी से कहा – आपके इकलौते पुत्र और लाखों पीरों-फक़ीरों की दुआओं से प्राप्त हुए युवराज सलीम की जान खतरे में है।

यह सुनकर महारानी जोधाबाई की तो जान ही निकल गई। वे मुखिया से इसका उपाय पूछने लगीं।
तब मुखिया ने उन्हें सलाह दी कि वे सलीम को बेच दें, क्योंकि लोग मानते हैं अगर संकटग्रस्त सन्तान को किसी दूसरे को बेच दिया जाये, तो उसपर आई बला टल जाती है।
महारानी जोधाबाई ने फिर भी शंका जताई और मुखिया से सवाल किया कि भला युवराज को खरीदेगा कौन ?
स्वयं सम्राट अकबर – मुखिया ने उत्तर दिया।
लेकिन उन्हें इस काम के लिये राज़ी कौन करेगा – महारानी ने पूछा।
मैं करूँगा। आप यह काम मुझे सौंप दें – मुखिया ने कहा।
और मेरे लाल की कीमत ? जोधाबाई ने एक और जायज सवाल किया।
क़ीमत होगी पूरी अकबरी सल्तनत – मुखिया के पास जवाब तैयार था।
महारानी जोधाबाई सलीम को बादशाह अकबर को बेचने को तैयार हो गईं। घर की बात थी। न सलीम को किसी गैर को देना था, न ही महलों से बाहर निकालना या अपने से जुदा करना था।

महारानी को राज़ी करने के बाद दलालों के मुखिया ने सम्राट् अकबर के सलाहकार और परम प्रिय नवरत्न बीरबल का द्वार खटखटाया। बीरबल पहले ही बादशाह सलामत द्वारा लगाये प्रतिबंध का विरोधी था। उसने मुखिया की बात मानकर सम्राट् अकबर को यह कहकर मना लिया कि अगर इस मामूली से सौदे से युवराज पर आया संकट टल जाये, तो उसे बेचने में हर्ज ही क्या है। आख़िर महारानी अपने पुत्र को महाराज को ही तो बेच रही हैं, जो कोई गैर नहीं, स्वयं युवराज का बाप है।

सम्राट अकबर मान गये और उन्होंने जोधाबाई को पूरी सल्तनत देकर खरीद लिया। महारानी जोधाबाई ने मुखिया को मालामाल कर दिया। उधर बीरबल ने बादशाह सलामत को यह मानने के लिये मजबूर कर दिया कि देख लीजिये, दलाल कितने चतुर और बुद्धिमान होते हैं, जो चाहें तो युवराज और पूरी सल्तनत तक को बेचने का सौदा भी करा सकते हैं। सम्राट् अकबर के लिये अपने प्रतिबंध को समाप्त करना लाजमी हो गया।

अखिल भारतीय भ्रष्ट संघ ने यह ऐतिहासिक उदाहरण देकर सरकार को ऐसा कायल किया कि उसे उसकी माँगें माननी पड़ीं और उसने भ्रष्टों को वचन दिया कि हम न केवल भारतीय दंड संहिता को बदल देंगे, बल्कि जन लोकपाल और लोकपाल का प्रस्ताव भी संसद में हरगिज पारित नहीं करेंगे। 

By dr gautam 
                                                                                   प्रिय मित्रो, आपका क्या कहना है ...इस विषय पर ......???? अपने विचार आप मेरे ब्लॉग पर , जिसका नाम है..:- " 5th pillar corrouption killer " जाकर लिख सकते हैं !! जिसको खोलने का लिंक ये है...
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Tuesday, December 25, 2012

" वाहवाही " मिले मुझे," गाज़ " गिरे तुझ पे ! क्योंकि मैं नेता और तू कर्मचारी...?????

 देखलो  ,प्रिय   मित्रो !! लगातार   3बार दिल्ली  की   लोकप्रिय मुख्यमंत्री  श्रीमती  शीला  दीक्षित  जी  और  उनके सुपुत्र सांसद श्री संदीप दीक्षित जी पिछले 4 दिनों से केंद्र सरकार को कह रहे हैं कि दिल्ली के प्रदर्शन को बिगाड़ने में वंहा की " पुलिस"जी का हाथ है.....!! लेकिन गृह-मंत्रालय है की सुनता ही नहीं..!!

                             जब इतने बड़े नेताओं की बात सुनने में ये सरकार इतना वक्त लगाती है तो आम आदमी की बात ये सरकार जल्द सुनेगी,ऐसी उम्मीद ही भला क्यों की जाती है ??? आजकल तो नेताओं के हाथ बहुत ही बढ़िया " फार्मूला " हाथ लगा हुआ है, वो ये की अगर कोई गलत काम जनता के सामने खुल जाये तो झटसे करमचारियों पर गाज़ गिराकर उन्हें " बलि " का बकरा बना दो...!! और अगर कोई वाहवाही का काम भूल से हो जाये तो मालाएं स्वयं  पहन्लो.......!!!!????
                                एक बात ईमानदारी से कहनी पड़ेगी कि इस काम में कांग्रेसी नेता ही निपुण हैं या हो पाए हैं बाकी तो भावुकता में अपनी भूल स्वयं ही मानकर अपने पदों से स्तीफा दे देते है !! हां नयी पनीरी के गडकरी जी और येदियुरप्पा जी कुछ अपवाद भी हैं !!!???
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" सरकार के भोंपू, ये आधुनिक....पत्रकार "...??

                  किसी का साधन बनना, बुरा नहीं होता जब उद्देश्य भलाई का हो ! लेकिन जब सरकार की कमियाँ छिपाने हेतु, उनकी भाषा कोई " पत्रकार "  बोले तो समझो...." मामला गड़बड़ है " ! 
                    आज के नेता अपने आपको किसी राजा, और नेत्रियाँ स्वयं को किसी महारानी से कम नहीं समझतीं ! चाहे वो ग्राम स्तर के ही क्यों ना हो !! इसमें सत्ता के नशे का असर तो होता ही है , कुछ जनता की " जी-हजूरी " का भी दोष होता है ! पुराने भारतीय राजा तो रात को भेष बदल कर जनता के बीच में जाया करते थे, ये जानने हेतु कि उनके राजमे जनता, कैसे अपना जीवन व्यतीत कर रही है! लेकिन आज के नेता सिर्फ चुनावों के समय में ही जनता के बीच में जाते हैं, वो भी सिर्फ वोट लेने और झूठे आश्वासन देने हेतु !!


                      आजके नेता अपने वातानुकूलित कमरे,गाड़ियों और कार्यालय से बाहर निकलकर जनता के बीच जाने में अपनी हेकड़ी समझते हैं !! और उनके इस कदम को न्यायोचित ठहराने हेतु चेनलों वाले किसी रिटायर्ड कर्मचारी,पत्रकार                                                                                     से या किसी समाजसेवी से कहलवाते हैं !! यही कार्य प्रिंट-मिडिया वाले पहले से ही करते आ रहे हैं !! इसी लिए इनको सरकार का भोंपू भी कहा जाता है !! ये ही वो लोग होते हैं... जो चोर को बताते हैं की सरकार में वन्हां " पोल" है वंहा जाकर चोरी कर..!! और जाकर सरकार को भी बोल आते हैं की चोरी हो सकती है...जी आपके यंहा तो बड़ी पोल पड़ी है....!!! सब कुछ घट जाने के पश्चात जनता को अपनी सुविधा अनुसार " खबर " बनाकर , बहस सुनाकर या खबर छाप कर जनता को सूचित करते हैं !! 
                         दिल्ली में हुई बलात्कार की घटना को बढ़ा-चढ़ा कर किसने बताया.....??? " मिडिया " ने.... !! आन्दोलन की ज्यादा कवरेज़ करके भीड़ किसने इकठ्ठी की...??? " मिडिया " ने...!! वंहा पक्ष-विपक्ष के नेताओं को जाने हेतु बाध्य किसने किया ...?? " मिडिया " ने......!! लाठीचार्ज में मासूम पिटे, किसने शोर मचाया....??? मिडिया ने...!! पिटने वाले मासूमों या " शरारती-तत्वों " के हाथ एक सिपाही चढ़ गया जिसकी आज मौत हो गयी,का दोषी आन्दोलन कारियों को किसने बनाया....??? " इसी मिडिया " ने.....!!!  अब बताइए......."आप" क्या करे !!???
                           जनता  सबकी " बदमाशियां " जान चुकी है....., बारी-बारी से सबका नंबर आने वाला है......सब - अब-सुधार दिए जायेंगे, कोई ....पहले,तो कोई थोडा....बाद में....!!! क्यों ..जनता..???? है कि नहीं .........!!!!!
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Sunday, December 23, 2012

" 5th pillar corrouption killer " द्वारा सफलता पूर्वक कराया गया सभी राजनितिक दलों के कार्यकर्ताओं का सम्मलेन ओजस्वी व जागरूक विचारों के आदान-प्रदान से संपन्न !! आगे और कार्यक्रम कराये जाने की अनुशंसा भी प्रकट की...!!

प्रिय मित्रो, सादर नमन !!    " 5th pillar corrouption killer " द्वारा सफलता पूर्वक कराया गया सभी राजनितिक दलों के कार्यकर्ताओं का सम्मलेन ओजस्वी व जागरूक विचारों के आदान-प्रदान से संपन्न !! आगे और कार्यक्रम कराये जाने की अनुशंसा भी प्रकट की उपस्थित सज्जनों ने !!
                       पूर्व घोषित कार्यक्रमानुसार,सूरतगढ़ की अग्रवाल धरमशाला में गणमान्य नागरिक इकठ्ठे हुए, जिनमे सर्व श्री प्रयाग चन्द अग्रवाल,भागीरथ कडवासरा,श्याम मोदी,एन.डी.सेतिया,पवन मोदी,विनोद गर्ग, के.के. खास्पुरिया,सोहन अग्रवाल,अमित कल्याणा,श्याम नागपाल, अमर सिंह जाटोलिया,संपत बगेरिया,तुलसी राम शर्मा,अरविन्द कौल,महेन्दर जाटव, राजिंदर पटावरी, विजय स्वामी, रामलाल,जसबीर सिंह जस्सा, सहित कई पार्षद, समाजसेवी व कार्यकर्त्ता शामिल थे !! 
                          सर्वप्रथम भारत माता के चित्र का पूजन व पुष्प माल्यार्पण किया गया ! फिर श्री प्रयाग चन्द अग्रवाल जी को कार्यक्रम का अध्यक्ष चुना गया, फिर अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया, फिर " 5th pillar corrouption killer " ब्लॉग के संचालक व लेखक श्री पीताम्बर दत्त शर्मा ने इसकी स्थापना,संचालन,के कारण, इसकी महत्ता और भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से समझाया ! तत्पश्चात सभी मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किये तथा इस ब्लॉग द्वारा चलाये जाने वाले कार्यक्रमों में अपनी रूचि व सहमती प्रकट की !! सबने इस कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा कर इंटरनेट के इस माध्यम का भरपूर फायदा लेकर, इसका प्रयोग कर समाज की बुराइयां दूर करने वाले प्रोग्राम चलाने हेतु कहा !! किसी दबाव में ना आया जाये,ऐसा भी कहा गया !!



                              अंत में ब्लॉग संचालक ने सबका धन्यवाद प्रेषित किया !
                           प्यारे दोस्तो,सादर नमस्कार !! ( join this grup " 5th PILLAR CORROUPTION KILLER " )
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Friday, December 21, 2012

" आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!!

  "प्यार करना" सीख चुके,मेरे सभी मित्रों को  मेरा  सादर प्रणाम !! हिंदी सिनेमा का एक गीत था कि...                                                                                                    " आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!! जो बहुत प्रसिद्ध हुआ था ! आज मुझे अपने देश में इस " रस " की बड़ी कमी सी महसूस हो रही है ना जाने क्यों......!! तुलसी दास जी रामायण में कह गए हैं कि " कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा !! फेसबुक, ट्विटर के जमाने में प्यार के नाम तो हैं,लेकिन सच्चा प्यार कंही नज़र ही नहीं आता !! 
                          मेरे एक प्रिय मित्र डा. पुनीत अग्रवाल जी ने पति-पत्नी के प्यार पर एक कविता लिखी है ......आप भी पढ़िए ज़रा....
               थोड़ा मुसकुरा ले----कम से कम तू तो बिक लेती----150012
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थोड़ा मुसकुरा ले।
परेशान पति ने पत्नी से कहा –
‘एक मैं हूं जो तुम्हें निभा रहा हूँ
लेकिन अब,
पानी सर से ऊपर जा चुका है
इस लिये ‘आत्म-हत्या’ करने जा रहा हूँ।’
पत्नी बोली – ‘ठीक है,
लेकिन हमेशा की तरह
आज मत भूल जाना,
और लौटते समय
दो किलो आटा जरूर लेते आना।

पत्नी ने पति से कहा — ‘तुम रोज-रोज
नदी में छलांग लगाने की कहते हो
लेकिन आज तक तुमने छलांग लगाई? ‘
पति बोला — चेलैंज मत कर
वरना करके दिखा दूंगा,
अभी मैं तैरना सीख रहा हूँ
जिस दिन आ जाएगा
छलांग भी लगा दूंगा।’

पति बोला — अगर तू
इतनी ही परेशान है
तो मुझे छोड़ क्यों नहीं देती,
ये पति-पत्नी का रिश्ता
तोड़ क्यों नही देती।
पत्नी बोली — इतनी जल्दी भी क्या है
मेरे साजन भोले,
पहले तेरी सारी संपत्ति
मेरे नाम तो हो ले।

पत्नी ने सुबह-सुबह पति को जगाया
पति बड़बड़ाया –
‘दो मिनट बाद नहीं जगा सकती थी
ऎसी भी क्या जल्दी थी
कितना अच्छा सपना दिख रहा था,
राजा हरिस्चन्द्र बना मैं और मेरा परिवार
चौराहे पर बिक रह था।’

पत्नी बोली — ‘फिर,
दो मिनट में वहां कौनसी तुम्हारे लिए
रोटी सिक लेती,’
वह बोला — बेवकूफ,
रोटी सिकती या न सिकती
पर दो मिनट में
कम से कम तू तो बिक लेती।

                                                                                         तो मित्रो !! सबसे सच्चा प्यार तो   केवल माता और पुत्र का माना गया है !! लेकिन उसमें भी आजकल मिलावट पैदा हो गयी है !! किया क्या जाए .......???? आजकल तो बस फरेब ही फरेब रह गया है !! एक और मशहूर गीत की दो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैंकि............." कसमे वादे, प्यार वफ़ा, सब बातें हैं , बातों का क्या ??? कोई किसी का नहीं है , ये झूठे, नाते हैं नातों का क्या......???????प्रिय मित्रो, आपका क्या कहना है ...इस विषय पर ......???? अपने विचार आप मेरे ब्लॉग पर , जिसका नाम है..:- " 5th pillar corrouption killer " जाकर लिख सकते हैं !! जिसको खोलने का लिंक ये है...
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आखिर अंबेडकर को पीएम के तौर पर देखने की बात कभी किसी ने क्यों नहीं की ? -साभार :- श्री मान पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी !

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते । ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या राजनीतिक दल हमेशा उठाते रहे ...